इजरायल में हुए नेशनल इलेक्शन में कथित फॉरेन इन्फ्लुएंस की जांच में अब मोसाद भी शामिल हो गया है. बताया जा रहा है कि इंटेलिजेंस एजेंसी मोसाद इस मामले में शिन बेट सिक्योरिटी सर्विस की मदद कर रही है.
इसमें कतर के अलावा तुर्की जैसे देशों से इलेक्शन को प्रभावित करने की आशंका जताई जा रही है. सेंट्रल इलेक्शंस कमेटी का कहना है कि जांच की स्कोप काफी लिमिटेड है और चुनाव के नतीजों पर कोई सवाल नहीं है. वहीं, कतर और तुर्की दोनों ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है कि उन्होंने वोट को प्रभावित करने की कोशिश की.
यह पूरा विवाद मंगलवार को पोलिंग बूथ्स पर अरब वोटर्स को पैसे देकर टर्नआउट बढ़ाने के आरोपों से जुड़ा है. रिश्वतखोरी के शक में 3 लोगों को अरेस्ट भी किया गया था. हालांकि इसका अभी तक कोई सबूत नहीं मिला है. बताया जा रहा है कि पुलिस ने उनके घरों पर रेड मारी थी.
टाइम्स ऑफ इजरायल की एक खबर में सोर्स के हवाले से बताया गया है कि यह पूरा मामला प्राइम मिनिस्टर ऑफिस से शुरू हुआ था. बेंजामिन नेतन्याहू के चीफ ऑफ स्टाफ इडो नोर्डन से मिली टिप के बाद ही पुलिस ने यह रेड मारी थी.
चुनाव नतीजों के बाद भी PM तय नहीं
बता दें, इजरायल के चुनाव नतीजे आने के बाद देश की अगली संसद यानी नेसेट की तस्वीर साफ हो गई है, लेकिन यह तय नहीं हो पाया है कि अगला प्रधानमंत्री कौन होगा. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी, पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट, दोनों में से किसी के खेमे को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है.
बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 53 सीटें और आइजेनकोट की यशार को 48 सीटें मिली हैं. इजरायल की 120 सदस्यीय संसद में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है. इस चुनाव में अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने ऐतिहासिक रूप से 19 सीटें हासिल की हैं. ऐसे में सरकार बनाने में उनकी भूमिका अहम हो सकती है.