BS7 Emission Norms: E20 पेट्रोल के बाद अब देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में बदलाव की अगली बड़ी पटकथा लिखी जा रही है. पहले पेट्रोल में इथेनॉल का डोज बढ़ा, अब BS6 के बाद BS7 की एंट्री होने जा रही है. अप्रैल 2029 से लागू करने के लिए प्रस्तावित ये नियम सिर्फ इंजन से निकलने वाले धुएं का हिसाब नहीं मांगेंगे, बल्कि उन बेहद बारीक प्रदूषण फैलाने वाले बारीक कणों पर भी नजर रखेंगे, जो सांसों के रास्ते इंसानी जिस्म में दाखिल होते हैं. यानी आने वाले कुछ सालों में गाड़ियों का फ्यूल भी बदलता दिखेगा और प्रदूषण जांचने के पैमाने भी.
BS6 के बाद अब सरकार BS7 एमिशन नॉर्म्स की ओर बढ़ रही है. इसका असर आने वाले समय में कारों, SUV, ट्रकों और बसों के इंजन से लेकर उनके पॉल्यूशन कंट्रोल सिस्टम तक पड़ेगा. सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक, नए नियमों को अप्रैल 2029 से लागू करने की योजना है. सबसे पहले नई कारों और SUV को इन नियमों के दायरे में लाया जाएगा, जबकि दूसरे वाहनों के लिए अलग-अलग समयसीमा तय होगी.
लेकिन इस बदलाव की असली परीक्षा कई अलग-अलग मोर्चों पर होगी. क्या इससे हवा को साफ करने में मदद मिलेगी, क्या इसकी कीमत आखिरकार गाड़ी खरीदने वाले ग्राहकों को चुकानी पड़ेगी? क्या इस नए नियम के लागू होने के बाद मौजूदा BS6 गाड़ियों पर बैन लगेगा?
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सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने 12 अक्टूबर को जारी ड्राफ्ट गजट नोटिफिकेशन में BS7 नियमों को तीन चरणों में लागू करने का प्रस्ताव रखा है. यह प्रॉसेस अप्रैल 2029 से शुरू होकर अप्रैल 2035 तक चलेगा. हालांकि, अभी ये प्रस्तावित नियम हैं और अंतिम समयसीमा सरकार की ओर से जारी होने वाले फाइनल नोटिफिकेशन पर निर्भर करेगी.
तीन फेज में लागू होगा BS7
सरकार की प्रस्तावित योजना के मुताबिक, BS7 एमिशन नॉर्म्स को एक साथ सभी वाहनों पर लागू करने के बजाय अलग-अलग चरणों में लागू किया जाएगा. पहले चरण में नई कारों और SUV को शामिल करने की योजना है. इसके बाद छोटे कमर्शियल वाहनों और फिर भारी वाहनों को नए नियमों के दायरे में लाया जाएगा.
प्रपोजल के अनुसार, पहला चरण 1 अप्रैल 2029 से शुरू होगा. दूसरा चरण अप्रैल 2031 से लागू करने की योजना है, जबकि तीसरा चरण अप्रैल 2035 में लागू होगा. छोटे मालवाहक वाहनों और पिकअप वैन के लिए 2030 की समयसीमा बताई गई है. वहीं, बसों, ट्रकों और दूसरे भारी वाहनों को अप्रैल 2031 से नए स्टैंडर्ड के तहत लाने का प्रस्ताव है. दोपहिया वाहनों पर BS7 नियम कब से लागू होंगे, इसकी अलग तारीख घोषित की जाएगी.
क्या हैं BS7 एमिशन नॉर्म्स
BS यानी भारत स्टेज एमिशन नॉर्म्स ऐसे नियम हैं, जिनके जरिए सरकार वाहनों से निकलने वाले हानिकारक प्रदूषकों की मात्रा पर सीमा तय करती है. इनमें कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), हाइड्रोकार्बन (HC) और पार्टिकुलेट मैटर (PM) जैसे प्रदूषक शामिल हैं. इनका सीधा संबंध हवा की गुणवत्ता और लोगों की सेहत से है.
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BS7 का मुख्य उद्देश्य वाहनों से होने वाले प्रदूषण को और बेहतर तरीके से कंट्रोल करना है. इसके तहत केवल एग्जॉस्ट से निकलने वाले धुएं पर ही नजर नहीं रखी जाएगी, बल्कि बेहद छोटे प्रदूषणकारी कणों की पहचान और रियल टाइम रोड कंडिशन में वाहनों के परफॉर्मेंस की जांच भी ज्यादा सख्त की जाएगी.
प्रदूषण पर बारीक नज़र
BS7 नियमों में कारों और SUV के लिए सबसे अहम बदलाव पार्टिकल नंबर टेस्टिंग में देखने को मिल सकता है. मौजूदा सिस्टम में जिन कणों की गिनती 23 नैनोमीटर से शुरू होती है, नए सिस्टम में 10 नैनोमीटर तक के छोटे कणों को भी मापा जाएगा. यानी छोटे-छोटे बारीक कणों की भी काउंटिंग होगी. इसका मतलब है कि प्रदूषण की जांच के दौरान पहले की तुलना में कहीं छोटे कण भी पकड़ में आ सकेंगे. ये बारीक कण सांस के साथ फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं. लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से सांस और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.
