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अमरनाथ यात्रा पर आतंकी साजिश नाकाम! 'ऑपरेशन शेरूवाली' में लश्कर कमांडर ढेर, 55 हाई-एल्टीट्यूड बेस से घेराबंदी

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने अमरनाथ यात्रा को सुरक्षित और आतंकवाद मुक्त बनाने के लिए जम्मू-कश्मीर में अब तक का सबसे व्यापक अभियान शुरू किया है. इस अभियान में लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर जाकिर अहमद गनी को मार गिराया गया है.

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अमरनाथ यात्रा के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा (Photo: ITG)
अमरनाथ यात्रा के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा (Photo: ITG)

अमरनाथ यात्रा को सुरक्षित और आतंकवाद मुक्त बनाए रखने के लिए भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर में अब तक का सबसे व्यापक सुरक्षा अभियान छेड़ दिया है. इस अभियान के तहत सुरक्षाबलों ने एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करते हुए पिछले सप्ताह लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के शीर्ष कमांडर जाकिर अहमद गनी को मार गिराया है. 

सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों मुताबिक यह आतंकी अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने की साजिश में शामिल था और उसका नाम पहलगाम आतंकी हमले से भी जुड़कर सामने आया है. इस सफलता के बाद पूरे जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ व्यापक स्तर पर 'ऑपरेशन शेरूवाली' शुरू किया गया है. सेना, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त रूप से लगातार सर्च एंड डेस्ट्रॉय ऑपरेशन चला रही हैं ताकि यात्रा के दौरान किसी भी आतंकी संगठन को हमला करने का मौका न मिल सके.

खुफिया सूचना के बाद शुरू हुआ ऑपरेशन

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, पिछले सप्ताह मिली एक सटीक खुफिया सूचना के आधार पर शोपियां जिले में संयुक्त अभियान चलाया गया. ऑपरेशन के दौरान लश्कर-ए-तैयबा का वरिष्ठ कमांडर जाकिर अहमद गनी मारा गया. हालांकि उसका साथी लतीफ भट्ट मौके से भाग निकलने में सफल रहा, जिसकी तलाश जारी है. सूत्रों का कहना है कि जाकिर गनी लंबे समय से दक्षिण कश्मीर में सक्रिय था और कई आतंकी गतिविधियों का संचालन कर रहा था. जांच एजेंसियां उसके पहल्गाम आतंकी हमले से संभावित संबंधों की भी जांच कर रही हैं.

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3 जुलाई से शुरू हुई यात्रा, 28 अगस्त तक रहेगा हाई अलर्ट

इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी. हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए कश्मीर पहुंचते हैं. यात्रा के दौरान आतंकवादी संगठनों की ओर से हमले की आशंका हमेशा बनी रहती है. इसी कारण इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक मजबूत की गई है. गृह मंत्रालय, सेना, सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और जम्मू-कश्मीर पुलिस के बीच लगातार समन्वय स्थापित किया गया है. यात्रा मार्ग, बेस कैंप, संवेदनशील इलाकों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है. जिसमें करीब 670 से अधिक अर्धसैनिक बलों की कंपनियां तैनात की गई है.

जम्मू-कश्मीर में 50 विदेशी आतंकियों के होने के आशंका 

सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल जम्मू-कश्मीर में लगभग 50 विदेशी आतंकियों की मौजूदगी हो सकती है इस तरीके के इनपुट है. इनमें अधिकांश आतंकवादी पाकिस्तान समर्थित संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े बताए जा रहे हैं. विदेशी आतंकियों की घुसपैठ रोकने और उनके मूवमेंट पर नजर रखने के लिए सेना और केंद्रीय बल लगातार नियंत्रण रेखा (LoC) और ऊंचाई वाले इलाकों में विशेष अभियान चला रहे हैं.

10 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर बनाए गए 55 अस्थायी ऑपरेटिंग बेस (TOB)

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इस बार सुरक्षा रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 55 टेम्पररी ऑपरेटिंग बेस (TOBs) हैं. ये सभी बेस 10 हजार फीट से अधिक ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में बनाए गए हैं.इन बेसों पर सीआरपीएफ, सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान तैनात हैं. इन्हीं बेसों से आतंकियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं. इनका उद्देश्य सीमापार से घुसपैठ करने वाले आतंकियों को शुरुआती चरण में ही रोकना और पहाड़ी इलाकों में छिपे आतंकियों का सफाया करना है.बड़ा उद्देश्य है.

