अमेरिका और इजरायल के संयुक्त ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और अन्य टॉप कमांडरों की मौत की खबर के बाद पाकिस्तान के कराची शहर में भारी तनाव पैदा हो गया. सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी कांसुलेट के बाहर जमा हो गए और उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. भारी विरोध के बीच यहां अब तक 8 लोगों की मौत और 30 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है.
स्थानीय मीडिया के रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी कांसुलेट के मुख्य गेट को तोड़ने की कोशिश की और परिसर में घुसने के प्रयास किए. प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, टायर जलाए और आगजनी की घटनाएं हुईं. इस दौरान “अमेरिका मुर्दाबाद”, “इजरायल मुर्दाबाद” और “ईरान जिंदाबाद” जैसे नारे पूरे इलाके में गुंजायमान रहे.
प्रदर्शन अचानक भड़क उठने से सुरक्षा बलों के लिए स्थिति को नियंत्रण में रखना मुश्किल हो गया. भीड़ की संख्या लगातार बढ़ती रही. कराची के इस विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि मिडिल ईस्ट में हो रही घटनाओं का असर अन्य देशों की जनता पर भी गहरा पड़ता है.
कराची से जो वीडियो सामने आए हैं, उसमें साफ देखा जा सकता है कि बड़े संख्या में लोग यूएस कांसुलेट के बाहर हाथों में डंडे-लाठी लेकर हैं. लोग डंडे-लाठी से कांसुलेट के खिड़की और गेट तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.
वीडियो में यह भी देखा गया कि लोगों ने अमेरिकी कांसुलेट में आग लगा दी है. आग की तेज लपटें आसमान की ओर उठती हुई दिखाई दे रही हैं, और धुएं के गुबार समूचे क्षेत्र में फैले हुए हैं.
इन सब के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से ईरान को नई धमकी दी है. ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान कुछ भी करता है तो वह ऐसा सबक सिखाएंगे कि जिसे तेहरान देखते रह जाएगा. बता दें कि कराची में विरोध के पीछे सिर्फ अंतरराष्ट्रीय घटना पर प्रतिक्रिया नहीं है. बल्कि क्षेत्रीय राजनीतिक और धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है.