ट्रक और भारी वाहनों पर ज्यादा सख्ती
BS7 के तहत ट्रकों, बसों और दूसरे भारी वाहनों के लिए प्रदूषण कम करने के नियम ज्यादा सख्त हो सकते हैं. प्रस्ताव में अलग-अलग वाहनों के लिए उत्सर्जन सीमा में करीब 20 से 50 प्रतिशत तक की कटौती का टार्गेट रखा गया है. इसका मतलब है कि वाहन कंपनियों को भारी वाहनों के इंजन और पॉल्यूशन कंट्रोल टेक्नोलॉजी में बदलाव करने पड़ सकते हैं.
टायर और ब्रेक से निकलने वाले कणों पर भी नजर
BS7 इमिशन नॉर्म्स के नए प्रस्तावित नियमों की खास बात यह है कि इसका दायरा केवल इंजन से निकलने वाले धुएं तक सीमित नहीं रहने वाला है. ड्राफ्ट प्रपोजल में टायरों के घिसने और ब्रेक लगाने के दौरान पैदा होने वाले कणों की भी जांच की जाएगी. इसके अलावा, रियल वर्ल्ड रोड कंडिशन में वाहनों के उत्सर्जन की निगरानी को मजबूत किया जाएगा. इंडिपेंडेंट टेस्टिंग एजेंसियां यह भी जांच कर सकेंगी कि बिक्री के बाद वाहन तय प्रदूषण मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं. इससे वाहन कंपनियों के लिए केवल लैब टेस्ट पास करना ही नहीं, बल्कि सड़क पर भी तय मानकों के मुताबिक परफॉर्म करना अहम होगा.
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क्या BS7 लागू होते ही पुरानी कारें बंद हो जाएंगी
BS7 नियमों के प्रस्ताव का मतलब यह नहीं है कि अप्रैल 2029 से देशभर में पुरानी कारों को बंद कर दिया जाएगा या उन्हें कबाड़ में भेजना अनिवार्य हो जाएगा. ये नया नियम केवल तय तारीख से बनने वाले नए वाहनों पर लागू होंगे. पहले से रजिस्टर्ड कारों और SUV पर इसक कोई असर नहीं होगा. वो पहले की ही तरह चलते रहेंगे.
वाहनों की उम्र, फिटनेस सर्टिफिकेट और पॉल्यूशन कंट्रोल सर्टिफिकेट (PUC) से जुड़े नियम अलग-अलग लागू रहेंगे. दिल्ली-NCR जैसे एरिया में पुराने वाहनों को लेकर उम्र और प्रदूषण से संबंधित पाबंदियां अलग नियमों और अदालतों के आदेशों के तहत तय होती हैं. इसलिए BS7 की समयसीमा से पुराने वाहनों के इस्तेमाल पर फिलहाल कोई असर नहीं होगा.
BS6 के बाद अब BS7 की तैयारी क्यों
भारत ने अप्रैल 2020 में BS4 से सीधे BS6 स्टैंडर्ड पर जंप किया था. इस दौरान सरकार ने BS5 को स्किप (छोड़) कर दिया था. इस बदलाव के दौरान वाहनों के इंजन और फ्यूल की क्वॉलिटी में बड़े बदलाव किए गए थे. पेट्रोल और डीजल में सल्फर की अधिकतम मात्रा 50 पार्ट्स पर मिलियन से घटाकर 10 पार्ट्स पर मिलियन कर दी गई थी. इससे वाहनों में मॉडर्न पॉल्यूशन कंट्रोल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल संभव हुआ.
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इसके बाद अप्रैल 2023 से BS6 के तहत रियल ड्राइविंग एमिशन (RDE) से जुड़े सख्त नियम भी लागू हुए. इस नए नियम का मकसद यह तय करना था कि, गाड़ियां रियल वर्ल्ड रोड कंडिशन में भी तय प्रदूषण सीमा का पालन करें. BS7 इसी सिस्टम को आगे बढ़ाने की कोशिश है. यानी सड़क पर उत्सर्जन की जांच भारत में पहली बार नहीं होगी, बल्कि मौजूदा व्यवस्था को ही और ज्यादा सख्त और मजबूत किया जाएगा.
क्या BS7 से महंगी होंगी गाड़ियां
नए एमिशन नॉर्म्स लागू करने के लिए वाहन कंपनियों को इंजन, फिल्टर और पॉल्यूशन कंट्रोल सिस्टम सिस्टम में बदलाव करने पड़ सकते हैं. इससे वाहनों की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ने की आशंका है. हालांकि, इसका ग्राहकों की जेब पर कितना असर पड़ेगा और शोरूम में गाड़ियों की कीमतें कितनी बढ़ेंगी, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है.
फिलहाल ड्राफ्ट है BS7, अंतिम फैसले का इंतजार
कुल मिलाकर, BS7 भारत के ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है. इससे वाहन कंपनियों को अपने इंजन और इमिशन कंट्रोल टेक्नोलॉजी को को अपग्रेड करना पड़ सकता है, जबकि ग्राहकों के लिए भविष्य में वाहनों की कीमतों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है. लेकिन फिलहाल सरकार ने नियमों का प्रस्तावित रोडमैप सामने रखा है. अंतिम नोटिफिकेशन आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-से वाहन किस तारीख से नए नियमों के दायरे में आएंगे और कंपनियों को किन तकनीकी बदलावों को अपनाना होगा.
अश्विन सत्यदेव