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'इजरायल से बेहतर सीरिया लड़ सकता है...', ट्रंप ने फिर निकाली नेतन्याहू पर भड़ास

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई पर नाराजगी जताई है. जी-7 समिट के दौरान उन्होंने कहा कि हिज्बुल्लाह से निपटने में सीरिया बेहतर भूमिका निभा सकता है. ट्रंप ने यह भी कहा कि नेतन्याहू की रणनीति से ईरान के साथ शांति वार्ता पटरी से उतर सकती थी.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कतर के अमीर से हाथ मिलाते हुए. (File Photo)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कतर के अमीर से हाथ मिलाते हुए. (File Photo)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की रणनीति पर नाराजगी जताई है. ट्रंप ने साफ कहा कि हिज्बुल्लाह से निपटने में इजरायल से बेहतर काम सीरिया कर सकता है. उनका मानना है कि लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने ईरान के साथ चल रही शांति वार्ता को लगभग पटरी से उतार दिया था. ट्रंप का यह बयान जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान कतर के अमीर से मुलाकात में सामने आया, जिसने पश्चिम एशिया की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है.

डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि इजरायल हिज्बुल्लाह के खिलाफ अभियान तो चला रहा है, लेकिन इसमें आम लोगों की जान भी जा रही है. ट्रंप ने तंज भरे अंदाज में कहा, 'इजरायल सबको मारे बिना यह काम नहीं कर सकता, इसलिए सीरिया को यह काम करना चाहिए'.

अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान इसलिए भी बहुत अहम माना जा रहा है, क्योंकि सीरिया लंबे समय से इजरायल का कट्टर विरोधी देश रहा है.ऐसे में ट्रंप का यह कहना कि सीरिया बेहतर तरीके से हिज्बुल्लाह से लड़ सकता है, इजरायल की रणनीति पर उनकी सीधी नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है.

ईरान से शांति वार्ता का भी किया जिक्र

ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि नेतन्याहू सरकार के इस कड़े रुख की वजह से ही ईरान के साथ चल रही शांति बातचीत प्रभावित हुई. उनके मुताबिक, इस अभियान ने उस पूरी प्रक्रिया को करीब-करीब तबाह कर दिया था, जिसके जरिए क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिशें की जा रही थीं. उन्होंने बताया कि रविवार को बेरूत पर हुए हमले को लेकर भी उन्होंने इजरायल के सामने अपनी कड़ी आपत्ति जताई थी. ट्रंप ने कहा कि उन्हें वह हमला बिल्कुल भी पसंद नहीं आया था.

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'अमेरिका के बिना इजरायल नहीं': ट्रंप

बातचीत के दौरान ट्रंप ने इजरायल को उसकी सीमाएं याद दिलाते हुए कहा कि अमेरिका के समर्थन के बिना उसकी स्थिति बेहद कमजोर हो सकती थी. उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा, 'अमेरिका के बिना आज इजरायल का कोई वजूद ही नहीं होता'.

इस दौरान ट्रंप ने लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई पर खुलकर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि इजरायल लंबे समय से हिज्बुल्लाह के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन इसमें बड़ी संख्या में आम लोग भी मारे जा रहे हैं. ट्रंप ने कहा कि किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए हर बार पूरी अपार्टमेंट बिल्डिंग गिराना सही नहीं है, क्योंकि वहां रहने वाले सभी लोग हिज्बुल्लाह से जुड़े नहीं होते. बता दें कि लेबनान की राजधानी बेरूत में इजरायल के ताजा हमले में 3 लोगों की मौत हुई है, जबकि 6 अन्य घायल हुए हैं.

हालांकि, इजरायल पर सख्त टिप्पणी के बावजूद ट्रंप ने नेतन्याहू के साथ रिश्तों में खटास की खबरों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि इजरायली प्रधानमंत्री के साथ उनके बहुत अच्छे रिश्ते हैं.

ट्रंप का यह सख्त रुख ऐसे समय सामने आया है, जब एक दिन पहले ही अमेरिका और ईरान ने तनाव कम करने के लिए शांति समझौते के एक फ्रेमवर्क का ऐलान किया है. इस प्रस्तावित समझौते में हॉर्मुज को फिर से खोलने और ईरान पर अमेरिकी पाबंदियों में राहत जैसे कदम शामिल हैं. इसे अंतिम रूप देने के लिए शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में एक आधिकारिक समझौता (MoU) साइन होने की उम्मीद है.

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