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हमलों के साए में सफर, जानिए कितना खतरनाक हुआ समुद्री मार्ग और क्यों निशाने पर हैं भारतीय

ईरान से जुड़े संघर्ष शुरू होने के बाद से व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में 17 भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है. बढ़ते समुद्री तनाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए 'सीफेयरर फर्स्ट' पहल शुरू की है.

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दुनियाभर में चल रहे जंग में निशाना बन रहे हैं भारतीय. ( file Photo- Reuters)
दुनियाभर में चल रहे जंग में निशाना बन रहे हैं भारतीय. ( file Photo- Reuters)

यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हो रहे जहाज एमवी गोल्डन लियो पर हुए रूसी मिसाइल हमले में चार भारतीय नाविकों की मौत ने एक बार फिर दुनिया भर में बढ़ते समुद्री कॉन्फ्लिक्ट के बीच भारतीय मर्चेंट नेवी कर्मियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.यह घटना सिर्फ एक मामला नहीं, बल्कि उस लगातार बढ़ते खतरे की ताजा तस्वीर है, जिसका सामना भारतीय नाविक पिछले कई महीनों से कर रहे हैं.

पहले इसका खतरा होर्मुज स्ट्रेट और ओमान की खाड़ी तक ही था, लेकिन अब रूस-यूक्रेन युद्ध भी कमर्शियल जहाजों को अपनी चपेट में ले चुका है.ऐसे में भारतीय नाविक उन लड़ाइयों का भी शिकार बन रहे हैं, जिनसे उनका कोई सीधा रिलेशन नहीं है.

इंडिया टुडे की ओपन सोर्स इंटेलिजेंस रिपोर्ट, सरकारी आंकड़ों, विदेश मंत्रालय के बयानों और मीडिया रिपोर्ट्स के एनालिसिस के अनुसार, ईरान से जुड़े कॉन्फ्लिक्ट शुरू होने के बाद से अब तक कमर्शियल जहाजों पर हुए अलग-अलग हमलों में 17 भारतीय नाविकों की जान जा चुकी है.इससे साफ है कि इंटरनेशनल समुद्री मार्ग अब पहले की तुलना में कहीं अधिक अनसेफ हो गए हैं.

Missile Attack Indian Sailors

रिपोर्ट के मुताबिक, ओडेसा में हुआ ताजा हमला इस बात का संकेत है कि भारतीय नाविकों के लिए खतरा अब किसी एक एरिया तक सीमित नहीं रह गया है. दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन का असर सीधे कमर्शियल जहाजों पर पड़ रहा है.कई बार ये जहाज किसी सैनिक अभियान का हिस्सा नहीं होते, फिर भी लड़ाई की चपेट में आ जाते हैं और उन पर काम करने वाले हजारों नाविकों की जान खतरे में पड़ जाती है.

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Missile Attack Indian Sailors

 सीफरर वर्कफोर्स रिपोर्ट 2026, जिसे बाल्टिक एंड इंटरनेशनल मैरीटाइम काउंसिल और इंटरनेशनल चैंबर ऑफ शिपिंग ने जारी किया है, उसके अनुसार भारत में तीन लाख से अधिक नाविक हैं. इनमें करीब 1.41 लाख अधिकारी और 1.7 लाख से ज्यादा कुशल कर्मचारी शामिल हैं. वर्ल्ड समुद्री वर्कफोर्स में भारत की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत से अधिक है.फिलीपींस के बाद भारत दुनिया में मर्चेंट नेवी कर्मियों का दूसरा सबसे बड़ा देश है.यही वजह है कि दुनिया के किसी भी समुद्री लड़ाई का असर बड़ी संख्या में भारतीय परिवारों पर भी पड़ता है.

भारतीय नाविक पर पहला हमला

भारतीय नाविकों की मौत का पहला बड़ा मामला 1 मार्च 2026 को सामने आया.ईरान से जुड़े संघर्ष के शुरुआती दिनों में होर्मुज स्ट्रेट के ईस्ट प्रवेश द्वार के पास खासाब के उत्तर में MT Skylight नामक टैंकर पर मिसाइल हमला हुआ. इस हमले में दो भारतीय नाविकों की मौत हो गई.एक की मौके पर ही मौत हो गई,जबकि दूसरे ने बाद में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.शुरुआत में वह लापता बताया गया था.

