देश के कई बड़े रेलवे स्टेशनों पर पीने के पानी में हानिकारिक बैक्टीरिया मिले हैं. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट में कई स्टेशनों के वाटर कूलर से लिए गए पानी के सैंपल में E.coli बैक्टीरिया पाया गया है. ये बैक्टीरिया कुछ प्रकार के गंभीर संक्रमण, दस्त और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं. कैग रिपोर्ट ने रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं.
यह ऑडिट भारतीय रेलवे के सभी जोन में शामिल 512 नॉन-सबअर्बन ग्रुप स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की समीक्षा के तहत किया गया था. जांच के दौरान चार बड़े रेलवे जोन के कुछ स्टेशनों से लिए गए वाटर कूलर के सैंपल E.coli पॉजिटिव पाए गए.
इन रेलवे स्टेशनों के पानी में मिला बैक्टीरिया
कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण रेलवे (SR) के कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन से लिए गए पानी के सैंपल में E.coli मिला. दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) के हैदराबाद स्टेशन का सैंपल भी पॉजिटिव पाया गया. इसी तरह मध्य रेलवे (CR) के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), भीवंडी रोड, कल्याण और लोनावाला तथा पूर्वी रेलवे (ER) के मधुपुर स्टेशन के वाटर कूलर सैंपल में भी E.coli की मौजूदगी सामने आई.
512 में से 458 स्टेशन जरूरी मानकों पर फेल
कैग की जांच सिर्फ पीने के पानी तक सीमित नहीं थी. ऑडिट में रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध यात्री सुविधाओं की भी समीक्षा की गई. इसमें सामने आया कि 512 में से 458 स्टेशन, यानी 89 फीसदी से अधिक, अनिवार्य न्यूनतम आवश्यकताओं (MEA) को पूरा नहीं कर रहे थे. कई स्टेशनों पर जरूरी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं थीं, जबकि कुछ जगहों पर सुविधाएं निर्धारित मानकों से काफी कम पाई गईं.
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रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे बोर्ड ने अप्रैल 2018 में NSG-1 से NSG-6 श्रेणी के स्टेशनों के लिए न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं (Minimum Essential Amenities), रिटायरिंग अकॉमोडेशन (RA) और डिफरेंटली एबल्ड (DA) से जुड़ी सुविधाओं के मानक तय किए थे. रेलवे बोर्ड ने सभी संबंधित स्टेशनों पर 31 अगस्त 2018 तक न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा था. रिपोर्ट के मुताबिक, हर स्टेशन कैटेगरी में सबसे पहले न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी थीं.
पानी, शौचालय, बैठने की व्यवस्था ठीक नहीं
इन न्यूनतम सुविधाओं में यात्रियों के लिए पीने का पानी, वेटिंग हॉल और बैठने की व्यवस्था शामिल थी. इसके अलावा प्लेटफॉर्म शेल्टर, यूरिनल, शौचालय, हाई-लेवल प्लेटफॉर्म, पंखे और फुट ओवरब्रिज (FOB) जैसी सुविधाएं भी निर्धारित की गई थीं. स्टेशनों पर डस्टबिन, घड़ी और पब्लिक एड्रेस सिस्टम जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी अनिवार्य सूची में रखा गया था.
भारत में 5,908 NSG स्टेशनों का बड़ा नेटवर्क
इन कमियों का दायरा काफी बड़ा है, क्योंकि भारतीय रेलवे के नॉन सब-अर्बन ग्रुप में कुल 5,908 स्टेशन शामिल हैं. इन स्टेशनों से 7,424 से अधिक नॉन-सबअर्बन पैसेंजर ट्रेनें रोजाना संचालित होती हैं. आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में करीब 292.4 करोड़ नॉन-सबअर्बन यात्रियों ने इन सेवाओं का इस्तेमाल किया. यानी स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी का असर बड़ी संख्या में रेल यात्रियों पर पड़ सकता है.
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नई दिल्ली और CMST जैसे बड़े स्टेशन भी पीछे
ऑडिट में देश के कुछ प्रमुख स्टेशनों पर भी यात्री सुविधाओं में कमियां दर्ज की गईं. नई दिल्ली, मुंबई सेंट्रल, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस रेलवे स्टेशन, हावड़ा और सियालदह जैसे NSG-1 स्टेशनों पर भी बैठने की व्यवस्था, शौचालय, यूरिनल, डस्टबिन और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन इंडिकेटर बोर्ड जैसी सुविधाओं में कमी पाई गई. पैसेंजर अमेनिटीज मैनेजमेंट सिस्टम की समीक्षा में भी कई खामियां सामने आईं. रिपोर्ट के मुताबिक, 201 स्टेशनों पर शौचालयों की संख्या कम थी, जबकि 403 स्टेशनों पर यूरिनल कम या उपलब्ध नहीं थे. इसके अलावा 2,035 स्टेशनों पर पानी के नल भी गायब पाए गए.
कैग ने स्टेशनों पर पानी की गुणवत्ता जांचने को कहा
रेल यात्रियों के लिए इस रिपोर्ट का सबसे अहम पहलू पीने के पानी की गुणवत्ता से जुड़ा है. जिन सुविधाओं का यात्रियों द्वारा रोजाना इस्तेमाल किया जाता है, उनमें कई स्टेशनों पर निर्धारित मानकों के अनुरूप व्यवस्था नहीं मिली. कैग ने रेलवे से पानी की सप्लाई व्यवस्था की जांच करने और पीने के पानी की व्यापक टेस्टिंग सुनिश्चित करने को कहा है. इसके लिए यूनिफॉर्म ड्रिंकिंग वॉटर क्वालिटी प्रोटोकॉल के तहत सभी निर्धारित पैरामीटर की जांच करने की जरूरत बताई गई है.
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रेलवे मंत्री ने तत्काल सुधार करने के निर्देश जारी किए
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे स्टेशनों पर पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. इसके तहत करीब 20,000 स्थानों पर, जिनमें वाटर कूलर भी शामिल हैं, नया 'टैंक टू टैप' वाटर फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाने की तैयारी है. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, अब पानी की नियमित जांच की जाएगी. एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी ने बताया कि आगे से स्टेशनों पर पानी की गुणवत्ता की निगरानी रेलवे बोर्ड के स्तर पर की जाएगी.
स्टोरेज टैंकों की तय समय पर सफाई और मेंटेनेंस भी सुनिश्चित किया जाएगा. अधिकारी ने कहा कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पानी की गुणवत्ता और सुधार से जुड़ी प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर सार्वजनिक की जाएगी. यह पूरी कार्रवाई कैग की रिपोर्ट में उठाई गई सभी आपत्तियों को दूर करने और यात्रियों के सफर के अनुभव को बेहतर बनाने की व्यापक मुहिम का हिस्सा है.
आजतक बिजनेस डेस्क