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नंदी का साथ और 800 KM की पैदल यात्रा... हरियाणा के अनोखे शिवभक्त कांवड़िये की कहानी

सावन महीने में लाखों कांवड़िए हरिद्वार से गंगाजल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने निकलते हैं. इस बार सहारनपुर में एक ऐसी कांवड़ चर्चा का विषय बनी, जिसने हर किसी को ठहरकर देखने पर मजबूर कर दिया. हरियाणा के एक शिवभक्त ने भगवान शिव के प्रिय वाहन नंदी को ही कांवड़ का स्वरूप दिया और करीब 800 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकल पड़े.

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नंदी के साथ निकले हैं हरियाणा के रोशन लाल. (Photo: Screengrab)
नंदी के साथ निकले हैं हरियाणा के रोशन लाल. (Photo: Screengrab)

सावन महीना आते ही कांवड़ मार्ग भगवा रंग में रंग जाते हैं. लाखों कांवड़िए गंगाजल लेने निकलते हैं. कोई अपनी कांवड़ को फूलों से सजाता है, कोई उस पर डीजे लगाता है, तो कोई उसे किसी भव्य मंदिर की शक्ल देता है. इस बार हरिद्वार और सहारनपुर के रास्तों पर एक ऐसी कांवड़ दिखाई दी, जिसे देखकर लोग सिर्फ तस्वीरें नहीं खींच रहे, बल्कि हाथ जोड़कर 'हर-हर महादेव' बोल रहे हैं.

इस कांवड़ में भगवान शिव के प्रिय वाहन नंदी हैं. हरियाणा के रहने वाले रोशन लाल ने इस बार अपनी कांवड़ को नंदी का स्वरूप दिया है. उनका कहना है कि अगर भोलेनाथ को प्रसन्न करना है, तो सबसे पहले उनके सबसे प्रिय गण और वाहन नंदी की सेवा करनी चाहिए. शिव तक पहुंचने का रास्ता नंदी से होकर जाता है, इसलिए इस बार उन्होंने नंदी को ही अपनी यात्रा का केंद्र बना लिया.

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रोशन लाल अपने परिवार और बच्चों के साथ हरिद्वार पहुंचे. उन्होंने सबसे पहले गंगाजल नहीं भरा. उन्होंने पहले नंदी को गंगा स्नान कराया. श्रद्धा के साथ पूजा की और फिर भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर अपनी करीब 800 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा शुरू की. यह नजारा देखने के लिए घाट पर मौजूद श्रद्धालु भी रुक गए. कई लोगों ने नंदी के दर्शन किए, तो कई मोबाइल निकालकर तस्वीरें और वीडियो बनाने लगे.

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यह भी पढ़ें: 'किसी कांवड़िए का जल न गिरे', इसलिए कांवड़ यात्रा के बीच मस्जिद पर डाले गए पर्दे, बच्चों की सुरक्षा के लिए लिया फैसला

रोशन लाल की यह अनोखी कांवड़ अब रास्ते भर आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. जहां-जहां यह गुजरती है, लोग कुछ देर के लिए ठहर जाते हैं. कोई नंदी के चरण छूता है, कोई प्रणाम करता है, तो कोई पूछता है कि आखिर इस अनोखे विचार की शुरुआत कैसे हुई. रोशन लाल मुस्कुराकर एक ही बात कहते हैं कि नंदी के बिना शिव की पूजा अधूरी है.

रोशन लाल बताते हैं कि उनकी आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है. लेकिन भक्ति के रास्ते में उन्होंने कभी पैसों को रुकावट नहीं बनने दिया. उनका मानना है कि अगर नीयत साफ हो और श्रद्धा सच्ची हो, तो भोलेनाथ खुद रास्ते बना देते हैं. रोशन लाल की यात्रा सिर्फ कांवड़ लेकर जल चढ़ाने तक सीमित नहीं है. उनका एक बड़ा सपना भी है. वह चाहते हैं कि भविष्य में भगवान शिव और नंदी का एक मंदिर बनवाएं, जहां नंदी को स्थायी स्थान मिले और लोग उनकी पूजा कर सकें.

वह कहते हैं कि अगर पूरी जिंदगी साधारण तरीके से भी गुजारनी पड़े, तब भी उन्हें कोई अफसोस नहीं होगा. लेकिन शिव और नंदी की सेवा कभी नहीं छोड़ेंगे. लोगों ने कहा कि आज जब कांवड़ यात्रा में भव्य सजावट, ऊंची-ऊंची कांवड़ और आधुनिक तकनीक चर्चा का विषय बन जाती हैं, तब रोशन लाल की यह यात्रा एक अलग संदेश देती है.

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