दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत के शहर पहले से ही प्रदूषण की मार झेल रहे हैं. इस बीच पड़ोसी देश पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में खेतों में बड़े पैमाने पर पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं. चिंता की बात यह है कि वहां से उठने वाला धुआं उत्तर-पश्चिमी हवाओं के साथ भारत के कई इलाकों तक पहुंच सकता है. इससे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और आसपास के शहरों में हवा और खराब होने का खतरा है. नासा (NASA) के सैटेलाइट डेटा में पाकिस्तान के पंजाब में आग की घटनाएं भारत के पंजाब राज्य के मुकाबले कई गुना ज्यादा दर्ज की गई हैं.
पाकिस्तान में पराली का धुआं भारत तक पहुंचेगा
पाकिस्तान के पंजाब में खेतों में लगाई जा रही आग का असर भारत की हवा पर भी पड़ सकता है. उत्तर-पश्चिमी हवाएं पाकिस्तान की तरफ से धुआं और प्रदूषक कण भारत की ओर ला सकती हैं. मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, अगले चार दिनों तक उत्तर-पश्चिमी हवाएं चलने का अनुमान है. ऐसे में पाकिस्तान के खेतों से उठने वाला धुआं पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-NCR और उत्तर भारत के दूसरे इलाकों में प्रदूषण बढ़ा सकता है. चिंता इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि अगले कम से कम एक हफ्ते तक पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) आने की संभावना नहीं है. पश्चिमी विक्षोभ की वजह से कई बार हवा और मौसम में बदलाव होता है. इसके नहीं आने से प्रदूषकों को फैलने या हटने का मौका कम मिल सकता है.
पाकिस्तान में पराली जलाने की घटनाएं बहुत ज्यादा
पाकिस्तान में पराली जलाने का पैमाना कितना बड़ा है, इसका अंदाजा सैटेलाइट आंकड़ों से लगाया जा सकता है. पाकिस्तान के अखबार डॉन (Dawn) ने अपनी एक रिपोर्ट में एनवायरनमेंट ऑब्जर्वेशन प्लेटफॉर्म हमारी हवा (HamariHawa) की एनालिसस के हवाले से बताया कि अक्टूबर के पहले 29 दिनों में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में खेतों में आग की घटनाएं भारत के पंजाब राज्य से 4.2 गुना ज्यादा थीं. नासा के फायर इन्फॉर्मेशन फॉर रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (FIRMS) ने इस दौरान पाकिस्तान के पंजाब में ऐसे 13,241 स्थान दर्ज किए जहां आग की लपटें दिखाई दीं. वहीं, भारतीय पंजाब में ऐसे 3,158 स्थानों का पता चला. हालांकि, भारतीय पंजाब के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आधिकारिक आंकड़ों में इसी अवधि में पराली जलाने की 1,007 घटनाएं दर्ज की गई थीं.
पाकिस्तान के इन इलाकों में सबसे ज्यादा जली पराली
पाकिस्तान के पंजाब में पराली जलाने की ज्यादातर घटनाएं लाहौर के आसपास धान की खेती वाले इलाकों में सामने आई हैं. 1 से 29 अक्टूबर के बीच ओकारा में सबसे ज्यादा 2,144 जगहों पर आग दर्ज की गई. इसके अलावा गुजरांवाला में 1,011 और ननकाना साहिब में 1,003 जगहों पर आग मिली. इन तीन जिलों में कुल 4,158 जगहों पर आग दर्ज हुई. यह संख्या इसी अवधि में पूरे भारतीय पंजाब में नासा के सैटेलाइट से मिली 3,158 घटनाओं से भी ज्यादा है. पाकपट्टन में आग के 922, शेखूपुरा में 756, हाफिजाबाद में 713, डेरा गाजी खान में 710, कसूर में 699, खानेवाल में 682 और झंग में 676 स्थान दर्ज किए गए.
