अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने देश में नौकरी करने वाले विदेशी कर्मचारियों को ग्रीन कार्ड दिलाने की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम (PERM) से आठ प्रमुख आईटी कंपनियों को सस्पेंड कर दिया है. इनमें इंफोसिस (Infosys), टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), विप्रो (Wipro) और एचसीएल (HCL) जैसी भारतीय आईटी कंपनियां भी शामिल हैं. अन्य कंपनियों में कॉग्निजेंट (Cognizant), माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), कैपजेमिनी (Capgemini), एडोबी (Adobe) शामिल हैं.
अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट की इस कार्रवाई के बाद टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने अपना रुख साफ किया है. कंपनी का कहना है कि प्रोग्राम इलेक्ट्रॉनिक रिव्यू मैनेजमेंट (PERM) से निलंबन का उसकी अमेरिकी रिक्रूटमेंट स्ट्रैटेजी पर खास असर पड़ने की आशंका नहीं है. टीसीएस अगले 5 साल में अमेरिका में 15,000 लोगों को नौकरी देने की अपनी योजना पर कायम है.
क्या है PERM, जिससे TCS को किया गया सस्पेंड?
परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन अमेरिका में नौकरी करने वाले विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है. ग्रीन कार्ड जिसे 'परमानेंट रेजिडेंट कार्ड' कहा जाता है, अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देता है. इस प्रक्रिया में एम्प्लॉयर को अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट के सामने यह साबित करना होता है कि संबंधित पद के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है और विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन और कामकाजी स्थितियों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा.
PERM की मंजूरी मिलने के बाद एम्प्लॉयर पात्र कर्मचारी के लिए ग्रीन कार्ड की आगे की प्रक्रिया शुरू कर सकता है. इसलिए इस प्रोग्राम से कंपनी के सस्पेंड होने का असर उन विदेशी कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जिनके ग्रीन कार्ड से जुड़े आवेदन उनकी कंपनी के जरिए दाखिल किए जाने हैं या जिनके मामले पहले से लंबित हैं. हालांकि, इसे H-1B वीजा कार्यक्रम पर रोक समझना गलत होगा. PERM और H-1B दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं. PERM पर कार्रवाई का मतलब यह नहीं है कि कंपनी के सभी H-1B वीजा रद्द हो गए हैं या वहां काम कर रहे सभी विदेशी कर्मचारियों की नौकरी चली जाएगी.
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
TCS ने अमेरिकी सरकार की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह श्रम विभाग के सभी निर्देशों का पालन करेगी. कंपनी ने जोर दिया कि अमेरिका में उसकी रिक्रूटमेंट स्ट्रैटेजी स्थानीय प्रतिभाओं को नौकरी देने पर आधारित है और इसके लिए वह कॉलेज कैम्पस से सलेक्शन की मजबूत व्यवस्था का इस्तेमाल करती है. कंपनी के मुताबिक, अमेरिका में उसके 31 ऑफिस और डिलीवरी सेंटर हैं, जहां उसने बड़ी संख्या में स्थानीय कर्मचारियों का वर्कफोर्स तैयार किया है.
TCS ने कहा कि वह अगले पांच वर्षों में 15,000 और लोगों को नौकरी देने की योजना पर कायम है. इसका उद्देश्य अमेरिका में स्थानीय कर्मचारियों की संख्या और बढ़ाना है. PERM आवेदनों के बारे में कंपनी ने बताया कि पिछले दो वर्षों में उसके आवेदन एक अंक में यानी बेहद कम संख्या में रहे हैं. इसी आधार पर TCS को उम्मीद है कि PERM से निलंबन का उसकी रिक्रूटमेंट स्ट्रैटेजी और कस्टमर्स के साथ कामकाज पर खास असर नहीं पड़ेगा.
PERM पर रोक से किसे हो सकती है परेशानी?
इस फैसले का असर खास तौर पर उन विदेशी कर्मचारियों के ग्रीन कार्ड मामलों पर पड़ सकता है, जिनके लिए संबंधित कंपनियां PERM प्रक्रिया का इस्तेमाल करना चाहती हैं. नए आवेदन दाखिल करने और लंबित आवेदनों की प्रक्रिया पर रोक से ऐसे कर्मचारियों को स्थायी निवास पाने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है. लेकिन इसका असर हर कर्मचारी पर एक जैसा नहीं होगा. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उसका मामला किस चरण में है और उसके लिए ग्रीन कार्ड की कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जा रही है. इस फैसले से H-1B वीजा पर काम करने वाले सभी कर्मचारियों के वीजा या रोजगार पर असर नहीं पड़ेगा.
आजतक बिजनेस डेस्क