अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक रिपोर्ट में कहा है कि यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों पर पाकिस्तान एयर फोर्स के लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया जा रहा है. पाकिस्तानी लड़ाकू विमान हूती विद्रोहियों पर बम बरसा रहे हैं. पाकिस्तान ने मक्का पैक्ट को एक्टिवेट करते हुए सऊदी अरब को सैन्य मदद देना शुरू कर दिया है. लेकिन इसके साथ ही पाकिस्तान ईरान के खिलाफ भी खुलकर सामने आ गया है. क्योंकि हूती विद्रोहियों की असली ताकत ईरान ही है.
न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) की रिपोर्ट के अनुमानों के अनुसार, सऊदी अरब में पाकिस्तान के करीब 8,000 सैनिक भी तैनात हैं.
पाकिस्तान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर NYT को बताया कि हूती विद्रोहियों को निशाना बनाकर किए जा रहे हमलों में पाकिस्तान वायु सेना के लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि पाकिस्तानी सेना के जवान पहले से ही सऊदी अरब में मौजूद हैं और वहां "कई क्षमताओं और क्षेत्रों" में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं. हालांकि उन्होंने सैनिकों की संख्या, उनकी तैनाती की जगह और उनकी सटीक भूमिका को सीक्रेट बताया है.
इससे अब साफ हो गया है कि पाकिस्तानी एयर फोर्स सऊदी अरब में मौजूद है और हूती विद्रोहियों को निशाना बना रही है.
तीनों देशों ने अगस्त में NATO जैसी 'मक्का संयुक्त रक्षा संधि' पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे बाद में 'मक्का रक्षा गठबंधन' का नाम दिया गया. इस समझौते के तहत, तीनों देशों में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा, जिससे आपसी रक्षा व्यवस्था के सिद्धांत के समान एक सामूहिक-सुरक्षा ढांचा तैयार होगा.
NYT के अनुसार US के डिफेंस एनालिस्ट कर्नल डेविड ओ स्मिथ का अनुमान है कि अभी सऊदी अरब में लगभग 8,000 पाकिस्तानी सैनिक तैनात हैं. उन्होंने कहा कि इस फ़ोर्स में पाकिस्तान एयर फ़ोर्स और आर्मी एयर डिफेंस के जवान शामिल हैं और इनका इस्तेमाल ज़रूरी ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा में मदद के लिए किया जा सकता है.
स्मिथ ने कहा कि इस बात की संभावना कम है कि पाकिस्तानी सैनिक हूतियों के खिलाफ़ सीधे ज़मीनी लड़ाई में हिस्सा लेंगे, क्योंकि इस्लामाबाद को ईरान के साथ अपने रिश्ते बनाए रखने हैं. लेकिन हूती विद्रोहियों पर पाकिस्तानी हमले के बाद ईरान की क्या प्रतिक्रिया होगी, ये देखने वाली बात होगी.
NYT से नाम न बताने की शर्त पर बात करने वाले एक दूसरे पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि इस्लामाबाद की भूमिका यमन में ज़मीनी फ़ौज भेजने के बजाय एयर सपोर्ट के ज़रिए हूतियों के मिसाइल और ड्रोन के खतरे का मुकाबला करने पर केंद्रित रहने की उम्मीद है.
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब सऊदी अरब को मिसाइलों और ड्रोनों के ज़रिए हूतियों के नए हमलों का सामना करना पड़ रहा है. हूती हमलों ने सऊदी शहरों, हवाई अड्डों और अन्य ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया है.
गुरुवार को हूतियों ने रियाद में किंग खालिद एयरपोर्ट को निशाना बनाया. इसके बाद इस एयरपोर्ट को बंद करना पड़ा है.
पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों के इस्तेमाल की खबरों से मध्य पूर्व के संघर्ष में इस्लामाबाद की भूमिका में एक बड़ा बदलाव आ सकता है.
पाकिस्तान ने हमेशा सऊदी अरब के साथ करीबी सैन्य और आर्थिक संबंध बनाए रखने की कोशिश की है, लेकिन यमन युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने से बचता रहा है; इसकी एक वजह पड़ोसी देश ईरान के साथ उसके संबंध भी हैं.
2015 में पाकिस्तान की संसद ने सऊदी अरब के नेतृत्व में यमन में हो रही सैन्य कार्रवाई से देश को दूर रखने के पक्ष में वोट दिया था.
लगभग एक दशक बाद मक्का समझौते के लागू होने और सऊदी अरब में पाकिस्तानी सेना की तैनाती से इस्लामाबाद इस संघर्ष के और करीब आ रहा है.
भारत ने सऊदी में नागरिकों को आगाह किया
सऊदी अरब के घटनाक्रम को देखते हुए एअर इंडिया ने 10 अक्तूबर तक रियाद के अपने फ्लाइट को कैंसिल कर दिया है. इस बीच भारत ने सऊदी अरब में रहने वाले सभी भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे सतर्क और सावधान रहें, और घर के अंदर ही रहें और स्थानीय अधिकारियों द्वारा आधिकारिक माध्यमों से जारी निर्देशों का पालन करें.
भारत ने अपने नागरिकों को यह भी सलाह दी है कि वे चल रही घटनाओं से जुड़े किसी भी वीडियो या समाचार को न फैलाएं और न ही दोबारा पोस्ट करें.