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भारत को लेकर बदले चीन के सुर, कहा- हम दुश्मन नहीं, एक-दूसरे के लिए मौका हैं!

भारत और चीन के रिश्तों को लेकर बीजिंग का बड़ा बयान सामने आया है. चीन ने कहा है कि दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि सहयोगी साझेदार के रूप में एक-दूसरे को देखना चाहिए. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की टिप्पणी के बाद आया बयान एशियाई भू-राजनीति में नए संकेत दे रहा है.

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की टिप्पणी के बाद चीन का सहयोग बढ़ाने पर जोर. (File Photo: ITG)
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की टिप्पणी के बाद चीन का सहयोग बढ़ाने पर जोर. (File Photo: ITG)

भारत और चीन के बीच रिश्तों को लेकर बीजिंग ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है. उसकी तरफ से कहा गया है कि दोनों देशों को सही रणनीतिक सोच पर कायम रहना चाहिए. बीजिंग ने कहा कि भारत और चीन प्रतिद्वंद्वी या प्रतिरोधी ताकतें नहीं हैं, बल्कि सहयोगी साझेदार हैं और एक-दूसरे के विकास के लिए अवसर हैं, खतरा नहीं. 

दरअसल, चीन की यह प्रतिक्रिया रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया टिप्पणी के बाद आई है. पुतिन ने भारत और चीन के साथ रूस के मजबूत रिश्तों का जिक्र करते हुए दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग की सराहना की थी. इसी टिप्पणी को लेकर जब बीजिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान से सवाल किया गया था.

इस पर लिन जियान ने भारत और चीन को 'सहयोगी साझेदार' बताते हुए रिश्तों को दीर्घकालिक और रणनीतिक नजरिए से आगे बढ़ाने की वकालत की है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में चीन-भारत सीमा पर स्थिति सामान्य रूप से स्थिर है. दोनों देशों के बीच संवाद का चैनल सुचारु रूप से काम कर रहा है. दोनों देश एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि चीन और भारत को सहयोगी साझेदार के रूप में आगे बढ़ना चाहिए. दोनों देशों को एक-दूसरे के विकास को अवसर के रूप में देखना चाहिए, न कि खतरे के रूप में. उनके मुताबिक, दुनिया की दो सबसे बड़ी आबादी वाले देशों के बीच स्थिर और सकारात्मक संबंध न केवल दोनों देशों बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं.

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चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आगे कहा कि दोनों पक्षों को अपने संबंधों को रणनीतिक ऊंचाई और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि आपसी विश्वास को मजबूत करना, सहयोग का विस्तार करना और मतभेदों को उचित तरीके से संभालना समय की जरूरत है. 

उनके मुताबिक, ऐसा करके चीन और भारत अपने संबंधों के स्वस्थ और स्थिर विकास को आगे बढ़ा सकते हैं. भारत की ओर से अक्सर पाकिस्तान और चीन की करीबी साझेदारी को लेकर जताई जाने वाली चिंताओं पर भी बीजिंग ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि चीन, भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ संवाद बनाए रखने का पक्षधर है. 

लिन जियान ने कहा कि बीजिंग दोनों देशों को बातचीत और परामर्श के माध्यम से अपने मतभेदों का समाधान निकालने के लिए प्रोत्साहित करता है. उनका कहना था कि चीन क्षेत्र में शांति, स्थिरता और संतुलन बनाए रखने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाने का इच्छुक है. भारत, चीन और रूस के त्रिकोणीय संबंधों पर भी चीन ने सकारात्मक संकेत दिए. 

उन्होंने कहा कि तीनों देश उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं हैं और उनके बीच अच्छे संबंध न केवल उनके अपने राष्ट्रीय हितों के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वैश्विक शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए भी लाभकारी हैं. उन्होंने आगे कहा कि चीन, रूस और भारत के साथ संवाद बनाए रखने, त्रिपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा तैयार है.

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गौरतलब है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और चीन के रिश्तों को बेहद संवेदनशील और बहुआयामी बताया था. उन्होंने कहा था कि भारत और चीन के बीच संबंध एक नाजुक और कई स्तरों वाले रिश्ते हैं, जिनमें किसी बाहरी पक्ष का हस्तक्षेप उचित नहीं होगा. उन्होंने कहा था कि रूस अपने दोनों मित्र देशों के साथ लगातार संवाद रखता है. 

रूसी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भी प्रशंसा की थी. उन्होंने कहा था कि दोनों नेता आपसी हितों से जुड़े सभी मुद्दों को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं, जिनमें सीमा विवाद जैसे संवेदनशील विषय भी शामिल हैं. भारत और चीन के साथ रूस के संबंध दशकों पुराने हैं और दोनों रिश्ते अपनी-अपनी दिशा में विकसित हुए हैं. 

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