पहलगाम हमले के बाद बदली सुरक्षा रणनीति

सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, टेम्पररी ऑपरेटिंग बेस की रणनीति पहल्गाम आतंकी हमले के बाद तैयार की गई थी. इस रणनीति के तहत पहला बेस जुलाई 2025 में श्रीनगर जिले के फकीर गुजरी इलाके में बनाया गया था. इसके बाद धीरे-धीरे पूरे जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में ऐसे बेस स्थापित किए गए.इन बेसों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि सुरक्षा बल अब लंबे समय तक दुर्गम इलाकों में मौजूद रह सकते हैं और आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों पर लगातार दबाव बनाए रख सकते हैं.

'ढोक' बने आतंकियों के सुरक्षित ठिकाने

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, आतंकवादी अक्सर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बने पारंपरिक मिट्टी और पत्थर के अस्थायी मकानों, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'ढोक' कहा जाता है, में छिपते हैं.गर्मी के मौसम में चरवाहों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ये ढोक आतंकियों के लिए सुरक्षित ठिकाने बन जाते हैं. इसी वजह से सुरक्षा बल अब इन इलाकों में लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं.

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ऑपरेशन 'शेरूवाली' से आतंकियों पर चौतरफा दबाव

अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शुरू किए गए ऑपरेशन शेरूवाली के तहत पूरे जम्मू-कश्मीर में कई संयुक्त अभियान चलाए जा रहे हैं.राजौरी के गंभीर मुगलियां क्षेत्र में आतंकियों की मौजूदगी की खुफिया सूचना मिलने के बाद सेना और अर्धसैनिक बलों ने बड़े स्तर पर कॉम्बिंग ऑपरेशन शुरू किया है.ड्रोन, निगरानी उपकरण, आधुनिक संचार प्रणाली और विशेष पर्वतीय युद्ध प्रशिक्षण प्राप्त जवानों की मदद से आतंकियों की तलाश जारी है.

इस साल अब तक 8 आतंकी ढेर

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 13 जुलाई के बीच जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने 8 आतंकियों को मार गिराया है. इनमें कई विदेशी और हाई-कैटेगरी के आतंकी शामिल हैं.

इसी अवधि में 24 ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को गिरफ्तार किया गया है. ये लोग आतंकियों को रसद, ठिकाना, आर्थिक सहायता और स्थानीय स्तर पर जानकारी उपलब्ध कराते थे.

हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद

सुरक्षा एजेंसियों ने इस दौरान बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक भी बरामद किए हैं. इनमें शामिल हैं—

16 आधुनिक हथियार
492 राउंड गोला-बारूद
34 ग्रेनेड
1 रॉकेट
2 आईईडी
1 अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (UBGL)
UBGL के 3 ग्रेनेड

इन बरामदगियों से स्पष्ट है कि आतंकी संगठन किसी बड़े हमले की तैयारी में थे.

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TRASHI-1 ऑपरेशन भी रहा सफल

सुरक्षा एजेंसियों ने हाल ही में TRASHI-1 अभियान के तहत किश्तवाड़ और उधमपुर के रामनगर क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की. इस अभियान में जैश-ए-मोहम्मद के चार विदेशी आतंकवादी मारे गए, जिनमें संगठन के कैटेगरी A++ के शीर्ष कमांडर भी शामिल थे. इन अभियानों ने आतंकवादी नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है.

बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था

इस बार अमरनाथ यात्रा के लिए सुरक्षा के कई स्तर तैयार किए गए हैं-

यात्रा मार्ग पर लगातार एरिया डोमिनेशन.
ड्रोन और हाई-टेक निगरानी.

रोड ओपनिंग पार्टियों की नियमित तैनाती.
संवेदनशील इलाकों में लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन.

ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 55 अस्थायी ऑपरेटिंग बेस.
सेना, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और खुफिया एजेंसियों के बीच रियल टाइम समन्वय.

आतंकियों के सहयोगी नेटवर्क यानी ओवरग्राउंड वर्कर्स पर लगातार कार्रवाई.

आतंकियों को स्पष्ट संदेश

सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि इस बार रणनीति केवल हमले को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि आतंकियों को उनके ठिकानों तक पहुंचकर खत्म करने पर केंद्रित है. यही कारण है कि ऑपरेशन शेरूवाली, TRASHI-1 और अन्य अभियानों के जरिए लगातार आतंकियों के नेटवर्क पर दबाव बनाया जा रहा है.

अमरनाथ यात्रा भारत की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं में से एक है और इसकी सुरक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता मानी जाती है. लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ कमांडर के मारे जाने, 55 अस्थायी ऑपरेटिंग बेस की स्थापना, विदेशी आतंकियों के खिलाफ तेज अभियान और ऑपरेशन शेरूवाली जैसे कदम यह संकेत देते हैं कि सुरक्षा एजेंसियां इस बार किसी भी आतंकी साजिश को सफल नहीं होने देना चाहतीं.

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लगातार खुफिया निगरानी, संयुक्त अभियान और पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय मौजूदगी के जरिए सुरक्षाबलों ने स्पष्ट कर दिया है कि यात्रा की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा.

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