अक्टूबर के अंत में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ीं
पाकिस्तान के पंजाब में अक्टूबर के आखिरी दिनों में खेतों में आग लगाने की घटनाएं तेजी से बढ़ीं. नासा के FIRMS डेटा के मुताबिक, अक्टूबर के अंतिम सात दिनों में ही आग के 6,655 स्थान दर्ज किए गए. यह 1 से 29 अक्टूबर के बीच दर्ज कुल घटनाओं का करीब आधा हिस्सा था. 29 अक्टूबर को एक ही दिन में सबसे ज्यादा 1,327 जगहों पर आग का पता चला. FIRMS के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान के पंजाब में दर्ज आग के करीब 92 फीसदी स्थान खेतों में थे. माना जा रहा है कि इनका संबंध फसल के अवशेष जलाने से था.
भारतीय पंजाब में भी पराली जलाने की घटनाएं बढ़ीं
पाकिस्तान के साथ-साथ भारतीय पंजाब में भी पराली जलाने के मामले सामने आ रहे हैं. नासा के सैटेलाइट डेटा में अक्टूबर के पहले 29 दिनों में भारतीय पंजाब में आग के 3,158 स्थान दर्ज हुए. राज्य में तरनतारन 397 घटनाओं के साथ सबसे बड़ा हॉटस्पॉट रहा. अमृतसर में 171 और फिरोजपुर में 104 स्थानों पर आग दर्ज की गई. इसके अलावा संगरूर, पटियाला, गुरदासपुर, कपूरथला और बठिंडा में भी पराली जलाने की घटनाएं सामने आईं. यानी उत्तर भारत के लिए चिंता सिर्फ पाकिस्तान से आने वाले धुएं की नहीं है. भारतीय पंजाब में भी पराली जलने से प्रदूषण का स्थानीय स्तर पर दबाव बढ़ सकता है.
दिल्ली की हवा जहरीली, कई इलाकों में AQI 400 पार
पाकिस्तान से धुआं आने की आशंका ऐसे समय है, जब दिल्ली की हवा पहले से खराब स्थिति में है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, मंगलवार सुबह दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 331 दर्ज किया गया. यह 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है. राजधानी के कई इलाकों में AQI 400 के पार पहुंच गया. जहांगीरपुरी में 449, रोहिणी में 429, पंजाबी बाग में 424, अलीपुर में 413, विवेक विहार में 410, नरेला में 406 और बवाना में 403 दर्ज किया गया.
मुंडका में AQI 396, मंदिर मार्ग पर 368 और ओखला फेज-2 में 352 रहा. गाजियाबाद की स्थिति भी चिंताजनक रही. AQI.in के मुताबिक, मंगलवार सुबह 8:31 बजे वहां AQI 516 दर्ज किया गया. गाजियाबाद की हवा में वाहनों का धुआं, औद्योगिक गतिविधियां, निर्माण कार्य, सड़क की धूल और कचरा जलाने से निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण बढ़ा रहा है.
अगले कुछ दिन उत्तर भारत के लिए क्यों अहम?
दिल्ली-NCR और आसपास के इलाकों में प्रदूषण बढ़ने की आशंका के पीछे दो बड़ी वजहें हैं. पहली, पाकिस्तान और भारतीय पंजाब में खेतों में आग की बढ़ती घटनाएं. दूसरी, उत्तर-पश्चिमी हवाएं, जो पाकिस्तान की तरफ से धुआं और प्रदूषक कण भारत की ओर ला सकती हैं. इसके अलावा अगले कुछ दिनों तक पश्चिमी विक्षोभ की गैरमौजूदगी भी चिंता बढ़ा रही है. अगर हवा की दिशा और मौसम की स्थिति ऐसी ही बनी रहती है, तो दिल्ली, हरियाणा, गाजियाबाद और उत्तर भारत के दूसरे हिस्सों में प्रदूषण का दबाव बढ़ सकता है.
हालांकि, पाकिस्तान से उठने वाले धुएं का भारत के अलग-अलग शहरों पर वास्तविक असर हवा की गति, दिशा और मौसम की दूसरी स्थितियों पर निर्भर करेगा. नासा की सैटेलाइट तस्वीरों और आंकड़ों ने पाकिस्तान के पंजाब में खेतों में आग की बड़ी संख्या जरूर दिखाई है. अब सबसे अहम सवाल यह है कि आने वाले दिनों में हवा का रुख उत्तर भारत की तरफ कितना धुआं लेकर आता है.