Missile Attack Indian Sailors

करीब तीन महीने बाद, 10 जून को पलाऊ के झंडे वाले MT Settebello पर ओमान तट के पास अमेरिकी बलों ने हमला किया.अमेरिका का आरोप था कि यह जहाज ईरानी तेल की खेप ले जा रहा था और उसने अमेरिकी समुद्री प्रतिबंध का उल्लंघन किया था. इस हमले में तीन भारतीय चालक दल के सदस्यों की मौत हुई. उस समय तक यह भारतीय नाविकों से जुड़ी सबसे बड़ी घटना थी.

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सरकार ने उठाया था कदम

इस हमले के बाद भारत और अमेरिका के बीच डिप्लोमेटिक लेवल पर भी तीखा रिस्पांस देखने को मिली.विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि भारत ने अमेरिकी नौसेना की उस कार्रवाई पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की जान गई. उन्होंने कहा कि कमर्शियल जहाजों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई उचित नहीं है.

वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सभी कमर्शियल जहाजों को अमेरिका के नियमों का पालन करना चाहिए. इसके साथ ही यह भी कहा गया कि अमेरिकी समुद्री बैन का उल्लंघन और ईरानी तेल का अवैध ट्रांसपोर्ट किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा.

17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर के बाद कुछ समय के लिए हालात सामान्य होते नजर आए, लेकिन यह राहत ज्यादा दिनों तक नहीं रही.10 जुलाई को MT MKD Vyom पर हमला हुआ, जिसमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई. इसके चार दिन बाद 14 जुलाई को MT Al Bahiyah और MT Mombasa पर होर्मुज स्ट्रेट के पास हमला किया गया. MT Al Bahiyah पर सवार एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि दोनों जहाजों पर मौजूद नौ अन्य भारतीय घायल हो गए. इनमें दो की हालत गंभीर बताई गई.

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दोनो देशों के बीच टकराव बढ़ने के साथ हमले भी जारी रहे. MT Safesea Vishnu पर हुए हमले में दो भारतीय नाविकों की जान चली गई, जबकि बाद में GFS Galaxy पर हुए हमले में एक और भारतीय की मौत हो गई. इसके बाद 19 जुलाई को यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हो रहे MV Golden Leo पर रूसी मिसाइल हमले में चार भारतीय नाविकों की मौत हो गई. यह हाल के महीनों में भारतीय नाविकों के लिए सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक है.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, 1 मार्च से 21 जुलाई के बीच भारतीय झंडे वाले जहाजों, भारत आने वाले जहाजों और भारतीय नाविकों वाले विदेशी व्यापारिक जहाजों सहित कम से कम 19 जहाज किसी न किसी तरह के टकराव का शिकार हुए. इनमें मिसाइल और ड्रोन हमले, गोलेबारी,चेतावनी के तौर पर की गई फायरिंग, हथियारबंद हैरेसमेंटऔर युद्ध से जुड़ी अन्य घटनाएं शामिल हैं. इन घटनाओं ने हजारों भारतीय नाविकों को जोखिम में डाल दिया.

सरकार ने उठाया कदम

लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने भी कई कदम उठाए हैं. मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट्स शिपिंग एंड वाटरवेज ने 'सीफेयरर फर्स्ट' पहल शुरू की है.इसके तहत प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीय नाविकों की देखरेख की जा रही है.प्रभावित परिवारों के लिए  संपर्क अधिकारी नियुक्त किए गए हैं और पर्शियन गल्फ, होर्मुज स्ट्रेट तथा ओमान गल्फ में काम कर रहे भारतीय नाविकों की स्थिति पर नजर रखने के लिए रियल टाइम डैशबोर्ड तैयार किया गया है.

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सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद प्रत्येक भारतीय नाविक का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए, चाहे वह किसी भी देश के झंडे वाले जहाज पर काम कर रहा हो. इसके लिए विदेश मंत्रालय, भारतीय नौसेना और विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों के साथ लगातार कोऑर्डिनेशन किया जा रहा है, ताकि किसी भी इमरजेंसी स्थिति में भारतीय नागरिकों को जल्द सहायता पहुंचाई जा सके.

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