ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में करीब 13 देशों ने हिस्सा नहीं लिया या अपने डेलिगेशन का लेवल घटा दिया. ईरानी मीडिया का दावा है कि इसके पीछे अमेरिका की कूटनीतिक मुहिम थी, जिसके तहत कई देशों पर समारोह से दूरी बनाए रखने के लिए दबाव बनाया गया.
ईरानी मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने कथित तौर पर ईरान के मरहूम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के जुलूस में शामिल होने से देशों को रोकने के लिए एक राजनयिक अभियान चलाया था, जिसके बाद 13 देशों ने तेहरान में होने वाले इस कार्यक्रम से अपनी भागीदारी वापस ले ली या कम कर दी.
ईरान के एक सूत्र का हवाला देते हुए, तेहरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी Tasnim ने बताया कि अंतिम संस्कार के जुलूस से एक हफ्ते पहले, वॉशिंगटन ने कथित तौर पर सबसे ऊंचे स्तर पर एक राजनयिक अभियान शुरू किया था. इसमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो और दुनिया भर में अमेरिकी राजदूत शामिल थे, इसका मकसद इस कार्यक्रम में विदेशी भागीदारी को रोकना था.

'अमेरिका की तरफ से धमकियां...'
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) से जुड़ी Tasnim ने रिपोर्ट दी है कि अमेरिका के कैंपेन में विकास कार्यों के लिए दी जाने वाली मदद में कटौती करने और वॉशिंगटन के साथ द्विपक्षीय संबंधों को 'नुकसान' पहुंचाने की 'साफ धमकियां' शामिल थीं. ये धमकियां उन देशों के लिए थीं, जो मध्य तेहरान में इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला में खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने आने वाले थे.
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 26 जून को एक गोपनीय निर्देश जारी किया. इसमें अमेरिकी दूतावासों और राजनयिक मिशनों से कहा गया कि वे संबंधित देशों की सरकारों को बताएं कि अंतिम संस्कार में शामिल होने को 'दोस्ताना न होने वाला कदम' माना जाएगा और इसके चलते वॉशिंगटन के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर 'नकारात्मक असर' पड़ सकता है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अफ्रीका में अमेरिकी राजदूतों ने सरकारों को चेतावनी देते हुए कहा कि समारोह में शामिल होने से अमेरिका से मिलने वाली विकास सहायता खतरे में पड़ सकती है.
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अरब राजनयिकों को भी चेतावनी!
Tasnim की रिपोर्ट के मुताबिक, दो अरब राजनयिकों ने इस बात की पुष्टि की और बताया कि सेक्रेटरी रुबियो ने करीब पांच अरब देशों से संपर्क करके उनसे तेहरान में होने वाले अंतिम संस्कार के जुलूस से दूर रहने का आग्रह किया. रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा न करने पर अमेरिका और अरब देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर बुरा असर पड़ सकता था.

कौन से देश नहीं शामिल हुए?
रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 13 देशों ने तेहरान में होने वाले अंतिम संस्कार से या तो अपने कदम पीछे खींच लिए या अपनी भागीदारी रद्द कर दी. इनमें पूर्वी यूरोप के तीन देश, अफ्रीका के पांच देश, फारस की खाड़ी के दो अरब देश और पूर्वी एशिया के दो प्रमुख देश शामिल थे.
एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान में लाखों लोगों की भीड़ ने 'अमेरिका मुर्दाबाद' और 'इजरायल मुर्दाबाद' के नारे लगाए और 28 फरवरी को हुए उस हमले का बदला लेने की मांग की, जिसमें 86 वर्षीय सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई थी.