करवा चौथ पर हाथों में मेहंदी, नए कपड़े, चूड़ियां, सजी हुई पूजा की थाली और रात में चांद का इंतजार. त्योहार की ये तस्वीर उत्तर भारत के घरों में आम है. लेकिन सात समंदर पार ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली एक बेटी जब करवा चौथ मनाने भारत पहुंची, तो इस त्योहार की एक और तस्वीर सामने आई. दूरी भले ही हजारों किलोमीटर की हो, लेकिन परंपराओं से जुड़ाव अब भी कायम है. खास बात ये है कि बेटी के साथ उसकी सास भी करवा चौथ मनाने आई हैं.
यह कहानी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की है. यहां करवा चौथ को लेकर बाजारों से लेकर ब्यूटी पार्लर तक रौनक है. महिलाएं मेहंदी लगवा रही हैं, मेकअप करा रही हैं और अपने कपड़ों के साथ मैचिंग चूड़ियां और ज्वेलरी तैयार कर रही हैं. मेकअप आर्टिस्ट पूनम बाली ने बताया कि उनकी बेटी ऑस्ट्रेलिया में रहती है और वह करवा चौथ मनाने भारत आई है. बेटी के साथ उसकी सास सुमाता भी आई हैं.
पूनम के लिए यह सिर्फ त्योहार की तैयारी नहीं, बल्कि परिवार के लोगों का एक साथ आना और परंपरा से जुड़े रहना भी है. विदेश में रहने के बावजूद करवा चौथ मनाने के लिए भारत आना बताता है कि कुछ त्योहारों का रिश्ता सिर्फ कैलेंडर की तारीख से नहीं, बल्कि परिवार और भावनाओं से भी होता है.

ऑस्ट्रेलिया से भारत तक, करवा चौथ के लिए जुटा परिवार
आज बहुत से परिवारों के सदस्य पढ़ाई, नौकरी या कारोबार के लिए विदेश में रहते हैं. ऐसे में त्योहारों पर सबका एक साथ होना हमेशा आसान नहीं होता. समय, दूरी और काम की जिम्मेदारियों के बीच कई बार त्योहार फोन कॉल या वीडियो कॉल पर ही मनाने पड़ते हैं. पूनम ने बताया कि उन्हें अच्छा लग रहा है कि विदेश में रहने के बावजूद उनकी बेटी भारतीय परंपरा से जुड़ी हुई है. उनके मुताबिक, बाहर रहने वाले लोगों का भी भारतीय त्योहारों को मनाने के लिए उत्साहित होना अच्छा लगता है.
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सहारनपुर में करवा चौथ के लिए महिलाएं तैयारियों में लगी नजर आईं. किसी को नए कपड़े खरीदने हैं, किसी को ज्वेलरी और चूड़ियां मैच करनी हैं, तो कोई मेहंदी और मेकअप के लिए सैलून पहुंच रही है. यहां के कई पार्लरों में पिछले एक सप्ताह से काफी भीड़ है. मेकअप आर्टिस्ट पूनम बाली कहती हैं कि महिलाएं आम तौर पर त्योहार से 10 से 15 दिन पहले ही अपनी तैयारी शुरू कर देती हैं. पहले कपड़े तैयार होते हैं, फिर उनके साथ मैचिंग एक्सेसरीज और चूड़ियां खरीदी जाती हैं.

इसके बाद मेकअप और मेहंदी की बारी आती है. इस बार फेशियल के मामले में भी एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है. पूनम के मुताबिक, पिछले साल हाइड्रा फेशियल की मांग ज्यादा थी, लेकिन इस बार कोरियन फेशियल को महिलाएं पसंद कर रही हैं. अलग-अलग ब्रांड और क्वालिटी के फेशियल की मांग है. इसके साथ पूजा की थाली सजाने और चांद देखने के लिए खास छलनी खरीदने का भी उत्साह है.
पहली बार करवा चौथ मनाने वाली महक उत्साहित भी, थोड़ी नर्वस भी
सैलून में आई महक के लिए इस बार का करवा चौथ खास है, क्योंकि वह पहली बार यह त्योहार मना रही हैं. उन्होंने बताया कि वह इसे लेकर काफी उत्साहित हैं, लेकिन मन में थोड़ी घबराहट भी है. महक के मुताबिक, उनकी तैयारियां करीब एक महीने पहले शुरू हो गई थीं. पहली बार त्योहार मनाने वालों के लिए हर चीज नई होती है. क्या पहनना है, किस तरह तैयार होना है और पूजा की तैयारी कैसे करनी है, इन सबके बीच उत्साह के साथ थोड़ी घबराहट होना भी स्वाभाविक है.

करवा चौथ का उत्साह सिर्फ पहली बार त्योहार मनाने वाली महिलाओं तक सीमित नहीं है. सहारनपुर में रहने वाली रश्मि ग्रोवर की शादी को 27 साल हो चुके हैं, लेकिन उनका कहना है कि त्योहार को लेकर उनका उत्साह आज भी पहले जैसा है. रश्मि ने बताया कि वह कम से कम 18 बार इसी लग्जरी सैलून में मेहंदी लगवा चुकी हैं और आज भी यहीं आना पसंद करती हैं. उनके मुताबिक, करवा चौथ पर नए कपड़े खरीदना और नई ज्वेलरी पहनना हर साल खास लगता है. वह बताती हैं कि अपने कपड़ों की तैयारी के लिए करीब एक महीने पहले से जुट जाती हैं और हर साल कम से कम चार जोड़े तैयार करवाती हैं.
रश्मि ने एक दिलचस्प बात भी कही. उनके मुताबिक, शादी के शुरुआती दिनों में घर के दूसरे लोग, खासकर सास, बहू को सजाने-संवारने और उसकी तैयारी को लेकर उत्साहित रहते हैं. लेकिन समय के साथ महिलाएं खुद अपने लिए तैयारी करने लगती हैं. यानी त्योहार का उत्साह रहता है, बस उसे मनाने का तरीका बदल सकता है.
उनका कहना है कि उम्र को इस उत्साह के बीच नहीं आना चाहिए. नए कपड़े पहनने, मेहंदी लगवाने और त्योहार का आनंद लेने का शौक हर साल बना रह सकता है. सहारनपुर में करवा चौथ की तैयारियों में एक तरफ नए ब्यूटी ट्रेंड हैं, तो दूसरी तरफ पुरानी परंपराएं भी हैं. कोरियन फेशियल की बढ़ती मांग हो या सजाई गई पूजा की थाली और खास छलनी, महिलाएं त्योहार को अपने तरीके से खास बनाने में जुटी हैं.