scorecardresearch
 

अमेरिका से शांति वार्ता पर लगा ब्रेक, इजरायल का एक कदम और भड़क गया ईरान

एक तरफ इजरायल कह रहा है कि वह हिज्बुल्लाह को कमजोर करने के लिए लेबनान में आगे बढ़ रहा है. दूसरी तरफ यही कदम ईरान के साथ चल रही शांति वार्ता को बर्बाद कर रहा है. लेबनान की जनता पिस रही है. और अब ईरान ने ऐसी धमकी दे दी है जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है. बातचीत रुकी है, लड़ाई जारी है और रास्ता अभी साफ नहीं दिख रहा.

Advertisement
X
हिज्बुल्लाह, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ा टकराव (File Photo: Reuters)
हिज्बुल्लाह, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ा टकराव (File Photo: Reuters)

इजरायल और ईरान के बीच जंग रुकने की बातचीत चल रही थी. अमेरिका बीच में दूत बनकर काम कर रहा था. लेकिन इजरायल ने लेबनान में घुसकर एक पुराना किला कब्जा कर लिया. बस इसी एक कदम ने पूरी बातचीत को पटरी से उतार दिया. ईरान ने साफ कह दिया कि अब कोई बात नहीं होगी. और आगे की धमकी इतनी बड़ी है कि पूरी दुनिया की सांसें थम सकती हैं. वहीं, दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि ईरान शांति वार्ता के लिए बेचैन. लेकिन बस कुछ मुद्दों पर बात अटकी हुई है.

इजरायल और लेबनान की सीमा पर एक ताकतवर गुट है जिसका नाम है हिज्बुल्लाह. यह गुट ईरान के पैसे और हथियारों से चलता है. 2023 में जब इजरायल और गाजा के बीच जंग शुरू हुई, तो हिज्बुल्लाह ने भी इजरायल पर हमले शुरू कर दिए. उत्तरी इजरायल में रहने वाले लोगों की जिंदगी मुश्किल हो गई.

इजरायल ने जवाब में हिज्बुल्लाह को काफी कमजोर कर दिया. 2024 के आखिर में अमेरिका की मदद से एक समझौता हुआ और कुछ समय के लिए लड़ाई रुकी. लेकिन यह शांति ज्यादा देर नहीं टिकी.

लेबनान में बढ़ती लड़ाई के बीच ईरान ने अमेरिका के जरिए चल रही बातचीत रोकी (Photo: AI Generated)


मार्च 2025 में फिर शुरू हुई लड़ाई

2 मार्च को हिज्बुल्लाह ने फिर से इजरायल पर हमला किया. इजरायल ने इसके जवाब में लेबनान में घुसकर जमीनी ऑपरेशन शुरू कर दिया. इजरायल का कहना है कि हिज्बुल्लाह फिर से हथियार जमा कर रहा था और एक नई तरह के ड्रोन से हमले कर रहा था जो फाइबर ऑप्टिक केबल से चलता है. यही ड्रोन यूक्रेन की जंग में भी खूब इस्तेमाल हो रहा है.

Advertisement

बीफोर्ट किला क्या है और क्यों अहम है?

इस रविवार इजरायली सेना ने लेबनान के अंदर एक बहुत पुराना और ऊंचाई पर बना किला कब्जे में ले लिया. इसका नाम है बीफोर्ट या अल-शकीफ. यह किला करीब 700 मीटर ऊंचाई पर बना है और यहां से लेबनान और उत्तरी इजरायल दोनों साफ दिखते हैं.

यह भी पढ़ें: 'आखिरी अमेरिकी सैनिक...', मिसाइल पर लिखकर ईरान ने US बेस पर दागा

यह किला करीब 1000 साल पुराना है. इसे 12वीं सदी में बनाया गया था. इस पर सलाहुद्दीन की फौज, मम्लूक, ओटोमन, फ्रांस, फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन और इजरायल सब कब्जा जमा चुके हैं. इजरायल ने 1982 में इसे जीता था और 2000 में इसे छोड़ दिया था. अब 25 साल बाद इजरायल यहां वापस आया है.

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि यह किला इजरायली सेना की बहादुरी का प्रतीक है. लेकिन इजरायल के ही कुछ जानकार कह रहे हैं कि इससे कोई बड़ा फायदा नहीं होगा. एक पूर्व सरकारी अधिकारी ओर्ना मिजराही ने कहा कि लोगों के मन में यही सवाल है कि आखिर इस सबसे हासिल क्या होगा. उनका कहना है कि सिर्फ सैनिक ताकत से हिज्बुल्लाह की समस्या नहीं सुलझेगी, इसके लिए राजनीतिक रास्ता भी निकालना होगा.

