लेबनान की राजधानी बेरूत में जारी संघर्ष ने सिर्फ बुनियादी ढांचे और जनजीवन को ही नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को भी गहरे संकट में डाल दिया है. हिज्बुल्लाह और इजरायल की सेना (IDF) के बीच बढ़ते तनाव, सीमा क्षेत्रों में लगातार गोलाबारी और नवंबर 2024 में हुए भीषण युद्ध के बाद हालात और ज्यादा बिगड़ गए हैं. इसका सबसे बड़ा असर उन छात्रों पर पड़ा है, जिनका भविष्य शिक्षा पर निर्भर करता है.
आजतक के रिपोर्टर अशरफ वानी हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच 2 मार्च से जारी संघर्ष को कवर करने के लिए लेबनान में मौजूद हैं. उन्होंने बेरूत में दो स्थानीय छात्रों- मालिक अलफतेह और अली हाइनी हराब से बातचीत की. इन दोनों ने युद्ध के बीच अपनी शिक्षा, मानसिक स्थिति और भविष्य को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की. मालिक अलफतेह बताते हैं कि कुछ समय पहले तक उनकी जिंदगी सामान्य थी- स्कूल, दोस्त, सपने सब कुछ अपनी जगह था. लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं.
अलफतेह ने कहा, 'हर दिन अनिश्चितता के साथ शुरू होता है. कभी सायरन बजता है, कभी धमाकों की आवाज सुनाई देती है. ऐसे माहौल में पढ़ाई पर ध्यान लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है. सुरक्षा कारणों से स्कूल लंबे समय से बंद हैं और छात्रों को ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई करनी पड़ रही है.' मालिक अलफतेह इस समय अपने ग्रेजुएशन के अंतिम वर्ष में हैं, जो उनके करियर के लिए निर्णायक है. इसी वर्ष के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें आगे की पढ़ाई और करियर का रास्ता चुनना है. लेकिन मौजूदा हालात ने उनकी तैयारी को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. अलफतेह ने कहा, 'यह मेरे जीवन का सबसे अहम साल है, लेकिन युद्ध ने मेरी पढ़ाई की रफ्तार धीमी कर दी है. मुझे डर है कि कहीं इसका असर मेरे भविष्य पर न पड़े.'
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दूसरे छात्र अली हाइनी हराब का कहना है कि यह संकट सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाल रहा है. हराब ने कहा, 'लगातार डर, असुरक्षा और अनिश्चितता ने हमें भीतर से कमजोर कर दिया है. हम अपने सपनों के बारे में सोचते हैं, लेकिन हालात हमें आगे बढ़ने नहीं दे रहे.' अली हाइनी हराब के मुताबिक, धीरे-धीरे छात्र इस माहौल के आदी जरूर हो रहे हैं, लेकिन यह स्थिति सामान्य नहीं है. उन्होंने कहा, 'यह एक मजबूरी है, आदत नहीं. हम पढ़ना चाहते हैं, आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन हालात हमें पीछे खींच रहे हैं.'
लेबनान की राजधानी बेरूत में हिज्बुल्लाह और इजरायली सेना के बीच जारी संघर्ष के कारण न केवल स्कूल बंद हैं, बल्कि सामाजिक जीवन भी पूरी तरह ठप हो गया है. बच्चे और युवा अपने घरों तक सीमित हो गए हैं. खेलकूद, सामाजिक गतिविधियां और सामान्य बातचीत तक प्रभावित हुई हैं, जिससे उनका समग्र विकास बाधित हो रहा है. ऑनलाइन शिक्षा एक विकल्प के रूप में सामने आई है, लेकिन यह भी पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो रही. कई इलाकों में बिजली की समस्या, इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी और संसाधनों का अभाव छात्रों की पढ़ाई में बड़ी बाधा बन रहे हैं।.इसके अलावा, घर का तनावपूर्ण माहौल भी पढ़ाई के लिए अनुकूल नहीं है.
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यह संघर्ष केवल सीमाओं या सैन्य टकराव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा कहीं ज्यादा व्यापक है। यह एक ऐसी लड़ाई बन गई है, जो किताबों, कक्षाओं और छात्रों के सपनों तक पहुंच चुकी है. बेरूत के ये छात्र आज सिर्फ अपनी पढ़ाई नहीं, बल्कि अपने भविष्य को बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं. यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो इसका असर एक पूरी पीढ़ी पर पड़ेगा. न केवल उनकी शिक्षा प्रभावित होगी, बल्कि उनके आत्मविश्वास, मानसिक स्वास्थ्य और करियर की संभावनाएं भी कमजोर हो सकती हैं.