
अमेरिका और ईरान जंग खत्म करने को राजी हो गए हैं. 28 फरवरी से शुरू हुई जंग का आखिरकार रविवार को अंत हुआ. इस पीस डील को लेकर संशय बरकरार था. क्योंकि कई बार ऐसी बात सामने आ चुकी थी कि डील आखिरी चरण तक पहुंचा. लेकिन बात नहीं बन सकी. रविवार को भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा था. हालांकि, अब पूरा मामला सामने आ गया है कि ईरान ने अमेरिका के साथ हुई बड़ी डील को जानबूझकर आधी रात के बाद फाइनल क्यों किया.
अमेरिकी समाचार पत्र न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि ईरान नहीं चाहता था कि यह डील डोनाल्ड ट्रंप के जन्मदिन वाले दिन की हो.
अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता हो रहा था. इसे MoU कहते हैं यानी एक ऐसा कागज जिसपर दोनों देश राजी होते हैं. अब हुआ यह कि 14 जून को ट्रंप का जन्मदिन था. और उसी दिन यह डील होने वाली थी.
ईरानी अधिकारियों ने साफ कह दिया कि यह डील ट्रंप के जन्मदिन पर बिल्कुल नहीं होगी. रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि 'ट्रंप के जन्मदिन पर कभी डील नहीं होनी चाहिए.' तो ईरान रुका रहा. घड़ी की सुइयों का इंतजार किया. और जैसे ही तेहरान में रात के 12 बज गए यानी तारीख बदली, ईरान ने डील पर मुहर लगा दी.
वक्त का चालाकी भरा खेल
अब यहां एक दिलचस्प बात है. तेहरान और वाशिंगटन के बीच साढ़े सात घंटे का फर्क है. मतलब जब तेहरान में रात के 1 बज रहे थे (यानी 15 जून), तो वाशिंगटन में अभी शाम के 5:29 बज रहे थे (यानी अभी भी 14 जून).

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तो ट्रंप ने अमेरिका में शाम को ऐलान किया कि डील 14 जून को हुई. लेकिन ईरान ने कहा कि हमारे यहां तो यह 15 जून को हुई. दोनों सच थे. बस देखने का नजरिया अलग था.
यह सब क्यों किया?
यह कदम सिर्फ एक बड़े काम की वजह से उठाया गया. ईरान नहीं चाहता था कि इतिहास में यह लिखा जाए कि अमेरिका के साथ बड़ी डील ट्रंप के जन्मदिन पर हुई थी. यह बात ईरान को चुभती. उन्हें लगा कि इससे ऐसा लगेगा जैसे यह डील ट्रंप को 'तोहफा' थी.
रिपोर्ट कहती है कि यह देरी सिर्फ दिखावे के लिए थी. इससे डील की जो भी शर्तें थीं, उनमें कोई बदलाव नहीं आया. लेकिन तारीख जरूर बदल गई.