scorecardresearch
 

ईरान जंग और रमज़ान... धमाकों के बीच याद आई 'जंग-ए-बद्र', बदल गई थी इस्लामी दुनिया की दिशा

रमज़ान मुसलमानों के लिए इबादत, सब्र और रहमत का महीना होता है. इस बीच, मिडिल ईस्ट में चल रही जंग ने पाक महीने की रूहानी फिज़ा को अजीब सी दहशत और अनिश्चितता में बदल दिया है. इस्लामी तारीख़ में रमज़ान के वक़्त जंग कोई नई बात नहीं है.

Advertisement
X
इज़रायल-यूएस जंग के बीच ईरान में रोज़ेदारों को मुश्किलो का सामना करना पड़ रहा है. (Photo: AFP)
इज़रायल-यूएस जंग के बीच ईरान में रोज़ेदारों को मुश्किलो का सामना करना पड़ रहा है. (Photo: AFP)

मुस्लिम वर्ल्ड के सबसे पवित्र महीने रमज़ान के वक़्त मिडिल ईस्ट जंग चपेट में है. अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर 28 फरवरी को हमला किया, जिसके बाद मौजूदा जंग शुरू हुई. युद्ध छिड़ने के क़रीब 10 दिन पहले 18 फ़रवरी को रमज़ान शुरू हो चुका था. ईद-उल-फ़ित्र यानी मध्य मार्च तक रोज़े चलते रहेंगे और ईद तक जंग रुकने की कोई उम्मीद भी नहीं नज़र आ रही है. ऐसे में जंग के हालात में ईरान के रोज़ेदारों को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. 

रोज़ेदारों को दिनभर भूखे रहते हुए लगातार एयर रेड सायरन, मिसाइल हमलों और ड्रोन अटैक्स का सामना करना पड़ रहा है. इससे सेहरी (सुबह का भोजन) और इफ़्तार (शाम का भोजन) बाधित हो रहे हैं, क्योंकि लोग बमबारी के बीच शेल्टर की ओर भागते हैं.

CTV की रिपोर्ट के मुताबिक, रमज़ान की नमाज़ के दौरान प्रोटेस्ट, सायरन और हमलों से मज़हबी रिवायात प्रभावित हो रहे हैं, जिससे लोगों में मानसिक तनाव बढ़ रहा है.

तेहरान की ज़मीनी हक़ीक़त...

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान में रहने वाले एक शख़्स ने पिछले साल इज़रायल और ईरान के बीच हुए झगड़े का ज़िक्र करते हुए कहा, "हम अभी जो एक्सपीरिएंस कर रहे हैं, वह पिछली बार की 12 दिन की लड़ाई के दौरान हमने जो अनुभव किया था, उससे कहीं ज़्यादा है."

कुछ ईरानी नागरिकों का कहना है कि मौजूदा जंग से उन्हें अपने परिवारों के लिए डर लगने लगा है, वहीं दूसरे लोग सरकार को डरा हुआ बताते हैं और देश के भविष्य के लिए उम्मीद जताते हैं.

Advertisement

बीबीसी के मुताबिक, तेहरान में एक 25 साल के स्टूडेंट का कहना है, "हम अपनी ही परछाई से डरते हैं. हर जगह चेकपॉइंट्स हैं. हम उस पल का इंतज़ार कर रहे हैं, जब हम सब बाहर निकलेंगे और जीतेंगे. अंडे और आलू जैसी ज़रूरी चीज़ों के दाम भी आसमान छू रहे हैं. पेट्रोल और ब्रेड के लिए लाइनें लगी हुई हैं."

यूएस रीप्रजेंटेटिव इल्हाम उमर ने रमजान के दौरान ईरान पर हमले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति पर सवाल भी उठाया था. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "रमज़ान के दौरान US ने इराक पर हमला किया था और यह जानकर दुख होता है कि US रमज़ान के दौरान फिर से ईरान पर हमला करने जा रहा है. लगता है US को रमज़ान के दौरान मुस्लिम देशों पर हमला करना पसंद है और मुझे यकीन है कि इन देशों ने इंटरनेशनल कानून का उल्लंघन नहीं किया है, बल्कि वे किसकी पूजा करते हैं, इस बारे में किया है."

iran war

अगर गुज़रे दिनों पर नज़र डाली जाए तो इस्लामी तारीख़ में रमज़ान के महीने में कई बड़ी जंगें हुईं और फ़तह हासिल हुई. ये जंगें मुसलमानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं. सबसे बड़ी और मशहूर 'बद्र की जंग' है, जिसका नेतृत्व इस्लाम के आख़िरी पैग़ंबर मुहम्मद साहब ﷺ ने किया था.

Advertisement

जंग-ए-बद्र (Battle of Badr)

इस्लाम के आख़िरी पैग़ंबर मुहम्मद साहब ﷺ के नेतृत्व में 313 मुसलमानों ने क़ुरैश की 1000 की सेना को हराया था. यह जंग रमज़ान महीने के दिन जुमे, 17 तारीख़, 2 हिजरी (13 मार्च 624 CE) को हुई थी. बद्र की जंग इस्लाम की पहली बड़ी जीत थी. इसका जिक्र कु़रआन शरीफ़ में 'यौम अल-फ़ुरकान' के तौर पर किया गया है.

बद्र की लड़ाई से पहले, मुसलमानों और मक्का के ताक़तवर क़ुरैश क़बीले के बीच तनाव बहुत ज़्यादा था. मक्का में क़ुरैश क़बीले से बहुत ज़्यादा ज़ुल्म के बाद मुसलमानों ने 622 में हिजरा (इमिग्रेशन) किया और मदीना में बस गए. अपने घर और सामान छोड़ने के लिए मजबूर मुसलमानों को यथ्रिब (अब मदीना) की बस्ती में अपने लिए एक नई ज़िंदगी बनाने के लिए बुलाया गया था.

बद्र की जंग तक, मुसलमानों ने डिफेंसिव अप्रोच अपनाया था, लेकिन जो जीत की लड़ाई उनका इंतज़ार कर रही थी. यह जंग अरब पेनिनसुला में मुसलमानों की स्थिति और इस्लाम के फैलाव के लिए एक अहम मोड़ साबित हुई.

इस लड़ाई को इस्लामी इतिहास और दुनिया की घटनाओं में सबसे बड़ी और सबसे अहम मिलिट्री जीतों में से एक बताया जाता है. यह रमज़ान के महीने में हुई थी, लेकिन इसकी अहमियत उस चमत्कार में भी है, जिसके बारे में मुसलमान मानते हैं कि लड़ाई के दौरान यह हुआ था.

Advertisement

बद्र की लड़ाई के करीब छह साल बाद, मुसलमानों ने अम्न के साथ मक्का पर कब्ज़ा कर लिया और क़ुरैश क़बीले ने सरेंडर कर दिया.

 
---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement