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अंडमान-निकोबार कमांड के 25 साल पूरे, जानिए क्यों जरूरी है ये भारत के लिए

शिवानी शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 07 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:32 PM IST
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भारत का पहला और एकमात्र संयुक्त सेवा ऑपरेशनल कमांड अंडमान एंड निकोबार कमांड (एएनसी) अपने रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका है. इस ऐतिहासिक अवसर पर भारतीय नौसेना के नौकायन पोत आईएनएसवी नीलकंठ को श्री विजय पुरम में भव्य समुद्री स्वागत समारोह आयोजित किया गया. Photo: ITG

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पोत ने विशाखापत्तनम से 700 समुद्री मील की चुनौतीपूर्ण समुद्री यात्रा पूरी की. यह यात्रा 27 सितंबर 2026 को शुरू हुई थी और एएनसी के 25 वर्ष पूरे होने के जश्न का हिस्सा है. यह आयोजन कमांड के मूल मंत्र- संयुक्तता, तालमेल और पूर्वी समुद्री सीमा का प्रहरी- को जीवंत रूप से दर्शाता है. Photo: ITG

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आईएनएसवी नीलकंठ की यह यात्रा सिर्फ एक साधारण यात्रा नहीं थी. नौकायन समुद्री कौशल का सबसे कठिन रूप माना जाता है. इसमें साहस, सहनशक्ति, स्थिति की समझ और समुद्र के प्रति गहरा सम्मान जरूरी होता है. खुले समुद्र में 700 समुद्री मील तय करना आसान काम नहीं. तेज हवाएं, ऊंची लहरें और बदलते मौसम के बीच पोत को सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाना क्रू के अनुभवी कौशल का प्रमाण है. Photo: ITG

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यह अभियान भारतीय नौसेना की उस परंपरा को मजबूत करता है जिसमें साहसिक गतिविधियों के जरिए पेशेवर समुद्री कौशल बढ़ाया जाता है. भारतीय महासागर क्षेत्र की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने वाले जवानों के लिए ऐसी यात्राएं प्रशिक्षण का अहम हिस्सा बनती हैं. Photo: ITG

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आईएनएसवी नीलकंठ के फ्लैग पॉइंट के पास पहुंचने पर समुद्र में औपचारिक ‘फ्लैग इन’ समारोह आयोजित किया गया. अंडमान एंड निकोबार कमांड के कमांडर-इन-चीफ वाइस एडमिरल विनीत मैकार्टी ने खुद जे-24 नौकायन नौका पर सवार होकर इस समारोह का नेतृत्व किया. उनके साथ तीन लेजर क्लास और पांच ऑप्टिमिस्ट क्लास की नौकायन नौकाएं तथा भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल की कई मोटर बोट शामिल थीं. Photo: ITG 

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यह दृश्य संयुक्तता का जीवंत उदाहरण बना. इसके अलावा छह भारतीय नौसेना के जहाजों और दो तटरक्षक जहाजों ने सम्मान गलियारा बनाकर नीलकंठ को बंदरगाह तक पहुंचाया. समारोह का समापन मरीना बे पर हुआ जहां वाइस एडमिरल मैकार्टी ने औपचारिक रूप से पोत को फ्लैग इन किया. इसके बाद उन्होंने पोत पर चढ़कर क्रू की प्रशंसा की. उन्होंने उनकी उत्कृष्ट नेविगेशन, हिम्मत और नौकायन भावना की सराहना की. यात्रा का संदेश था- एक साथ चलें, एक साथ जीतें. Photo: ITG

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अंडमान एंड निकोबार कमांड की स्थापना 1 अक्टूबर 2001 को हुई थी. यह भारत का एकमात्र ऐसा कमांड है जहां सेना, नौसेना, वायुसेना और तटरक्षक बल एक साथ काम करते हैं. इसका मुख्य काम पूर्वी समुद्री सीमा की सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी रखना है. 25 वर्ष पूरे होने पर यह समारोह सिर्फ जश्न नहीं, बल्कि तीनों सेवाओं के बीच तालमेल को और मजबूत करने का अवसर है. Photo: ITG 

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नौसेना और तटरक्षक बल की संयुक्त उपस्थिति ने साफ दिखाया कि अलग-अलग बल एक लक्ष्य के लिए कैसे काम करते हैं. श्री विजय पुरम (पूर्व में पोर्ट ब्लेयर) जैसे रणनीतिक स्थान पर यह आयोजन क्षेत्र की सुरक्षा और समुद्री शक्ति को रेखांकित करता है. नौकायन सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि युद्धक तैयारी का हिस्सा भी है. Photo: ITG

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खुले समुद्र में लंबी यात्रा से जवानों में सहनशक्ति, निर्णय लेने की क्षमता और टीम वर्क बढ़ता है. क्रू ने विपरीत परिस्थितियों में पोत को सुरक्षित पहुंचाया. यह उपलब्धि युवा जवानों और अग्निवीरों के लिए प्रेरणा है. एएनसी के रजत जयंती संदेश -एक साथ चलें, एक साथ जीतें- सिर्फ नारा नहीं, बल्कि व्यवहारिक दर्शन है. समुद्र की चुनौतियों का सामना करने के लिए तीनों सेवाओं का एकजुट होना जरूरी है. Photo: ITG

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यह समारोह याद दिलाता है कि भारत की समुद्री सीमाएं सुरक्षित रखने के लिए संयुक्त प्रयास कितने महत्वपूर्ण हैं. आईएनएसवी नीलकंठ की सफल यात्रा और भव्य स्वागत एएनसी की 25 वर्षीय यात्रा का गौरवपूर्ण अध्याय बन गया है. आगे भी ऐसी साहसिक गतिविधियों से जवानों का कौशल निखरेगा और देश की समुद्री शक्ति मजबूत होगी. पूर्वी समुद्री सीमा का प्रहरी अपने संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है. Photo: ITG

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