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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका, कोर्ट ने वोटिंग से जुड़े चुनावी आदेश पर लगाई रोक

अमेरिकी अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुनावी आदेश के बड़े हिस्से पर स्थायी रोक लगा दी है. इस आदेश में वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए नागरिकता का दस्तावेजी सबूत मांगने और डाक मतपत्रों को लेकर सख्त नियम शामिल थे. अदालत ने कहा कि चुनावों को नियंत्रित करने का अधिकार राष्ट्रपति नहीं, बल्कि राज्यों और कांग्रेस के पास है.

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बोस्टन की अदालत ने राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर लगाई रोक. (File Photo)
बोस्टन की अदालत ने राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर लगाई रोक. (File Photo)

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चुनावी नियम बदलने की कोशिशों पर बड़ा झटका लगा है. बोस्टन की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन के उस चुनावी आदेश के बड़े हिस्से पर स्थायी रोक लगा दी है, जिसमें वोटर रजिस्ट्रेशन के समय नागरिकता का दस्तावेजी सबूत दिखाना अनिवार्य करने जैसी शर्तें शामिल थीं. अदालत ने साफ कहा कि चुनावों को कैसे चलाया जाएगा, इसका अधिकार राष्ट्रपति के पास नहीं, बल्कि राज्यों और कांग्रेस के पास है. यही वजह है कि ट्रंप के आदेश को संविधान के खिलाफ माना गया.

एजेंसी के मुताबिक, बोस्टन की US डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की न्यायाधीश डेनिस कैस्पर ने यह फैसला सुनाते हुए एक साल पहले लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को अब स्थायी रोक में बदल दिया है. उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि अमेरिकी संविधान राष्ट्रपति को चुनावों पर कोई खास अधिकार नहीं देता. प्रशासन की तरफ से दलील दी गई थी कि यह मामला अभी जल्दबाजी का है क्योंकि नियम पूरी तरह लागू नहीं हुए थे, लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया.

संविधान के उल्लंघन का मामला

अदालत ने डेमोक्रेटिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल की तरफ से दायर केस को सही माना. फैसले में कहा गया कि संविधान के मुताबिक चुनाव के नियम तय करने की पूरी ताकत राज्यों के साथ वहां की संसद के पास है. ऐसे में ट्रंप की तरफ से थोपी जा रही शर्तें सीधे तौर पर शक्तियों के बंटवारे के नियम का उल्लंघन करती हैं, जिसे किसी भी हाल में मंजूर नहीं किया जा सकता.

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अगर यह आदेश लागू हो जाता, तो वोटरों को रजिस्ट्रेशन के समय नागरिकता का सबूत देना पड़ता. इसके अलावा चुनाव के दिन के बाद पहुंचने वाले डाक मतपत्रों की गिनती नहीं की जाती, भले ही उन पर चुनाव वाले दिन की ही मुहर क्यों न लगी हो. राष्ट्रपति ट्रंप की योजना इन नियमों को न मानने वाले राज्यों की केंद्रीय मदद को रोकने की भी थी, जिस पर अब कोर्ट ने पूरी तरह पानी फेर दिया है.
 

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