भारत में प्रॉपर्टी मार्केट को लेकर मिला-जुला रुझान सामने आया है. एक तरफ जहां रेजिडेंशियल सेगमेंट में सुस्ती की आशंका कुछ कम हुई है, वहीं दूसरी तरफ कमर्शियल यानी ऑफिस स्पेस का बाजार मजबूती से टिका हुआ है. नाइट फ्रैंक-नारेडको की ताजा रिपोर्ट में इस पूरे ट्रेंड को लेकर कई अहम आंकड़े सामने आए हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक रेजिडेंशियल सेगमेंट में बिक्री कमजोर रहने की आशंका जताने वालों की तादाद घटकर 45 फीसदी रह गई है, जबकि पिछली तिमाही में ये आंकड़ा 52 फीसदी था. इसी तरह नए प्रोजेक्ट लॉन्च कम होने का अंदेशा जताने वालों का प्रतिशत भी 45 से घटकर 38 फीसदी पर आ गया है. इससे साफ है कि घर खरीदने और बेचने को लेकर बाजार में जो निराशा पहले दिख रही थी, उसमें अब कुछ राहत के आसार बन रहे हैं.
हालांकि जब बात कीमतों की आती है तो तस्वीर बहुत ज्यादा नहीं बदली है. रिपोर्ट में शामिल 74 फीसदी लोगों का मानना है कि घरों के दाम या तो स्थिर रहेंगे या इनमें और इजाफा होगा यानी घर खरीदारों को महंगाई के मोर्चे पर फिलहाल बड़ी राहत मिलने के आसार कम ही हैं.
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ऑफिस सेगमेंट में मजबूती बरकरार!
रेजिडेंशियल सेगमेंट के उलट ऑफिस स्पेस मार्केट में भरोसा काफी मजबूत नजर आ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक 74 फीसदी लोगों को उम्मीद है कि लीजिंग यानी ऑफिस स्पेस किराए पर लेने की रफ्तार स्थिर रहेगी या इसमें बढ़ोतरी होगी. इसके साथ ही 76 फीसदी लोगों का मानना है कि नए ऑफिस प्रोजेक्ट्स का निर्माण भी स्थिर रहेगा या बढ़ेगा.
वहीं ऑफिस रेंटल यानी किराए को लेकर भी भरोसा मजबूत है, 81 फीसदी लोगों को उम्मीद है कि किराया स्थिर रहेगा या इसमें तेजी आएगी. इस मजबूती के पीछे इन्वेस्टर्स और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस का बढ़ता भरोसा भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है. रिपोर्ट में डेवलपर्स का सेंटीमेंट स्कोर 51 पर स्थिर बताया गया है, जबकि नॉन-डेवलपर्स यानी निवेशकों और वित्तीय संस्थाओं का सेंटीमेंट स्कोर 50 से बढ़कर 53 पर पहुंच गया है.
अब भी ओवरऑल सेंटीमेंट कमजोर!
रेजिडेंशियल और ऑफिस, दोनों सेगमेंट में अलग-अलग रुझान के बीच पूरे रियल एस्टेट सेक्टर का मौजूदा सेंटीमेंट स्कोर 48 पर है, जो पिछली तिमाही में 49 था और अब भी निराशा वाले दायरे में बना हुआ है. हालांकि भविष्य को लेकर सेंटीमेंट स्कोर 50 पर स्थिर है, जिससे पिछली भारी गिरावट के बाद अब हालात संभलते दिख रहे हैं. इसकी एक बड़ी वजह देश की आर्थिक सूरत में दिख रहा हल्का सुधार भी माना जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक 36 फीसदी लोगों को आर्थिक हालात बिगड़ने की आशंका है, जबकि पिछली तिमाही में ये आंकड़ा 50 फीसदी था. वहीं 31 फीसदी लोगों को आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद है.
फंडिंग को लेकर भी बाजार में बहुत ज्यादा हलचल के आसार नहीं हैं. आधे लोगों का मानना है कि कैपिटल की उपलब्धता में कोई बदलाव नहीं आएगा, वहीं करीब 19 फीसदी लोगों को इसमें सुधार की उम्मीद है. कुल मिलाकर देखा जाए तो रियल एस्टेट सेक्टर भले ही अभी पूरी तरह से रफ्तार ना पकड़ पाया हो, लेकिन रेजिडेंशियल में घटती निराशा और ऑफिस सेगमेंट की मजबूती इस बात का संकेत हैं कि बाजार धीरे-धीरे स्थिरता की तरफ बढ़ रहा है.
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आदित्य के. राणा