यूपी चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी अपनी बिसात बिछाने लगे हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछले कुछ दिनों से एक बार फिर अपने हार्ड हिंदुत्व वाले मोड में नजर आ रहे हैं. तो वहीं, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव 'सॉफ्ट हिंदुत्व' के सहारे पलटवार की रणनीति पर काम कर रहे हैं. फिर बात चाहे इटावा में केदारेश्वर मंदिर बनवाने की हो या फिर रामचरितमानस बंटवाने की. साथ ही सपा धार्मिक मुद्दों पर आक्रामकता से बचती नजर आ रही है और तो और पार्टी नेताओं द्वारा की जाने वाली किसी भी विवादित धार्मिक या जातीय टिप्पणी पर तुरंत उनकी क्लास लगाई जा रही है.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भले ही अभी आठ महीने से ज्यादा वक्त बचा हुआ है, लेकिन प्रदेश में राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है. सीएम योगी आदित्यनाथ पूरी तरह से चुनावी मोड में आ गए हैं. सीएम योगी आदित्यनाथ ने पिछले दो दिनों में दो ऐसे बयान दिए हैं, जिसने प्रदेश की राजनीति में बड़ी हलचल मचा दी है.
योगी ने एक दिन पहले गौमाता को लेकर बड़ा बयान दिया था. उन्होंने गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने का ज्ञापन देने वाले मौलानाओं को अपने ही अंदाज में समझाया. बकरीद के दौरान सोशल मीडिया पर गौमाता की फोटो पोस्ट करने वालों को भी सीधे-सीधे कड़ा संदेश दे दिया. वहीं, मंगलवार को कुशीनगर से उन्होंने समाजवादी पार्टी को एक बार फिर रामद्रोही कहकर हमला बोला.
सीएम योगी आदित्यनाथ ने हालिया विधानसभा चुनावों में अपने भाषणों के जरिए संबंधित राज्यों से लेकर यूपी तक की जनता को सीधा संदेश दिया है. इससे साफ है कि यूपी चुनाव 2027 में सीएम योगी अपने पुराने ही अवतार में उतरेंगे. विकास योजनाओं पर भी बात होगी, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव से सबक लेते हुए वोटरों को एकजुट कर बूथ तक पहुंचाने के लिए भी प्रयास पूरे होंगे. ऐसे में सीएम योगी ने जनमानस को छूने वाले मुद्दों पर बहस शुरू कर दी है. इसके पीछे की वजह लोगों तक अपनी बातों को पूरी तरह पहुंचाना माना जा रहा है.
CM योगी का हार्ड हिंदुत्व
सीएम योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कुशीनगर की जनसभा में पाकिस्तान से लेकर समाजवादी पार्टी के रामद्रोही होने तक के मुद्दे को छेड़ा. पुलवामा हमले और उसके बाद लखनऊ में बने ब्रह्मोस मिसाइल से दुश्मन देश को थर्राने के मुद्दे को सीएम योगी छेड़ते दिखे.
वहीं, राम मंदिर का मुद्दा भी सीएम ने जोरदार तरीके से छेड़ा. मुख्यमंत्री ने कहा कि 498 वर्ष पहले राम मंदिर को तोड़ा गया. वर्ष दर वर्ष बीतते गए. आजादी के बाद भी कई दशक बीत गए, कई पीढ़ियां खप गई, कई युग बीत गए और लोग मंदिर के लिए लड़ते रहे.
सीएम योगी ने कहा कि भगवान राम में पूरे देश की भावनाएं जुड़ी थी, लेकिन अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के कार्यक्रम को गति तब मिल पाई, जब डबल इंजन की भाजपा की सरकार बन पाई.
सीएम ने कहा कि कांग्रेस आजादी के बाद ही इसको बनवा सकती थी, लेकिन कांग्रेस ने नहीं बनने दिया. समाजवादी पार्टी घोषित रामद्रोही है. वह राम मंदिर नहीं बनने देना चाहती थी. ये लोग लगातार बाधा पैदा कर रहे थे.
सीएम योगी ने कुशीनगर की जनसभा में भाजपा के नारे और लोगों के संकल्प का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि राम भक्तों ने उद्घोष किया था, रामलला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे. आज अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर का निर्माण हो गया है. अब कोई भी अयोध्या जाएगा और आज से 10 वर्ष पहले के अयोध्या को याद करेगा तो वह पहचान नहीं पाएगा. अयोध्या में कितना परिवर्तन हो गया है, ये देखा जा सकता है. आधुनिक अयोध्या त्रेता युग का स्मरण कराती है. वहां जाकर महसूस करेंगे कि भगवान राम का आशीर्वाद आपको प्राप्त हो रहा है. ये भाजपा की सरकार में ही संभव हो सका है.
सपा का सॉफ्ट हिंदुत्व
उधर समाजवादी पार्टी ने सॉफ्ट हिंदुत्व के जरिए बीजेपी की रणनीति को तोड़ने का प्रयास किया है. अखिलेश यादव कई मंदिरों में जाते दिखे हैं. इसके अलावा इटावा में केदारेश्वर मंदिर के निर्माण की बात करते दिखे हैं.
बंगाल के नतीजों से सबक
वहीं, हाल के समय में मुस्लिमों से जुड़े मुद्दों में उन्होंने उस प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं दी. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की हार के बाद अखिलेश यादव रणनीति बदलते दिख रहे हैं. भाजपा ने बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को एक वर्ग विशेष की पार्टी की बात लगातार कहा. इस प्रकार की स्थिति यूपी में न बने, इसके लिए अखिलेश यादव फूंक-फूंक कदम उठा रहे हैं.
सीएम योगी ने विपक्ष की बदली रणनीति को अपने तेवर कड़े कर लिए हैं. कानून-व्यवस्था और हिंदुत्व के मुद्दों को उन्होंने अपने भाषणों में जगह दे दी है. भीषण गर्मी के बाद भी जनसभाओं में उमड़ती भीड़ सीएम योगी के बयानों पर उठते समर्थन के सुर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे मुद्दें छोटे साबित होते दिख रहे हैं.
हालांकि, ये सॉफ्ट हिंदुत्व वाला दांव ममता बनर्जी बंगाल में चल चुकी हैं. लेकिन ये कारगर नहीं हुआ. अब देखना है कि क्या अखिलेश का PDA और सॉफ्ट हिंदुत्व वाला दांव चुनाव में असर दिखाता है या नहीं.