मोरक्को से हजारों लोग बेहतर जिंदगी, नौकरी और यूरोप पहुंचने की उम्मीद में सेउटा पहुंच गए. उन लोगों को उम्मीद थी कि यहां से स्पेन और फिर यूरोप जाने में इससे उन्हें आसानी होगी. लेकिन एकाएक इतनी बड़ी संख्या में प्रवासियों के पहुंचने से हालात बहुत बिगड़ गए. दुखद बात तो ये है कि इस समय करीब 800 बच्चे ऐसे हैं, जो बिना माता-पिता या किसी अभिभावक के सेउटा में फंसे हैं.
इन बच्चों ने जो दर्द सहा है उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है. कुछ के माता-पिता उनके सामने समुद्र में डूब गए तो कई उनसे बिछड़ गए. अब उनके भविष्य पर गहरा खतरा मंडरा रहा है.
स्पेन के कानून के मुताबिक, बिना अभिभावक के आए नाबालिग बच्चों को विशेष संरक्षण दिया जाता है. इन 800 बच्चों के साथ कोई नहीं है. फिलहाल कई बच्चे सरकारी संरक्षण केंद्रों में रह रहे हैं, लेकिन रिपोर्ट्स की मानें तो ये केंद्र भी अब पूरी तरह भर चुके हैं.
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, इतने ज्यादा लोगों के आने से शिविरों में जगह की कमी देखने को मिल रही है. खाने-पीने, स्वच्छ पानी और रहने की व्यवस्था पर भारी दबाव है. हालात इतने बिगड़ गए हैं कि कई लोगों को पहाड़ियों और खुले इलाकों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. हालात को देखते हुए स्पेन ने सीमा पर सुरक्षा भी बढ़ा दी है. कई लोग सीमा पर फंसे हुए हैं.
वहीं, वयस्क प्रवासियों के मामले अलग हैं. वे शरण के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन आवेदन खारिज होने पर उन्हें वापस मोरक्को भेजा जा सकता है. पिछले कुछ दिनों में कई वयस्क या तो खुद लौट गए या स्पेन की पुलिस ने उन्हें वापस भेज दिया. हालांकि, सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि इन 800 बेसहारा बच्चों का भविष्य क्या होगा और उनकी जिम्मेदारी कौन उठाएगा?