मुंबई-पुणे 48 मिनट, चेन्नई-बेंगलुरु 73 मिनट, बुलेट ट्रेन से मिट जाएगी इन शहरों की दूरी

मुंबई–अहमदाबाद कॉरिडोर 2029 तक पूरा हो जाएगा, जो 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगा और यह दूरी केवल 2 घंटे से कुछ अधिक समय में तय करेगा.

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4,000 KM का नेटवर्क और 7 नए रूट (Photo-ITG) 4,000 KM का नेटवर्क और 7 नए रूट (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:08 PM IST

भारत की पहली बुलेट ट्रेन अभी शुरू भी नहीं हुई है और देश पहले ही सात अन्य कॉरिडोर की योजना बना रहा है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में लगभग 4,000 किलोमीटर के नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की थी. केंद्र सरकार अब इन सभी सात रूटों का निर्माण तेजी से, कम लागत में और बेहतर ढंग से करने के लिए एक 'मानक डिजाइन' तैयार कर रही है.

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भारत में प्रस्तावित सात नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–बेंगलुरु, हैदराबाद–चेन्नई, चेन्नई–बेंगलुरु, दिल्ली–वाराणसी और वाराणसी–पटना–सिलीगुड़ी, देश के उत्तर-पश्चिम से लेकर उत्तर-पूर्व तक फैली लगभग 4,000 किलोमीटर लंबी दूरी को कवर करते हुए प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ेंगे.

इन कॉरिडोरों के बनने से यात्रा के समय में क्रांतिकारी बदलाव आएगा, जहां मुंबई से पुणे का सफर महज 48 मिनट, पुणे से हैदराबाद 1 घंटा 55 मिनट, हैदराबाद से बेंगलुरु लगभग 2 घंटे, चेन्नई से बेंगलुरु 1 घंटा 13 मिनट, हैदराबाद से चेन्नई 2 घंटे 55 मिनट, दिल्ली से वाराणसी 3 घंटे 50 मिनट और वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक की दूरी केवल 2 घंटे 55 मिनट में पूरी की जा सकेगी.

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किन शहरों को फायदा

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में बताया कि 'नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड' (NHSRCL) मुंबई–अहमदाबाद प्रोजेक्ट से सीख लेते हुए वायाडक्ट, पुल, सुरंगों और स्टेशनों के लिए एक मानकीकृत डिजाइन लाइब्रेरीतैयार कर रहा है. परखे हुए मॉड्युलर डिजाइन का उपयोग करने से हर नए कॉरिडोर के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर को फिर से डिजाइन करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप त्वरित क्रियान्वयन, कम लागत, लगातार गुणवत्ता और आसान रखरखाव सुनिश्चित होगा.

NHSRCL आईआईटी (IITs) को तकनीकी भागीदार बनाकर 'भारत हाई स्पीड रेल प्रोग्राम' के तहत इस डिजाइन लाइब्रेरी को विकसित कर रहा है. यह कॉर्पोरेशन 350 किमी प्रति घंटे की गति में सक्षम एक 'ट्रेन कंट्रोल सिस्टम' का निर्माण कर रहा है, जिसे विशेष रूप से भारत की पर्यावरणीय और परिचालन स्थितियों के अनुकूल डिजाइन किया गया है. विदेशी मानकों को आयात करने के बजाय, भारत पहली बार अपने स्वदेशी हाई-स्पीड रेल मानदंड स्थापित करेगा.

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भारत के पहले बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट 508 किलोमीटर लंबे मुंबई- अहमदाबाद कॉरिडोर से सीखे गए अनुभवों के आधार पर ही भविष्य के हर कॉरिडोर को डिजाइन किया जा रहा है. सूरत और बिलीमोरा के बीच पहला 47 किलोमीटर का खंड 15 अगस्त 2027 को खुलेगा, इसके बाद 2028 में ठाणे–अहमदाबाद खंड शुरू होगा. 

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सात में से चार बुलेट ट्रेन रूटों की शुरुआती योजना (DPR) पास हो चुकी है, जबकि बाकी तीन रूटों पर जमीन और माहौल की जांच चल रही है. किसी भी रूट पर काम पूरी तरह तभी शुरू होगा, जब उसकी रिपोर्ट, खर्चा और बजट का इंतजाम पक्का हो जाएगा, खास बात यह है कि इन सभी रूटों पर जापान की आधुनिक तकनीक (J-Slab) का इस्तेमाल करके बिना गिट्टी वाले पटरियों के ट्रैक बनाए जाएंगे. भारत में इतने बड़े स्तर पर इस जापानी तकनीक का इस्तेमाल पहली बार होने जा रहा है.

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