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TMC में वापस लौटे विधायक पीरजादा कासिम सिद्दीकी, दो महीने पहले ही बागी गुट में हुए थे शामिल

पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस दो धड़ों में बंट गई है, जिसमें कई बागी नेताओं ने अलग गुट बना लिया था. अब अमडांगा से टीएमसी विधायक कासिम सिद्दीकी ने बागी गुट छोड़कर पार्टी में वापसी का ऐलान किया है. सिद्दीकी ने कहा कि उन्हें धोखे में रखकर दस्तखत करवाए गए थे और बागी गुट में शामिल किया गया था.

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पीरजादा कासिम सिद्दीकी ने बागी गुट पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया. (Photo- FB/Kasem Siddiqui)
पीरजादा कासिम सिद्दीकी ने बागी गुट पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया. (Photo- FB/Kasem Siddiqui)

पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस दो धड़ों में बंट गई. पार्टी के कई बागी नेताओं ने अलग गुट बना लिया. इस बीच अमडांगा से टीएमसी विधायक 'पीरजादा' कासिम सिद्दीकी ने अपनी घर वापसी का ऐलान कर दिया है. 

बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी की अगुआई वाले गुट में शामिल होने के दो ही महीने बाद सिद्दीकी के सुर पूरी तरह बदल गए हैं. बागी खेमे से दूरी बनाते हुए सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि उन्हें धोखे में रखकर दस्तखत करवाए गए थे.

सिद्दीकी का दावा है कि उन्हें बताया गया था कि बागी कैंप भी ममता बनर्जी के नेतृत्व में काम करेगा, लेकिन आखिरकार उन्हें पता चला कि ममता बनर्जी का कोई जिक्र ही नहीं था. इसी वजह से उन्होंने अपने फैसले पर दोबारा सोचा और 'घर वापसी' का फैसला लिया.

'दीदी के पास रहेंगे तो एक साथ रहेंगे'

कासिम सिद्दीकी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'हमको कहा गया था कि आप साइन कीजिये, ये साइन दीदी के पास जाएगा. हमने बोला था कि हम लोग एक साथ रहेंगे. जब दीदी के पास रहेंगे तो एक साथ रहेंगे. जब उनके पास जाते हैं तो दीदी का कोई गलत विचार नहीं होता है, वही सब कुछ हैं.'

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सिद्दीकी ने आगे कहा, 'हम दीदी को पहचानते हैं. दीदी ने हमको चुनाव मैदान में भेजा था और दीदी की फोटो लेकर ही हमने लोगों से वोट मांगा था. लोगों ने भी दीदी को देख कर ही हमको वोट दिया है. हम दीदी के पास हैं और जब तक हैं, दीदी के साथ ही रहेंगे.'

फुरफुरा शरीफ से ताल्लुक, महासचिव भी रहे

कासिम सिद्दीकी हुगली जिले के प्रसिद्ध मुस्लिम धार्मिक स्थल 'फुरफुरा शरीफ' परिवार से आते हैं. मुस्लिम समुदाय के बीच उनकी मजबूत पकड़ और सामाजिक रसूख को देखते हुए ही तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने उन्हें पार्टी में शामिल कराया था. 

टीएमसी में शामिल होते ही उन्हें पार्टी का प्रदेश महासचिव बनाया गया था. इसके बाद पार्टी ने उन्हें उत्तर 24 परगना जिले की अमडांगा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, जहां से वो जीतकर विधायक बने.

यह भी पढ़ें: TMC को झटका... ED ने टीएमसी की 440 करोड़ की संपत्ति फ्रीज की

20 बागी सांसदों की अयोग्यता वाली याचिका पर सुनवाई

दूसरी तरफ TMC ने अपने 20 बागी सांसदों की अयोग्यता पर फैसला लेने में हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. पार्टी ने अभिषेक बनर्जी के जरिए याचिका दायर की है जिसमें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के फैसले में की जा रही देरी को चुनौती दी गई है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की बेंच टीएमसी की इस याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करने के लिए तैयार हो गई है.

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