लेबनान में तबाही का आलम

Advertisement

इजरायल की सेना लेबनान के दक्षिण में बड़े इलाकों पर काबिज हो चुकी है. वहां घर और ऐतिहासिक जगहें तोड़ी जा रही हैं. लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा कि इजरायल शहरों और कस्बों को पूरी तरह मिटाने की नीति पर चल रहा है. उनका यह भी कहना था कि इजरायल लेबनान की यादें मिटाने और लोगों की पहचान खत्म करने की कोशिश कर रहा है.

ब्यूफोर्ट किला (Photo: AFP)


इजरायल ने लेबनान के दक्षिणी इलाकों के लोगों को वहां से चले जाने की चेतावनी दी है. 3 मार्च से अब तक लेबनान में 3300 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं जिनमें दर्जनों बच्चे भी शामिल हैं. करीब 10 लाख लोग अपने घर छोड़ चुके हैं. राजधानी बेरूत में भी सैकड़ों लोग मारे गए हैं. अप्रैल में कुछ ही मिनटों में हुई भारी बमबारी में वहां काफी नुकसान हुआ. इजरायल की तरफ से 25 सैनिक और एक ठेकेदार मारे गए हैं. उत्तरी इजरायल में 2 आम नागरिकों की भी जान गई है.

बातचीत की कोशिश और हिज्बुल्लाह का इनकार

अप्रैल में वाशिंगटन में इजरायल और लेबनान के बीच सीधी बातचीत शुरू हुई. यह पिछले 30 से ज्यादा सालों में पहली बार हुआ क्योंकि इन दोनों देशों के बीच कोई राजनयिक रिश्ता नहीं है. पिछले शुक्रवार को दोनों देशों के बीच सीधी फौजी बातचीत भी हुई जो दशकों में पहली बार थी.

Advertisement

इन बातचीत में मुद्दे हैं कि इजरायल लेबनान से कब हटेगा, लेबनानी सेना वहां कब तैनात होगी और हिज्बुल्लाह के हथियार कब और कैसे खत्म होंगे. लेकिन हिज्बुल्लाह इन बातचीत में शामिल नहीं है और उसने साफ कह दिया है कि जब तक इजरायल लेबनान में है, वह हथियार नहीं छोड़ेगा. हिजबुल्लाह चाहता है कि बातचीत में ईरान की ताकत का इस्तेमाल हो और लेबनानी सरकार को कमजोर मानता है.

लेबनान के अपने लोग भी इस पर बंटे हुए हैं. कई लोग हिज्बुल्लाह से नाराज हैं कि उसने देश को तबाही में झोंक दिया. लेकिन साथ ही इजरायल पर भी भरोसा नहीं है. लेबनान के प्रधानमंत्री ने खुद कहा कि यह बातचीत अभी सबसे कम नुकसान वाला रास्ता है लेकिन इससे कुछ नतीजा निकलेगा इसकी कोई गारंटी नहीं है.

ईरान का गुस्सा और बड़ी धमकी

इजरायल सिर्फ लेबनान में ही नहीं लड़ रहा. ईरान के साथ भी उसकी सीधी जंग चल रही है. इस जंग को रोकने के लिए अमेरिका बीच में बातचीत करा रहा था. यह बातचीत बिचौलियों के जरिए हो रही थी.

यह भी पढ़ें: जिसे ढूंढ नहीं पाई ट्रंप सेना, आ गईं उसकी तस्वीरें, होर्मुज में दिखी ईरान की बारूदी माइंस

लेकिन अब ईरान ने एलान कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ यह संदेश का आदान प्रदान बंद कर रहा है. ईरान की तरफ से साफ कहा गया है कि जब तक इजरायल लेबनान और गाजा में हमले बंद नहीं करता, कोई बातचीत नहीं होगी.

Advertisement

ईरान और उसके साथी गुटों ने कहा है कि वे होर्मुज की खाड़ी को पूरी तरह बंद करने की तैयारी कर रहे हैं. इसके साथ ही बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को भी बंद करने की बात कही गई है. ये दो ऐसे रास्ते हैं जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और सामान मंगाता है. इन्हें बंद करने का मतलब होगा दुनियाभर में तेल की कीमतें आसमान छूना और समुद्री व्यापार ठप होना.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement