बुलेट ट्रेन (Bullet Train) दुनिया में हाई-स्पीड रेल परिवहन का एक प्रमुख उदाहरण है. सामान्य ट्रेनों की तुलना में इनकी रफ्तार काफी अधिक होती है और इन्हें खास तौर पर तैयार किए गए ट्रैक पर चलाया जाता है. बुलेट ट्रेन का इस्तेमाल लंबी दूरी के शहरों के बीच कम समय में यात्रा पूरी करने के लिए किया जाता है.
बुलेट ट्रेन की शुरुआत जापान में हुई थी. जापान ने 1964 में टोक्यो और ओसाका के बीच शिंकानसेन सेवा शुरू की थी. इसे दुनिया की पहली आधुनिक हाई-स्पीड रेल सेवा माना जाता है. इसके बाद फ्रांस, चीन, जर्मनी, स्पेन और दक्षिण कोरिया समेत कई देशों ने हाई-स्पीड रेल नेटवर्क विकसित किए.
बुलेट ट्रेन की खासियत केवल इसकी तेज रफ्तार नहीं है. इसके लिए अलग तरह के ट्रैक, सिग्नलिंग सिस्टम, बिजली की व्यवस्था और सुरक्षा तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. ट्रैक को इस तरह तैयार किया जाता है कि ट्रेन तेज गति से चलते समय भी स्थिर रहे. हाई-स्पीड ट्रेनों में आधुनिक ब्रेकिंग और निगरानी प्रणाली भी होती है.
भारत में भी बुलेट ट्रेन परियोजना पर काम चल रहा है. मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर देश की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना है. इस कॉरिडोर की लंबाई करीब 508 किलोमीटर है और इसमें महाराष्ट्र तथा गुजरात के अलावा दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव का हिस्सा भी शामिल है. परियोजना में जापान की तकनीकी और वित्तीय सहायता का इस्तेमाल किया जा रहा है.
इस कॉरिडोर पर हाई-स्पीड ट्रेन की अधिकतम परिचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है. प्रस्तावित मार्ग में मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती जैसे स्टेशन शामिल हैं.
बुलेट ट्रेन के लिए भारत में कई स्थानों पर एलिवेटेड ट्रैक, सुरंग और विशेष रेलवे ढांचे का निर्माण किया जा रहा है. मुंबई और ठाणे के बीच समुद्र के नीचे सुरंग भी इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
भारत में बुलेट ट्रेन परियोजना का उद्देश्य हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी विकसित करना और भविष्य में देश में आधुनिक रेल परिवहन का विस्तार करना है. इसके साथ ही परियोजना के तहत नई तकनीक, विशेष रेल ढांचे और हाई-स्पीड ट्रेन संचालन से जुड़े अनुभव को विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है.
चीन घूमने गए एक शख्स ने वहां चलने वाली बुलेट ट्रेन का पूरा सिस्टम अपने वीडियो में दिखाया है. उसने बताया कि बुलेट ट्रेन में कभी भी टिकट चेक नहीं होती है. ऐसे में क्या ट्रेन में सफर के दौरान बिना टिकट वाले तो अंदर नहीं घुस जाते हैं?
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत उल्हास नदी पर बन रहे रेल पुल को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल खबरों का अधिकारियों ने खंडन करते हुए साफ किया कि भारी बारिश के कारण सिर्फ निर्माण सामग्री और मशीनरी की आवाजाही के लिए बनाया गया अस्थायी पहुंच मार्ग प्रभावित हुआ था. कोई पुल नहीं बहा है.
तेलंगाना के रंगासरेड्डी में किसानों का विरोध प्रदर्शन पांचवें दिन भी जारी है. किसान बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए उनकी खेती की जमीन अधिग्रहण करने को रोकने की मांग कर रहे हैं. BRS पार्टी ने किसानों का समर्थन किया है और सरकार को चेतावनी दी है कि वो किसानों की जमीनों में बिना कानूनी मंजूरी के दखल न दें.
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर जापान के पूर्व न्याय मंत्री हिदेकी माकिहारा ने भारतीय पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि परियोजना में देरी की सबसे बड़ी वजह भारतीय अधिकारियों और तत्कालीन मंत्री का रवैया रहा. हालांकि, भारत सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जापान के साथ परियोजना पर बातचीत सकारात्मक ढंग से आगे बढ़ रही है और निर्माण कार्य तय समय के अनुसार तेजी से जारी है.
First Bullet Train Of India: देश की पहली बुलेट ट्रेन अगले साल स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त 2027 से दौड़ने वाली है और इसके लिए कॉरिडोर पर ट्रैक और एडवांस्ड तकनीक से इलेक्ट्रिक लाइनें बिछाने का काम तेजी से चल रहा है.
मुंबई–अहमदाबाद कॉरिडोर 2029 तक पूरा हो जाएगा, जो 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगा और यह दूरी केवल 2 घंटे से कुछ अधिक समय में तय करेगा.