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पाकिस्तान के कराए सीजफायर पर भरोसा नहीं! ईरान बोला- रूस-चीन दें सुरक्षा की गारंटी

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चालीस दिनों से चल रही जंग पर अस्थायी संघर्षविराम हो गया है. लेकिन ईरान अमेरिका पर भरोसा नहीं कर पा रहा और उसका कहना है कि अमेरिका सीजफायर तोड़ सकता है. उसने चीन और रूस जैसे देशों से सुरक्षा की गारंटी मांगी है.

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ईरान ने कहा है कि उसे रूस-चीन से सुरक्षा की गारंटी चाहिए (Photo: Reuters)
ईरान ने कहा है कि उसे रूस-चीन से सुरक्षा की गारंटी चाहिए (Photo: Reuters)

बुधवार सुबह ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बीते चालीस दिनों से चल रही जंग पर विराम लग गया. दोनों पक्ष एक-दूसरे पर 15 दिनों के लिए हमला न करने पर सहमत हुए हैं. लेकिन अमेरिका के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए ईरान सीजफायर के टिकने को लेकर भरोसा नहीं कर पा रहा है. बुधवार को ही चीन में ईरान के राजदूत अब्दुलरेजा रहमानी फजली ने कहा कि उन्हें उम्मीद है, चीन शांति के सुरक्षा गारंटरों में से एक बन सकता है.

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने एक बार फिर भरोसा तोड़ा, तो ईरान की ओर से कड़ा जवाब दिया जाएगा. साथ ही उन्होंने चीन और रूस को 'सच्चा दोस्त' बताते हुए धन्यवाद दिया.

फ़ज़ली ने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि अलग-अलग पक्ष यह सुनिश्चित करें कि अमेरिका फिर से युद्ध शुरू न करे. हम चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, चीन-रूस जैसे बड़े देश, और पाकिस्तान, तुर्की जैसे मध्यस्थ देश मिलकर क्षेत्र में शांति की गारंटी दें.'

ईरानी राजदूत का यह बयान संघर्षविराम की घोषणा के कुछ घंटे बाद आया है जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बमबारी को दो हफ्तों के लिए रोकने की बात कही, ताकि युद्धविराम पर बातचीत हो सके.

समाचार एजेंसी एएफपी को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने भी अस्थायी संघर्षविराम में चीन की भूमिका को स्वीकार किया है. उन्होंने कहा कि ईरान को बातचीत की मेज पर लाने में चीन की अहम भूमिका रही है. फजली ने भी कहा कि ईरान अपने मित्र देशों, खासकर चीन, के साथ लगातार बातचीत कर रहा है.

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उन्होंने कहा, 'हम चाहते हैं कि युद्ध रुके और युद्धविराम कायम रहे, लेकिन इसके लिए भरोसेमंद गारंटी भी जरूरी है.'

फजली ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वो तीन बार अपने वादे से पीछे हट चुका है और ईरान पर हमला कर चुका है, इसलिए अब उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने फिर समझौते तोड़े, तो ईरान कड़ी कार्रवाई करेगा और अमेरिका को पछताना पड़ेगा.

होर्मुज स्ट्रेट को खोलने पर क्या बोले ईरानी राजदूत

बीजिंग में ईरानी राजदूत फजली ने कहा कि फिलहाल करीब 3,000 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ईरान दबाव कम करने और जहाजों को गुजरने देने के लिए कदम उठाएगा, लेकिन स्ट्रेट पूरी तरह खुलेगा या नहीं, यह बातचीत के नतीजों पर निर्भर करेगा.

उन्होंने बताया कि संघर्षविराम पर शुक्रवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बातचीत होगी और ईरान का विदेश मंत्रालय बातचीत का नेतृत्व करेगा.

फजली ने यह भी कहा कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट के लिए ट्रांजिट फीस लगाने पर विचार कर रहा है, लेकिन अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि सदियों से ईरान इस स्ट्रेट की सुरक्षा का जिम्मा उठाता आया है, लेकिन उसकी भूमिका को कभी सही तरीके से मान्यता नहीं मिली.

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उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ मिलकर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा, लेकिन मुख्य सुरक्षा की गारंटी ईरान ही देगा.

फजली ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका की बुरी तरह से हार हुई है लेकिन वो अपनी हार को भी जीत के रूप में पेश कर रहा है ताकि आलोचना से बचा जा सके.

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में उन्होंने चीन और रूस को ईरान का सच्चा दोस्त बताते हुए कहा कि इन देशों ने अरब देशों के होर्मुज खोलने के प्रस्ताव का विरोध किया जिसके लिए ईरान उनका आभार जताता है.

इस प्रस्ताव के पक्ष में 11 देशों ने मतदान किया था, लेकिन चीन और रूस ने वीटो कर दिया. पाकिस्तान और कोलंबिया ने वोटिंग से दूरी बनाई थी. 

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