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इन 3 मुस्लिम देशों के साथ PAK का एक और डिफेंस पैक्ट, मक्का के इतिहास से जुड़ा है नाम

पाकिस्तान ने तीन मुस्लिम देशों के साथ एक और रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किया है. खास बात यह है कि इस समझौते का नाम इस्लाम के इतिहास से जुड़ा है. समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले कतर ने ने कहा कि इससे हर देश की रक्षा विनिर्माण क्षमताओं का लाभ उठाया जा सकेगा.

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दोहा में रक्षा समझौते पर हुआ हस्ताक्षर. (Photo: Video grab/Ministry of defense Qatar)
दोहा में रक्षा समझौते पर हुआ हस्ताक्षर. (Photo: Video grab/Ministry of defense Qatar)

पाकिस्तान ने एक और रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किया है. पाकिस्तान ने इस बार तुर्की, कतर और इंडोनेशिया के साथ रक्षा समझौता किया है. इन चारों देशों का कहना है कि रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने और अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए इस समझौते पर हस्ताक्षर किया गया है. बुधवार को दोहा में इस समझौते पर हस्ताक्षर किया गया. 

इन चारों देशों ने इस समझौते का नाम बद्र पैक्ट रखा है. माना जा रहा है कि यह नाम 'बद्र' के स्थान पर रखा गया है, जो आज के सऊदी अरब में शुरुआती मुसलमानों और मक्का के कबीलों के बीच हुई पहली बड़ी सैन्य लड़ाई की जगह है. 

तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि 'बद्र मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' पर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, तुर्की के रक्षा मंत्री यासर गुलर, कतर के उप प्रधानमंत्री और रक्षा राज्य मंत्री शेख सऊद बिन अब्दुल रहमान, और इंडोनेशिया के उप रक्षा मंत्री यूसुफ जौहरी ने हस्ताक्षर किए.

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने अभी तक 'बद्र समझौते' पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

यह घटनाक्रम अगस्त में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' के कुछ महीनों बाद सामने आया है. उस समझौते के तहत अगर किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे उन सभी देशों पर हमला माना जाएगा. 

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इसी समझौते के तहत पाकिस्तान हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब की मदद कर रहा है. 

कतर के रक्षा मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "संयुक्त सहयोग को मजबूत करने और रणनीतिक साझेदारी विकसित करने की प्रतिबद्धता के तहत, कतर की राजधानी में 'बद्र' बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए."

मंत्रालय ने बताया कि इस समझौते का उद्देश्य रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना, चारों देशों की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना, और तकनीकी रक्षा प्रशिक्षण तथा अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्रों में मिलकर काम करना है. इससे आधुनिक रक्षा प्रणालियों के विकास के लिए जरूरी समाधान और उद्योग तैयार करने में मदद मिलेगी.

कतर के रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह समझौता इसमें शामिल देशों के लिए काफी आर्थिक महत्व रखता है. इससे हर देश की रक्षा विनिर्माण क्षमताओं का लाभ उठाया जा सकेगा, सहयोग और एकीकरण बढ़ेगा, और मित्र देशों की जरूरतों को पूरा करने के लिए रक्षा उद्योग की क्षमताएं विकसित होंगी.

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है. 

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