ईरान में भारी जंग चल रही है. पिछले एक साल में ईरान पर ये दूसरा बड़ा हमला है. पिछले साल जून में अमेरिका ने ईरान की तीन न्यूक्लियर फैसिलिटी पर हमला किया था और उन्हें तबाह करने का दावा किया था. हालांकि, अब फिर 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने यही बात कहकर ईरान पर हमला किया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह कभी भी ईरान को न्यूक्लियर स्टेट नहीं बनने देंगे.
इसी बीच परमाणु हथियारों पर नजर रखने वालीं संयुक्त राष्ट्र की संस्था इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के चीफ राफेल ग्रॉसी ने कहा कि ईरान का लगभग आधा यूरेनियन इस्फहान में एक टनल कॉम्प्लेक्स में स्टोर किया गया था और शायद अभी भी वहीं है. उन्होंने कहा कि टनल कॉम्प्लेक्स में रखा यूरेनियम 60% तक एनरिच्ड है और हथियार बनाने लायक होने से बस थोड़ा ही दूर है.
राफेल ग्रॉसी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब इजरायली सेना ने इस्फहान में और ज्यादा बड़े हमले करने की बात कही है. उन्होंने जिस टनल कॉम्प्लेक्स का जिक्र किया है, वही शायद एकमात्र ऐसी जगह है जिसे पिछले जून में हुए हमलों में ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था. कई डिप्लोमैट्स लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि इस्फहान का इस्तेमाल 60% तक एनरिच्ड यूरेनियम को स्टोर करने के लिए किया जा रहा है. इसकी पुष्टि पिछले महीने IAEA ने एक रिपोर्ट में भी की थी लेकिन यह नहीं बताया था कि वहां कितना यूरेनियम है.
ईरान के पास कितना स्टॉक?
IAEA का अनुमान है कि जब इजरायल ने जून में हमले किए थे, तो ईरान के पास 440.9 किलो 60% एनरिच्ड यूरेनियम था. एजेंसी का मानना है कि अगर इसे और एनरिच किया जाता है तो इससे 10 परमाणु हथियारों के लिए जरूरी विस्फोटक मिल जाएगा.
राफेल ग्रॉसी ने पेरिस में मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमारा मानना है कि हमारे पिछले इंस्पेक्शन तक इस्फहान में 200 किलो से ज्यादा 60% एनरिच्ड यूरेनियम था. उन्होंने कहा कि ज्यादातर स्टॉक इस्फहान में था और कुछ दूसरी जगहों पर रखा हुआ था लेकिन शायद वह खत्म हो गया होगा.
उन्होंने कहा कि ज्यादातर स्टॉक अभी भी वहीं रखा हुआ है. सैटेलाइट तस्वीरों में ऐसी कोई हलचल नहीं दिखी है जिससे पता चले कि यूरेनियम को वहां से ट्रांसफर किया गया है.
जून से IAEA ने नहीं किया दौरा
ईरान ने जून के हमलों के बाद से IAEA को अपने एनरिच्ड यूरेनियम की स्थिति या जगह के बारे में नहीं बताया है और नहीं उसने एजेंसी को अपनी बमबारी वाली जगहों पर जाने दिया है.
अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर अपने हमलों के लिए ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को ही वजह बताया है. उनका तर्क है कि वह बम बनाने के बहुत करीब पहुंच रहा था, जबकि ट्रंप ने जून में दावा किया था कि अमेरिकी हमलों ने प्रोग्राम को खत्म कर दिया है.
ईरान के तीन न्यूक्लियर फैसिलिटी- नतांज, इस्फहान और फोर्दो हैं, जहां यूरेनियम को एनरिच किया जाता है. जून के हमलों में नतांज में दो और फोर्दो में एक प्लांट बुरी तरह डैमेज हो गए थे. ग्रॉसी ने कहा कि नतांज में भी 60% एनरिच्ड यूरेनियम अभी है.