
अमेरिका के न्यूयॉर्क स्टेट में अटॉर्नी जनरल पद के चुनाव में भारतीय मूल की सरिता कोमातिरेड्डी रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवार हैं. वह डेमोक्रेटिक पार्टी की मौजूदा अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 14 अगस्त 2026 को सरिथा का समर्थन किया था.
सरिता अपने चुनाव प्रचार में सार्वजनिक सुरक्षा, अपराध, दुकानों में चोरी, धोखाधड़ी और नफरत से जुड़े अपराधों पर कार्रवाई को प्रमुख मुद्दा बना रही हैं. आजतक से बातचीत में उन्होंने अपने पारिवारिक जीवन, कानून प्रवर्तन में काम करने के अनुभव और अटॉर्नी जनरल के पद को लेकर अपनी प्राथमिकताओं के बारे में बात की.
ब्रुकलिन में जन्म, परिवार की जड़ें तेलंगाना से जुड़ी
सरिता का जन्म न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन में हुआ था. उनके माता-पिता भारत के तेलंगाना से अमेरिका गए थे. उनकी मां हैदराबाद से हैं, जबकि उनके पिता करीमनगर जिले के एक गांव से आते हैं.
सरिता ने बताया कि कि उनके माता-पिता ने बेहतर मौकों की तलाश में अमेरिका आने के लिए काफी त्याग किया. वह अपने बच्चों के साथ अब भी अपने पिता के गांव जाती हैं. सरिता ने हार्वर्ड कॉलेज और हार्वर्ड लॉ स्कूल से पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने अमेरिका में संघीय अभियोजक के तौर पर काम किया.

सरिता ने करीब 12 साल तक संघीय अभियोजक के रूप में काम किया. उन्होंने आतंकवाद, ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी संभाली. उनके काम में अल-कायदा और ISIS से जुड़े लोगों के खिलाफ मामले भी शामिल रहे.
बाद में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों की तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में काम किया. उन्होंने फेंटानिल की तस्करी और सिनालोआ कार्टेल से जुड़े मामलों में अपने अनुभव का भी जिक्र किया. वह 2023 से 2024 तक अमेरिकी ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) में चीफ ऑफ स्टाफ रहीं. अब वह इसी अनुभव को अटॉर्नी जनरल पद के लिए अपनी प्रमुख योग्यता के तौर पर पेश कर रही हैं.
सार्वजनिक सुरक्षा को बनाया चुनाव का मुख्य मुद्दा
सरिता का कहना है कि न्यूयॉर्क में लोगों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. उन्होंने अपराध, दुकानों में चोरी, बेघर लोगों की समस्या और सरकारी फायदा से जुड़ी धोखाधड़ी को लेकर मौजूदा प्रशासन की आलोचना की. उन्होंने छोटे कारोबारियों और स्थानीय दुकानों का मुद्दा भी उठाया. उनका कहना है कि, कई दुकानों को संगठित समूहों की ओर से चोरी का सामना करना पड़ता है. उन्होंने नफरत से जुड़े अपराधों पर भी कार्रवाई की जरूरत बताई.
सरिता ने लेटिटिया जेम्स पर आरोप लगाया कि वह राष्ट्रीय राजनीति पर अधिक ध्यान देती हैं.
'हिंसा होने से पहले उसे रोकना जरूरी'
सरिता ने बातचीक के दौरान क्वींस की एक पंजाबी मां से बातचीत का जिक्र भी किया. उन्होंने बताया कि, उस परिवार को हिंसा की धमकियां मिली थीं. सरिता ने कहा कि वह चाहती हैं कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां हिंसा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय उसे पहले रोकने की कोशिश करें. उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क के सभी लोगों को सुरक्षित महसूस करना चाहिए. अटॉर्नी जनरल के कार्यालय को रोजमर्रा के कानूनी और सुरक्षा से जुड़े काम पर ध्यान देना चाहिए.
सरिता को रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन हासिल है और ट्रंप भी उनके पक्ष में समर्थन जता चुके हैं. इसके बावजूद उन्होंने कहा कि अटॉर्नी जनरल का पद स्वतंत्र रूप से काम करने वाला पद है. उनकी जवाबदेही मतदाताओं के प्रति होगी.
न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी के साथ संभावित कामकाजी संबंधों को लेकर पूछे जाने पर सरिता ने कहा कि वह साझा मुद्दों पर किसी के साथ भी काम करने को तैयार हैं. हालांकि, जहां मतभेद होंगे, वहां वह अटॉर्नी जनरल के अधिकारों का इस्तेमाल करेंगी.
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चुनाव से पहले सर्वे में क्या है स्थिति?
न्यूयॉर्क में आम चुनाव 3 नवंबर 2026 को होना है. 28 अक्टूबर को जारी सिएना रिसर्च इंस्टीट्यूट के सर्वे में लेटिटिया जेम्स को 54% और सरिता को 39% संभावित मतदाताओं का समर्थन मिला. सितंबर के सर्वे में जेम्स 52% और सरिथा 39% पर थीं. यानी नए सर्वे में जेम्स की बढ़त बढ़ी है.