मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि अगले दो या तीन दिनों में दोनों देशों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर होने की अच्छी संभावना है. हालांकि, उन्होंने इस आशावाद के पीछे की वजह सार्वजनिक नहीं की है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "हम एक बहुत अच्छी, मजबूत और शक्तिशाली डील के बेहद करीब हैं." उन्होंने यह भी कहा कि यदि अमेरिका चाहे तो बमबारी अभियान को और कई सप्ताह तक जारी रख सकता है, लेकिन ऐसा करने से भारी जनहानि होगी और क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ेगी. उनका कहना है कि वो ऐसा नहीं चाहते.
ट्रंप ने कहा, "यदि हम बमबारी करते हैं तो बहुत से लोग मारे जाएंगे. कौन ऐसा करना चाहेगा? मैं नहीं." उनके इस बयान को सैन्य दबाव और कूटनीतिक समाधान के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, संघर्ष के बीच जमीनी स्तर पर बातचीत अब भी कठिन बनी हुई है.
पाकिस्तान पिछले कई हफ्तों से दोनों देशों के बीच समझौते की कोशिशों में लगी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है. विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम का भंडार बना हुआ है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने हाई-एनरिच्ड यूरेनियम स्टॉक को छोड़ दे.
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि 2025 में हुई 12 दिन की लड़ाई और एयरस्ट्राइक के बावजूद यह सामग्री अब भी देश के भीतर कहीं सुरक्षित रखी गई है. दूसरी ओर ईरान इस मांग को मानने से इनकार कर रहा है. तेहरान आर्थिक प्रतिबंधों में राहत, फ्रीज किए गए एसेट्स की रिहाई और आर्थिक छूट की मांग कर रहा है.
इन मांगों को ट्रंप प्रशासन स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रहा. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने भी अमेरिकी रुख पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि ट्रंप के हालिया बयान उन बिंदुओं से मेल नहीं खाते जिन पर पहले सहमति बनी थी. उनका कहना है कि अमेरिका स्थायी संघर्ष विराम नहीं चाहता है.
इससे पहले होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी सेना का एक हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि हेलीकॉप्टर में सवार दोनों क्रू मेंबर और पायलट पूरी तरह सुरक्षित हैं. किसी को कोई चोट नहीं आई है. यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब ईरान और इजरायल के बीच संघर्षविराम को लेकर हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं.
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार सुबह तक हादसे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी थी. इस समय क्षेत्र में तनाव पहले ही चरम पर है क्योंकि एक दिन पहले ईरान और इजरायल के बीच हुई गोलीबारी को युद्ध के बाद लागू संघर्ष विराम के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है.
ईरान के सरकारी टेलीविजन ने मंगलवार को दावा किया कि इजरायली हमलों में उसकी एयर डिफेंस यूनिट के दो सदस्य मारे गए हैं. इस घटना ने पहले से तनावपूर्ण हालात को जटिल बना दिया है. फरवरी के अंत से जारी संघर्ष ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित किया है बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डाला है.
उधर, लेबनान में भी हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं. मंगलवार को इजरायली सेना ने दक्षिणी बंदरगाह शहर टायर के लिए नई निकासी चेतावनी जारी की है. इसमें शहर के ईसाई बहुल इलाके भी शामिल हैं, जिन्हें अब तक बड़े हमलों से अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता था. इजरायल का दावा है कि इन क्षेत्रों में हिज्बुल्लाह सक्रिय हो सकता है.