ईरान ने केशम आईलैंड पर हमले के बाद अमेरिका को नए हमले के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है. ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अकरमिनिया ने कहा है कि अगर अमेरिका ने फिर हमला किया तो ईरान पहले से ज्यादा ताकतवर और घातक जवाब देगा. उन्होंने चेतावनी दी कि अगली जंग सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि क्षेत्र के बाहर भी फैल सकती है.
अकरमिनिया के मुताबिक, ईरान की सेना अपनी टारगेट लिस्ट अपडेट कर रही है. इसमें अमेरिकी और इजरायली सैन्य ठिकानों के साथ उनके दूसरे हितों को भी शामिल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ईरान की पहुंच में आने वाले किसी भी इलाके में मौजूद अमेरिकी ठिकानों, सैन्य उपकरणों, सैनिकों और हितों को निशाना बनाया जा सकता है.
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अमेरिका पर अलगाववादी गुटों को हथियार देने का आरोप
ईरानी सेना के प्रवक्ता ने अमेरिका पर इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में सरकार विरोधी और अलगाववादी गुटों को हथियार देने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका इन गुटों के जरिए ईरान के खिलाफ जमीनी मोर्चा खोलना चाहता था. हालांकि, ईरानी सेना की तैनाती और पहले से किए गए सैन्य अभियानों की वजह से यह योजना नाकाम हो गई.
वहीं, रॉयटर्स से बात करने वाले एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि युद्ध खत्म करने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच किसी समझौते की संभावना अभी दूर है. अधिकारी ने कहा कि तेहरान अमेरिका की अनुचित मांगों को स्वीकार नहीं करेगा. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अमेरिकी हमले की स्थिति में ईरान क्षेत्र के भीतर और बाहर दोनों जगह ताकतवर जवाब देने के लिए तैयार है.
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खाड़ी देशों के साथ सुरक्षा व्यवस्था चाहता है ईरान
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान की खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों के प्रति कोई दुश्मनी नहीं है. अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कतर और ओमान की भूमिका की तारीफ की और कहा कि सऊदी अरब के साथ बातचीत जारी है.
अराघची ने कहा कि ईरान ऐसी क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था चाहता है, जिसका नेतृत्व इसी क्षेत्र के देश करें. इसमें किसी बाहरी सैन्य मौजूदगी की जगह नहीं होनी चाहिए. उनका कहना है कि क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़े फैसले यहां के देशों को मिलकर लेने चाहिए.