पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में हिंदू समुदाय ने अपने संवैधानिक अधिकारों को लेकर नई मुहिम शुरू करने का फैसला किया है. ऑल बाल्मिक हिंदू कम्युनिटी खैबर पख्तूनख्वा (ABHCKP) ने पूरे प्रांत में अभियान चलाने का ऐलान किया है. संगठन का कहना है कि संविधान में अल्पसंख्यकों को मिले अधिकार पूरी तरह लागू किए जाएं. साथ ही, UN एजेंसियों और दुनिया की मानवाधिकार संस्थाओं से भी मदद की अपील की गई है.
कोहाट जिले में हुई संगठन की बैठक में अल्पसंख्यक अधिकारों के प्रमुख कार्यकर्ता हारून सरब दयाल को शनिवार को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया. न्यूज एजेंसी के मुताबिक, उनका कहना है कि हिंदू समुदाय को अब भी कानूनी सुरक्षा, शिक्षा, सरकारी दस्तावेज और बराबरी के अवसर जैसे कई मामलों में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में इन समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार को प्रभावी कदम उठाने चाहिए.
पूरे प्रांत में चलेगा अभियान
बैठक में खैबर पख्तूनख्वा के अलग-अलग इलाकों से समुदाय के प्रतिनिधि, धार्मिक गुरु, वकील, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षक, कारोबारी और युवा शामिल हुए. इसमें समुदाय के सामने मौजूद चुनौतियों और आगे की योजना पर चर्चा हुई.
रिपोर्ट के मुताबिक, हरून सरब दयाल ने बताया कि अब पूरे प्रांत में लोगों तक पहुंचने के लिए अभियान चलाया जाएगा. इसके तहत युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर रहेगा. जन्म प्रमाण पत्र, विवाह पंजीकरण, राष्ट्रीय पहचान पत्र और पैतृक संपत्ति से जुड़े अधिकारों तक आसान पहुंच दिलाने की कोशिश की जाएगी. सरकार के सामने नीतिगत सुझाव भी रखे जाएंगे. साथ ही शिक्षा और मीडिया के जरिए अलग-अलग धर्मों के बीच बेहतर समझ बढ़ाने पर भी काम होगा.
सरकार और UN से क्या मांग की गई?
संगठन ने राज्य सरकार से मांग की है कि पाकिस्तान के संविधान में अल्पसंख्यकों को जो भी अधिकार दिए गए हैं, उन्हें पूरी तरह लागू किया जाए. इसके लिए संविधान के अलग-अलग अनुच्छेदों में दी गई गारंटियों का पालन कराने की बात कही गई है. साथ ही, सरकार और संसद से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा वाले कानूनों को जल्द से जल्द पास करने की अपील की गई है. इतना ही नहीं, हिंदू समाज ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की एजेंसियों, मानवाधिकार संगठनों, विदेशी दूतावासों और सामाजिक संस्थाओं से भी मदद की गुहार लगाई है, ताकि कमजोर अल्पसंख्यक समुदायों को सुरक्षा और बराबरी का हक मिल सके.
2023 की जनगणना के अनुसार खैबर पख्तूनख्वा में हिंदुओं की आबादी करीब 5,090 है. 1947 के बंटवारे के बाद यहां हिंदुओं की संख्या में बड़ी कमी आई थी. आज भी इस समुदाय की छोटी-छोटी बस्तियां पेशावर, कोहाट, बन्नू, डेरा इस्माइल खान और हजारा के कुछ हिस्सों में मौजूद हैं.