दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल देने वाले देश ईरान ने अपनी तेल नीति में एक पेचीदा बदलाव करने का फैसला किया है. जो लोग महीने में 110 लीटर से ज्यादा पेट्रोल अपनी गाड़ियों में खर्च करेंगे, अब उनकी जेब पर सीधा असर पड़ेगा. मंगलवार से ऐसे भारी इस्तेमाल वाले ग्राहकों के लिए पेट्रोल के दाम कई गुना बढ़ जाएंगे. युद्ध के साए और अमेरिका की कमरतोड़ आर्थिक पाबंदियों के बीच अपनी लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था की मुश्किलों से निपटने के लिए यह नया फॉर्मूला लाया गया है.
ईरान में पेट्रोल का कोटा सिस्टम तय है. सरकारी स्तर पर साफ किया गया है कि आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि पहले और दूसरे कोटे के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. झटका सिर्फ तीसरे कोटे वालों को लगेगा. ईरान की प्रवक्ता फातेमेह मोहाजेरानी ने बताया कि मौजूदा हालात की वजह से यह कदम उठाया गया है.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ईरान में पेट्रोल खरीदने का हिसाब-किताब बेहद सीधा रखा गया है. हर आम गाड़ी वाले को महीने का पहला 60 लीटर पेट्रोल पुरानी रियायती (सब्सिडी वाली) दर यानी 15,000 रियाल प्रति लीटर के हिसाब से ही मिलेगा.
अगर सफर लंबा है तो अगला 50 लीटर का कोटा 30,000 रियाल प्रति लीटर के भाव से मिल जाएगा. यानी कुल मिलाकर 110 लीटर तक पुराने भाव ही चलेंगे. जैसे ही खपत 110 लीटर के पार जाएगी, तीसरे कोटे की शुरुआत होगी. इसके बाद हर लीटर पेट्रोल के लिए 1,00,000 ईरानी रियाल चुकाने होंगे. खुले बाजार की दर के हिसाब से यह करीब 4 अमेरिकी सेंट प्रति लीटर बैठता है.
विरोध का डर और 2019 की कड़वी यादें
पेट्रोल के दाम बढ़ाने का फैसला ईरान के लिए आसान नहीं रहा है. सरकार इस मुद्दे पर लंबे समय से विचार कर रही थी, लेकिन इसे टाल दिया गया था. इसकी एक बड़ी वजह 2019 का अनुभव है. उस साल पेट्रोल की कीमत बढ़ने के बाद ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे. इसी पुरानी याद के बीच सरकार ने इस बार बदलाव का दायरा सीमित रखा है. 110 लीटर तक पेट्रोल इस्तेमाल करने वालों पर नई दर लागू नहीं होगी. ज्यादा खपत करने वालों के लिए ही तीसरे कोटे की कीमत बढ़ाई गई है.
पाबंदियों की मार से जूझ रहा ईरान
OPEC (Organization of the Petroleum Exporting Countries) का सदस्य होने के बावजूद ईरान कई आर्थिक मुश्किलों से घिरा है. एक तरफ अमेरिकी पाबंदियों का दबाव है, दूसरी तरफ देश में पेट्रोल की मांग बढ़ रही है. दिसंबर में भी सरकार ने बढ़ती मांग को काबू करने के लिए सब्सिडी वाले पेट्रोल की कुछ कीमतों में आंशिक (थोड़ा) बदलाव किया था.
अब 110 लीटर की सीमा के बाद पेट्रोल की कीमत बढ़ाने का फैसला किया गया है. सरकार का कहना है कि बढ़ी दर सिर्फ उन लोगों पर लागू होगी जिन्हें एक महीने में 110 लीटर से ज्यादा पेट्रोल की जरूरत पड़ती है. यानी आम इस्तेमाल करने वालों के लिए पहले दो कोटे की कीमतें पहले जैसी ही रहेंगी.