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डिफेंस न्यूज

मुंबई पुलिस कैसे देती है सेलिब्रिटीज, फिल्म स्टार्स और बिजनेसमैन को सुरक्षा?

ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 19 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:04 PM IST
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मुंबई बॉलीवुड की राजधानी होने के साथ-साथ कई बड़े बिजनेसमैन का भी घर है. यहां रहने वाले सेलिब्रिटीज, फिल्म स्टार्स और उद्योगपतियों को अक्सर धमकियां मिलती रहती हैं. ऐसे में मुंबई पुलिस की प्रोटेक्शन एंड सिक्योरिटी ब्रांच उनके लिए सुरक्षा व्यवस्था करती है. लेकिन यह सुरक्षा हर किसी को आसानी से नहीं मिलती. Photo: Getty 

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महाराष्ट्र सरकार की 2017 की संशोधित नीति के अनुसार निजी व्यक्तियों को सुरक्षा तभी दी जाती है जब उनकी जान को वास्तविक खतरा हो. सामाजिक स्टेटस या पैसे के आधार पर नहीं. अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए फायरिंग हमले ने इस पूरे सिस्टम को फिर से चर्चा में ला दिया है. सुरक्षा पाने के लिए व्यक्ति को मुंबई पुलिस की प्रोटेक्शन ब्रांच में आवेदन करना पड़ता है. आवेदन में खतरे का कारण विस्तार से बताना होता है. Photo: Getty

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इसके बाद स्टेट इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट या संबंधित शाखा खतरे का आकलन करती है. धमकी पत्र, खुफिया जानकारी, पिछली घटनाओं और वर्तमान जोखिम को ध्यान में रखा जाता है. जांच रिपोर्ट संयुक्त पुलिस आयुक्त (लॉ एंड ऑर्डर) या उच्च अधिकारियों के पास जाती है. मंजूरी मिलने पर सुरक्षा का स्तर तय होता है. Photo: Getty

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मुंबई पुलिस के प्रोटेक्शन एंड सिक्योरिटी विंग शहर के अंदर यह फैसला लेता है. राज्य स्तर पर चीफ सेक्रेटरी, होम सेक्रेटरी और डीजीपी मिलकर समीक्षा करते हैं. सुरक्षा स्थाई नहीं होती. समय-समय पर खतरे का पुनर्मूल्यांकन होता है और स्तर बढ़ाया, घटाया या हटाया जा सकता है. टाइगर श्रॉफ की घटना इसके जीवंत उदाहरण के रूप में सामने आई. Photo: Getty

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18 अक्टूबर 2026 को जुहू में टाइगर श्रॉफ के वाहन पर अज्ञात बाइक सवार हमलावरों ने कई राउंड फायरिंग की. अभिनेता फुटबॉल ग्राउंड से निकल रहे थे. उनके ड्राइवर घायल हो गए, लेकिन टाइगर खुद सुरक्षित रहे. इस घटना के तुरंत बाद मुंबई पुलिस ने टाइगर श्रॉफ की सुरक्षा बढ़ा दी और उन्हें पुलिस एस्कॉर्ट के साथ घर पहुंचाया. Photo: Getty 

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जुहू इलाके के अन्य वीआईपी और सेलिब्रिटीज की सुरक्षा भी कड़ी कर दी गई. विशेष रूप से फिल्ममेकर रोहित शेट्टी के आवास पर अतिरिक्त ध्यान दिया गया, क्योंकि कुछ महीने पहले उनके घर पर भी फायरिंग की घटना हो चुकी थी. पुलिस ने 12 से 15 विशेष टीमें गठित कीं और क्राइम ब्रांच को जांच सौंपी.टाइगर श्रॉफ को तत्काल अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी और निगरानी मुहैया कराई गई.  Photo: Getty

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भारत में सुरक्षा मुख्य रूप से एक्स, वाई, वाई-प्लस, जेड और जेड-प्लस श्रेणियों में बांटी जाती है. खतरे की गंभीरता के आधार पर स्तर तय होता है. X श्रेणी में आमतौर पर तीन पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर्स (PSO) तीन शिफ्ट में 24 घंटे साथ रहते हैं. कई अभिनेता इसी स्तर पर होते हैं. Y श्रेणी में घर के बाहर रात में तीन सशस्त्र गार्ड अतिरिक्त होते हैं. वाई-प्लस अधिक गंभीर खतरे के लिए है. इसमें छह पीएसओ तीन शिफ्ट में 24 घंटे और घर पर पांच सशस्त्र गार्ड होते हैं.  Photo: Getty

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कभी-कभी एस्कॉर्ट वाहन भी मिलता है. सलमान खान और शाहरुख खान जैसे स्टार्स को इस स्तर की सुरक्षा दी गई है. टाइगर श्रॉफ की घटना के बाद उनकी सुरक्षा भी इसी तरह के उच्च स्तर की ओर बढ़ाई गई लगती है. Z और Z-प्लस सबसे ऊंचे स्तर हैं. इनमें 22 या उससे अधिक कर्मी, आर्मर्ड वाहन और कमांडो शामिल होते हैं. यह मुख्य रूप से मुख्यमंत्री या बहुत उच्च खतरे वाले बिजनेसमैन जैसे मुकेश अंबानी को मिलता है. Photo: Getty

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नागरिकों, सेलिब्रिटीज और बिजनेसमैन को सुरक्षा मुफ्त नहीं मिलती. 2017 की नीति के अनुसार उन्हें अग्रिम शुल्क चुकाना पड़ता है या तीन महीने के शुल्क के बराबर बैंक गारंटी जमा करनी होती है. शुल्क पुलिसकर्मियों के वेतन, वाहन और अन्य खर्चों के आधार पर तय होता है. यह व्यक्ति की मासिक आय का 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता. जिनकी मासिक आय 50,000 रुपये से कम है, उन्हें छूट मिल सकती है. Photo: Getty

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राजनेताओं को आधिकारिक ड्यूटी के दौरान सुरक्षा मुफ्त मिलती है, लेकिन निजी सुरक्षा के लिए भुगतान जरूरी है. टाइगर श्रॉफ जैसे मामलों में भी सुरक्षा भुगतान आधार पर दी जाती है, हालांकि तत्काल खतरे में पुलिस पहले सुरक्षा सुनिश्चित करती है और औपचारिकताएं बाद में पूरी होती हैं. Photo: Getty

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मुंबई पुलिस की प्रोटेक्शन ब्रांच मुख्य जिम्मेदार है. इसमें विशेष रूप से प्रशिक्षित कर्मी होते हैं. सुरक्षा कर्मी नियमित रूप से बदले जाते हैं. घर की सुरक्षा, यात्रा के दौरान एस्कॉर्ट और कार्यक्रमों में अतिरिक्त बल की व्यवस्था की जाती है. स्थानीय पुलिस स्टेशन जैसे जुहू, बांद्रा भीड़ नियंत्रण और नियमित गश्त संभालते हैं. Photo: Getty

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टाइगर श्रॉफ की घटना के बाद जुहू इलाके में नकाबंदी बढ़ाई गई और वीआईपी आवासों की निगरानी कड़ी की गई. यह सिस्टम सिर्फ शारीरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं. खुफिया जानकारी जुटाना और संभावित खतरों की निगरानी भी इसका हिस्सा है. इस सिस्टम की आलोचना भी होती है कि प्रभावशाली लोग आसानी से सुरक्षा हासिल कर लेते हैं. पुलिस बल का एक हिस्सा निजी सुरक्षा में लगा रहता है. Photo: Getty

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