सऊदी अरब और हूती के बीच टेंशन से पाकिस्तान के हाथ पैर कांप रहे हैं. क्योंकि पाकिस्तान को लग रहा है कि अगर सऊदी अरब और हूती लड़ाकों में जंग बढ़ती है तो इस लड़ाई में कूदना उसकी मजबूरी हो जाएगी. अब पाकिस्तान ईरान को धमकी दे रहा है और कह रहा है कि सऊदी अरब पर हमला पाकिस्तान पर अटैक माना जाएगा और ये पाकिस्तान की रेड लाइन होगी. यानी इसके बाद पाकिस्तान भी सऊदी की तरफ से युद्ध करेगा. ध्यान दीजिए ये वही पाकिस्तान है जो कुछ महीने पहले ईरान और पाकिस्तान की लड़ाई में समझौता कराने के लिए पंच बना हुआ था.
पाकिस्तान ने पिछले साल सऊदी अरब के साथ आपसी रक्षा समझौता किया है. हजारों पाकिस्तानी सैनिकों के साथ-साथ लड़ाकू विमानों का एक स्क्वाड्रन भी वहां तैनात किया गया है. सऊदी अरब के यमन से लगने वाले बॉर्डर पर पाकिस्तान के सैनिक तैनात हैं, अगर हूती विद्रोही सऊदी पर हमला करते हैं तो इसकी चपेट में पाकिस्तानी सैनिक आएंगे.
हूती विद्रोही ईरान से मिले कमांड पर ही चलते हैं. इसलिए अगर हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी पर ताजा हमले हुए तो इस लड़ाई में सऊदी की तरफ से पाकिस्तान को भी कूदना पड़ेगा.
पाकिस्तान ने इस साल की शुरुआत में सऊदी अरब पर ईरान के हमलों पर नाराज़गी जताई थी, लेकिन क्षेत्रीय विश्लेषकों और अधिकारियों का कहना है कि इस हफ़्ते हुए हमलों ने ईरान के प्रति पाकिस्तान की नाराज़गी को और बढ़ा दिया है, क्योंकि इनसे सऊदी-हूती संघर्ष के नए सिरे से शुरू होने की आशंका पैदा हो गई है.
यह भी पढ़ें: बाब अल मंदेब के मुहाने पर मिसाइल और ड्रोन तैनात, हूतियों को ईरान से अटैक ऑर्डर का इंजतार!
हूती विद्रोहियों ने सोमवार को सऊदी अरब पर मिसाइलें दागीं. उन्होंने आरोप लगाया था कि सऊदी अरब ने उनके नियंत्रण वाले एक हवाई अड्डे पर बमबारी की थी. सीमा पार से हुई इस गोलाबारी ने चार साल से चले आ रहे संघर्ष-विराम को तोड़ दिया, लेकिन अभी तक यह मामला एक ही घटना तक सीमित रहा है.
एक पाकिस्तानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया, "हमारे शीर्ष नागरिक और सैन्य नेताओं ने ईरान को सर्वोच्च स्तर पर यह संदेश दिया है कि सऊदी अरब पर हमले का मतलब पाकिस्तान पर हमला है. यह हमारी 'रेड लाइन' है."
पाकिस्तानी सुरक्षा विश्लेषक मुहम्मद आमिर राणा ने कहा, "पाकिस्तान को उम्मीद नहीं थी कि तनाव इतनी अचानक बढ़ जाएगा."
पाकिस्तान की निराशा की वजह यह बढ़ती चिंता है कि अगर हूती सऊदी पर हमले बढ़ाता है तो उसे इस जंग में आना पड़ेगा. दो पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया कि यमन के साथ सऊदी सीमा के पास पाकिस्तानी सैनिक तैनात हैं, जिससे उनके सीधे तौर पर इस संघर्ष की चपेट में आने का खतरा बढ़ गया है.
इस्लामाबाद में यह चिंता भी है कि हूती गुट की वजह से बढ़ने वाला तनाव लाल सागर में शिपिंग को बाधित कर सकता है. ईरान ने अपने प्रॉक्सी हूती को लाल सागर बंद करने को कह दिया है. अगर लाल सागर बंद होता है तो इससे सऊदी हितों को ऐसे नुकसान पहुंच सकता है. ऐसी स्थिति में अगर सऊदी प्रतिक्रिया देता है तो हूती भी जवाब देगा. इसके बाद पाकिस्तान को अपने आपसी रक्षा समझौते की शर्तों के तहत सैन्य हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.
पाकिस्तान के रिटायर्ड जनरल गुलाम मुस्तफ़ा ने कहा कि फिलहाल "पाकिस्तान के शीर्ष नेता सभी पक्षों को मनाने की कोशिश कर रहे हैं." लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि "अगर हूती गुट सऊदी अरब में अपने हमलों का दायरा बढ़ाता है" तो स्थिति बदल सकती है.
मध्यस्थता की जानकारी रखने वाले एक अन्य पाकिस्तानी सूत्र ने कहा, "युद्ध का खत्म होना सभी के हित में है. लेकिन अगर सऊदी अरब हमें बुलाता है, तो हम उनके साथ खड़े होंगे और इसमें कोई शक नहीं है."
पाकिस्तान सरकार के दो अधिकारियों ने दावा किया है कि ईरान के नेतृत्व के भीतर फूट पड़ गई है. पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा कि ईरान के राजनीतिक नेताओं जिनमें राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गलिबाफ शामिल हैं. इनके विचार और लक्ष्य 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) से काफी अलग होते जा रहे हैं.
पाकिस्तान के रक्षा विश्लेषक मुहम्मद अली ने कहा, "ऐसा लगता है कि ईरान में फैसले लेने की प्रक्रिया पर सेना का दबदबा है."