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लंदन में गूंजा 'PoK की आजादी' का नारा, पाकिस्तानी हाई कमीशन के बाहर हजारों कश्मीरियों का 'मिलियन मार्च'

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में मानवाधिकार उल्लंघन और नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में यूके में रह रहे हजारों कश्मीरियों ने मार्च निकाला. महमूद कश्मीरी ने कहा कि हम पाकिस्तान के सामने घुटने नहीं टेकेंगे.

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महमूद कश्मीरी ने कहा-हम पाकिस्तान के सामने घुटने नहीं टेकेंगे. (Photo: ANI)
महमूद कश्मीरी ने कहा-हम पाकिस्तान के सामने घुटने नहीं टेकेंगे. (Photo: ANI)

यूके में रह रहे हजारों कश्मीरियों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में कथित मानवाधिकारों के उल्लंघन और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के खिलाफ एक बड़ा विरोध मार्च निकाला है. हजारों लोगों ने 'लंदन कश्मीर मिलियन मार्च' में हिस्सा लिया, उन्होंने पार्लियामेंट स्क्वायर से पाकिस्तानी हाई कमीशन तक मार्च किया. 

मार्च के दौरान, प्रदर्शनकारियों ने आजादी के समर्थन में नारे लगाए और 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) के प्रमुख शौकत नवाज मीर और अन्य राजनीतिक नेताओं की गिरफ्तारी की निंदा की.

महमूद कश्मीरी: 'हम पाकिस्तान के सामने घुटने नहीं टेकेंगे'

जम्मू-कश्मीर नेशनल इंडिपेंडेंस अलायंस (JKNIA) के चेयरमैन महमूद कश्मीरी ने कहा कि आज हजारों लोग पाकिस्तानी हाई कमीशन के बाहर जमा हुए हैं और दुनिया भर में कश्मीरी पाकिस्तानी फोर्स के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. हम ज़ुल्म और नाइंसाफी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. हम किसी भी हालत में पाकिस्तान के सामने घुटने नहीं टेकेंगे और इस ज़ुल्म और अत्याचार के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखेंगे.

बता दें, पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सरकार विरोधी जनआंदोलन को दबाने के लिए इस्लामाबाद पर लगातार सख्त और अमानवीय कदम उठाने के आरोप लग रहे हैं.

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इस बीच, जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख सदस्यों में शामिल सरदार अमन खान ने एक वीडियो संदेश जारी कर विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों से शामिल होने की अपील की. उन्होंने भारत के नागरिकों, खासकर श्रीनगर के लोगों से भी आंदोलन के समर्थन की अपील की.

सरदार अमन खान ने कहा, 'मैं कश्मीर घाटी के लोगों खासकर श्रीनगर के लोगों से बात कर रहा हूं. हम राजौरी, जम्मू, लद्दाख, करगिल, गिलगित-बाल्टिस्तान और पूरे राज्य के लोगों से बात कर रहे हैं. कश्मीर (PoJK) को दबाव और दमन का सामना करते हुए करीब एक महीना हो गया है. अपने बुनियादी अधिकारों की मांग करने पर लोगों के साथ जो ज़ुल्म, अन्याय, नरसंहार और सैन्य आक्रामकता हो रही है, वह चरम पर पहुंच गई है.'

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