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डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने फिर बढ़ा दिया सस्पेंस... जंग खत्म करने के लिए MoU साइन, अब शुक्रवार का इंतजार

चार महीने से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग का आखिकार अंत होते नजर आ रहा है. दोनों देश ने इस दिशा में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर दस्तखत किया है. अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इस एमओयू पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने दस्तखत किए हैं.

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अमेरिका और ईरान के बीच चार महीने की जंग खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम लिया गया है (Photo: White House)
अमेरिका और ईरान के बीच चार महीने की जंग खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम लिया गया है (Photo: White House)

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले करीब चार महीनों से जंग चल रही थी. अब इस जंग को रोकने के लिए दोनों देशों ने एक बड़े समझौते पर साइन कर दिए हैं. इस समझौते को MOU यानी मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग कहते हैं. सीधे शब्दों में कहें तो एक लिखित सहमति कि हम आगे बात करेंगे और लड़ाई बंद करेंगे. इसे इस पूरे संकट का सबसे बड़ा ब्रेकथ्रू माना जा रहा है. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान से डील पर सस्पेंस बढ़ा दिया है.

इस साल फरवरी में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर सैन्य हमले किए. इसके जवाब में ईरान ने भी अमेरिका के ठिकानों पर और उसके दोस्त देशों पर हमले किए. इसी के साथ यह जंग शुरू हो गई और करीब चार महीने तक चलती रही.

अब दोनों देश इस लड़ाई को खत्म करने के लिए राजी हो गए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालीबाफ ने इस समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से साइन किए हैं. गालीबाफ ईरान की तरफ से बातचीत की टीम का नेतृत्व कर रहे हैं. एक बड़ा और औपचारिक साइनिंग सेरेमनी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में होने वाला है.

यह समझौता है क्या?

यह कोई पूरी शांति संधि नहीं है. यह एक फ्रेमवर्क है यानी एक ढांचा जो बताता है कि आगे की बातचीत किस दिशा में होगी. इसमें तय हुआ है कि लड़ाई को धीरे-धीरे कम किया जाएगा और जो मुद्दे अभी भी बाकी हैं उन पर अलग से तकनीकी बातचीत होगी.

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ईरान के परमाणु कार्यक्रम का क्या होगा?

ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम यानी परमाणु कार्यक्रम एक बहुत बड़ा और पेचीदा मुद्दा है. इस समझौते में इसे अभी सुलझाया नहीं गया है. इस पर आगे अलग से बातचीत होगी.

यह भी पढ़ें: डोनाल्ड ट्रंप के जन्मदिन पर नहीं करना था समझौता! जानिए क्यों ईरान ने आधी रात बीतने के बाद फाइनल की अमेरिका के साथ डील

होर्मुज को लेकर क्या बात बनी?

होर्मुज की खाड़ी यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है. दुनिया का बड़ा हिस्सा यहीं से तेल मंगाता है. जंग के दौरान यहां से जहाजों का आना-जाना बंद या बहुत कम हो गया था जिससे दुनियाभर में तेल की कीमतें और बाजार अस्थिर हो गए थे.

अब इस समझौते के बाद इस रास्ते से जहाज फिर से चलने लगेंगे. एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यातायात पहले से ही धीरे-धीरे बढ़ने लगा है. हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि दो हफ्तों में सब कुछ पहले जैसा नहीं हो जाएगा - यह धीरे-धीरे सामान्य होगा.

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि होर्मुज आंशिक रूप से खुल चुका है और शुक्रवार तक पूरी तरह खुल जाएगा. ट्रंप ने साफ किया कि ईरान को तब तक किसी तरह की प्रतिबंध राहत नहीं मिलेगी जब तक वह समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता. समझौते का पूरा पाठ भी शुक्रवार के बाद जारी किया जाएगा.

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जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप से जब पूछा गया कि अमेरिका-ईरान समझौते में ईरान को किसी तरह की प्रतिबंध से राहत दी जा रही है, तो उन्होंने इसका सीधा जवाब 'नहीं' में दिया.

राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक, समझौते पर हस्ताक्षर होने भर से ईरान को कोई प्रतिबंध राहत नहीं मिलेगी. पहले ईरान को समझौते की शर्तों का पालन करना होगा, उसके बाद ही अगले चरण में किसी तरह की राहत पर विचार किया जाएगा.

ओमान की भूमिका पर सवाल क्यों?

बातचीत से पहले ओमान इस पूरे मामले में बीच-बचाव करने वाले देश की भूमिका में था. लेकिन एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका ओमान के उस काम से खुश नहीं था. इससे समझ आता है कि बातचीत की यह प्रक्रिया आसान नहीं रही.

ईरानी स्पीकर को सुप्रीम लीडर का समर्थन था?

हां. अमेरिकी अधिकारी ने यह साफ किया कि ईरान के संसद स्पीकर गालीबाफ के पास ईरान के सुप्रीम लीडर यानी सर्वोच्च नेता का पूरा समर्थन था कि वे इस समझौते पर साइन करें और बातचीत करें. यह इसलिए जरूरी है क्योंकि ईरान में असली ताकत सुप्रीम लीडर के पास होती है.

अमेरिका क्या देगा ईरान को?

अमेरिका ने कहा है कि वह ईरान के जो पैसे विदेशों में जब्त यानी फ्रोजन किए हुए हैं उन्हें छोड़ सकता है. साथ ही कुछ आर्थिक पाबंदियां यानी सैंक्शन भी हटाए जा सकते हैं. लेकिन यह सब तभी होगा जब ईरान कुछ ऐसे कदम उठाए जो साबित हो सकें और जिन्हें पलटा न जा सके. अमेरिका ने इसे "सत्यापन-योग्य और अपरिवर्तनीय कदम" कहा है.

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यह भी पढ़ें: US-ईरान डील के बावजूद होर्मुज नहीं है सेफ, समुद्री रास्तों पर बारूदी सुरंगों का खतरा बरकरार

इजरायल और लेबनान का क्या?

ईरान ने दावा किया था कि इस समझौते में इजरायल का लेबनान से हटना भी शामिल है. लेकिन अमेरिकी अधिकारी ने इसे साफ तौर पर नकार दिया. उन्होंने कहा कि इजरायल का लेबनान से वापस जाना इस समझौते की कोई शर्त नहीं है.

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