ब्राजील को डर सता रहा है कि कहीं अमेरिका उस पर हमला न कर दे. ब्राजील अमेरिका महाद्वीप का हिस्सा है, दोनों देशों के बीच संबंध भी ठीक ठाक रहे हैं लेकिन ब्राजील में लूला डा सिल्वा के राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप से उनके टकराव हुए हैं. ब्राजील BRICS का प्रमुख सदस्य है, इसलिए कई वैश्विक मुद्दों पर उसका दृष्टिकोण हमेशा अमेरिकी नीति से मेल नहीं खाता.
लेकिन ब्राजील का ताजा डर कुछ और है. हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने ब्राजील के दो सबसे बड़े आपराधिक गिरोहों प्राइमेरो कमांडो दा कैपिटल (पीसीसी) और कोमांडो वर्मेल्हो (सीवी) को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है. अमेरिका ने इन संगठनों को अल कायदा और ISIS की कैटेगरी में रख दिया है.
ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा ने संसद को लिखे पत्र में साफ चेतावनी दी है कि यह कदम देश की संप्रभुता के लिए ठोस खतरा पैदा कर रहा है. दरअसल अमेरिका के आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत यदि कोई गिरोह या समूह आतंकवादी करार दिया जाए तो अमेरिका दूसरे देशों में भी सैन्य कार्रवाई कर सकता है.
अमेरिका ने ब्राजील के दो संगठनों को अल कायदा की बराबरी में रखा
ब्राजील सरकार को आशंका है कि ड्रग तस्करी और अपराध के नाम पर अमेरिका ब्राजील के अंदर सैन्य ऑपरेशन चला सकता है, जैसे पहले दूसरे देशों में देखा गया है. राष्ट्रपति लुला दा सिल्वा की सरकार इसे अपने आंतरिक मामलों में दखल मान रही है.
CNN ब्राजील की मंगलवार की रिपोर्ट के मुताबिक विदेश मंत्री मौरो विएरा ने पिछले हफ़्ते ब्राज़ील की संसद को भेजे एक पत्र में यह चेतावनी दी. यह पत्र वाशिंगटन के उस फैसले के बारे में सांसदों के सवालों के जवाब में भेजा गया था, जिसमें 'प्रिमेइरो कमांडो दा कैपिटल' और 'कमांडो वर्मेल्हो' को आतंकवादी संगठन घोषित किया गया था.
अमेरिका ने 5 जून को इन गिरोहों को अपने 'विदेशी आतंकवादी संगठनों' (FTO) की सूची में शामिल किया और उन्हें अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट (ISIS) जैसे समूहों वाली कानूनी कैटेगरी में रखा.
ब्राजील में घुसकर ऑपरेशन कर सकता है अमेरिका
हालांकि अमेरिका ने इसे ट्रांसनेशनल क्राइम पर कार्रवाई के तौर पर पेश किया है, लेकिन ब्राजील को डर है कि इस कदम से US को अपने देश के बाहर बहुत ज़्यादा अधिकार मिल सकते हैं और घरेलू सुरक्षा का मुद्दा काउंटरटेररिज्म पॉलिसी का मामला बन सकता है.
सांसदों से बात करते हुए विएरा ने कहा कि वॉशिंगटन का गैंग्स को 'ट्रांसनेशनल क्रिमिनल ऑर्गनाइज़ेशन' कहना पहले से ही ऑर्गनाइज़्ड क्राइम से लड़ने में ब्राज़ील के साथ बड़े पैमाने पर सहयोग की इजाज़त देता है. इससे FTO लिस्टिंग की ज़रूरत नहीं पड़ती.
इस मामले में ब्राजील के विदेश मंत्री ने कहा, "इस तरह के फैसले में काफी हद तक अपनी मर्ज़ी से काम करने की गुंजाइश होती है. और इससे ब्राज़ील के नागरिकों पर वित्तीय, आव्रजन और आपराधिक मामलों में गंभीर असर पड़ सकता है. साथ ही इस बात की भी संभावना है कि अमेरिका ब्राजील की जमीन पर सैन्य बल का इस्तेमाल करे."
मंत्रालय ने आगे कहा कि इस दर्जे से संगठित अपराध से निपटने में अमेरिका-ब्राज़ील के सहयोग को "कोई ठोस फ़ायदा नहीं" होगा. विएरा ने ज़ोर देकर कहा कि अमेरिका ने एकतरफ़ा फ़ैसला लिया और ब्राजील को औपचारिक रूप से सूचित नहीं किया.
'सभी उपलब्ध साधनों' का करेंगे इस्तेमाल: रुबियो
9/11 के बाद राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकारी आदेश के तहत गठित FTO में किसी संगठन को डालने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी की जरूरत नहीं होती है.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मई में कहा था, "CV और PCC ब्राज़ील के सबसे हिंसक आपराधिक संगठनों में से दो हैं. इनका प्रभाव और गैर-कानूनी नेटवर्क ब्राज़ील की सीमाओं से बहुत आगे हमारे क्षेत्र और हमारे देश तक फैला हुआ है." उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन "हिंसक नार्को-आतंकवादियों" को रोकने के लिए "सभी उपलब्ध साधनों" का इस्तेमाल करेगा.
मार्को के बयान में "सभी उपलब्ध साधनों" के जिक्र ने ब्राजील की चिंता बढ़ा दी है.
ब्राजील की यह चेतावनी अमेरिकी कमांडो द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को उठाकर लाने के कुछ महीनों बाद आई है.
वाशिंगटन ने मादुरो पर नार्को-आतंकवाद, ड्रग तस्करी और हथियारों से जुड़े अपराधों का आरोप लगाया था. वेनेजुएला ने इस ऑपरेशन की निंदा करते हुए इसे सैन्य आक्रामकता की कार्रवाई बताया.
बाद में ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने मादुरो की गिरफ्तारी को 200 से ज़्यादा सालों की आज़ादी के बाद दक्षिण अमेरिका पर पहला सीधा अमेरिकी सैन्य हमला बताया और चेतावनी दी कि यही तरीका अब लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में भी फैल रहा है.