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डिफेंस न्यूज

ईरान के डर से बॉम्बर लेकर भागा अमेरिका, आखिर क्या था यूके के बेस में?

ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 05 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:27 PM IST
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अक्टूबर 2026 की शुरुआत में अमेरिका ने ब्रिटेन स्थित अपने महत्वपूर्ण एयरबेस से सभी बमवर्षक विमान वापस बुला लिए. यह बेस आरएएफ फेयरफोर्ड है जो लंदन से करीब 160 किलोमीटर पश्चिम में ग्लॉस्टरशायर में स्थित है. Photo: Getty

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पेंटागन ने पुष्टि की कि यहां तैनात सभी अमेरिकी बॉम्बर अपने घर के ठिकानों पर लौट गए हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार यहां करीब एक दर्जन यानी 12 बी-1 लैंसर बमवर्षक विमान तैनात थे. ये विमान ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों में इस्तेमाल हो रहे थे. Photo: Getty

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सितंबर के अंत में बेस के पास संदिग्ध गतिविधियों के बाद गिरफ्तारियां हुईं और ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान की इसमें भूमिका के मजबूत संकेत हैं. ईरान ने इन आरोपों से इनकार किया है. यह स्पष्ट करना जरूरी है कि हटाने वाले विमान फाइटर जेट नहीं बल्कि लंबे रेंज वाले बमवर्षक थे. Photo: Getty

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मुख्य रूप से बी-1बी लैंसर बॉम्बर थे जिनकी संख्या लगभग 12 बताई गई है. कुछ रिपोर्ट्स में पहले बी-52 जैसे अन्य बॉम्बर भी इस बेस से उड़ान भरते रहे थे लेकिन हालिया वापसी में बी-1 पर जोर है. बी-1 एक सुपरसोनिक बमवर्षक है जो भारी मात्रा में बम और मिसाइल ले जा सकता है. Photo: Getty
 

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ये विमान अमेरिका से सीधे ईरान तक जाने की बजाय ब्रिटेन के बेस से उड़ान भरकर दूरी और समय दोनों बचाते थे. पेंटागन ने कहा कि ये सभी विमान अब अमेरिका के अपने ठिकानों पर वापस आ गए हैं. जरूरत पड़ने पर वहां से भी वैश्विक हमले कर सकते हैं. Photo: Getty

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सितंबर 2026 के अंत में आरएएफ फेयरफोर्ड के पास तीन सफेद वैन और मास्क पहने कुछ लोगों की गतिविधि देखी गई. ब्रिटिश पुलिस ने पांच ब्रिटिश नागरिकों को आतंकवाद और विस्फोटक से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार किया. बाद में एक ब्रिटिश-ईरानी दोहरी नागरिकता वाले व्यक्ति को भी हिरासत में लिया गया. सभी को जमानत पर छोड़ दिया गया लेकिन जांच जारी है. Photo: Getty

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ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान की भूमिका के मजबूत संकेत हैं. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार नए खतरे की जानकारी मिली जिससे कमांडरों को बेस से विमान तुरंत हटाने का आदेश देना पड़ा. कुछ विमान तो एयर रिफ्यूलिंग प्लेन के तैयार होने से पहले ही उड़ान भर गए. यह कदम असामान्य माना जा रहा है क्योंकि शांतिपूर्ण सहयोगी देश में इतनी तेजी से इतने बड़े विमानों को हटाना आम बात नहीं है. Photo: Getty 

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आरएएफ फेयरफोर्ड लंबे समय से अमेरिकी बॉम्बर के लिए यूरोप में महत्वपूर्ण ठिकाना रहा है. 2026 की शुरुआत में ईरान के साथ तनाव बढ़ने के बाद ब्रिटेन ने अमेरिका को इस बेस से रक्षात्मक हमलों की अनुमति दी थी. यहां से उड़ान भरने वाले विमान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमला करने वाले ईरानी मिसाइल ठिकानों को निशाना बना रहे थे. Photo: Getty

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ईरान ने जुलाई में चेतावनी दी थी कि उसके खिलाफ इस्तेमाल होने वाला कोई भी बेस वैध निशाना होगा. इसलिए इस बेस पर सुरक्षा का खतरा बढ़ गया था. विमान हटाने से अमेरिका ने अपने महंगे और महत्वपूर्ण सैन्य सामान को संभावित हमले से बचाने की कोशिश की है. Photo: Getty

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यह घटना मध्य पूर्व में चल रहे तनाव को यूरोप तक ले आई है. एक तरफ अमेरिका अपनी सैन्य क्षमता बनाए रखने की बात कर रहा है तो दूसरी तरफ सहयोगी देश में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं. ब्रिटेन में जनता की राय पहले से ही इस युद्ध में ज्यादा उलझने के खिलाफ है. Photo: Getty

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विमान वापस अमेरिका भेजने से स्थानीय खतरा तो कम हुआ लेकिन लंबे रेंज के हमलों की क्षमता पर असर पड़ सकता है. पेंटागन का कहना है कि अमेरिका से भी ये विमान किसी भी समय निशाना साध सकते हैं. फिर भी फेयरफोर्ड जैसे बेस की भूमिका भविष्य में बदल सकती है. Photo: Getty

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यूके के बेस से हटाए गए विमान मुख्य रूप से 12 बी-1 बमवर्षक थे न कि आम फाइटर जेट. ईरान से जुड़े संभावित प्लॉट के डर ने अमेरिका को यह असामान्य कदम उठाने पर मजबूर किया. यह घटना दिखाती है कि आधुनिक संघर्ष सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रहता बल्कि सहयोगी देशों के ठिकानों तक खतरा पहुंचा सकता है. Photo: Getty

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आगे की जांच से ज्यादा जानकारी सामने आएगी लेकिन फिलहाल अमेरिका ने अपने विमानों को सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया है. Photo: Getty

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