उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में प्रधानाचार्य के पद पर तैनात सुनैना गौड़ को बेसिक शिक्षा अधिकारी ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामले में सेवा से बर्खास्त कर दिया है. उसका ब्लॉक क्षेत्र स्थित प्राथमिक विद्यालय उटिया की शिक्षिका ने 30 जुलाई 2010 को फर्जी एसटी प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी हासिल की थी, जिसे जिलाधिकारी की समिति ने जुलाई 2026 में निरस्त कर दिया था. हाईकोर्ट से राहत न मिलने पर बीएसए शैलेश कुमार ने नियुक्ति तिथि से अब तक मिले संपूर्ण वेतन की रिकवरी और खंड शिक्षा अधिकारी को शिक्षिका के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का सख्त आदेश दिया है.
फर्जी प्रमाण पत्र का हुआ खुलासा
जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ कि बर्खास्त शिक्षिका सुनैना गौड़ मूल रूप से अन्य जाति से ताल्लुक रखती हैं और उत्तर प्रदेश में इनकी जाति ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी में आती है. इसके बावजूद उन्होंने अनुसूचित जनजाति (ST) का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर शिक्षा विभाग में सरकारी नौकरी हासिल कर ली थी. एक शिकायत के आधार पर यह पूरा मामला संज्ञान में आया था, जिसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर इसकी आधिकारिक जांच कराई गई और प्रमाण पत्र के फर्जी होने की पुष्टि हुई.
हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, वेतन रिकवरी और एफआईआर
जांच रिपोर्ट आने के बाद जिलाधिकारी की समिति ने जुलाई 2026 में इस फर्जी प्रमाण पत्र को आधिकारिक तौर पर निरस्त कर दिया था. इस कार्रवाई के खिलाफ शिक्षिका सुनैना गौड़ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील भी की थी, लेकिन अदालत से उन्हें किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिल सकी.
इसके बाद बीएसए शैलेश कुमार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उनकी सेवा समाप्त कर दी. साथ ही, 30 जुलाई 2010 से लेकर अब तक विभाग द्वारा दिए गए संपूर्ण वेतन की रिकवरी करने और खंड शिक्षा अधिकारी को एफआईआर दर्ज कराने के कड़े निर्देश जारी किए हैं.