बारिश ने घर उजाड़े, गृहस्थी का सामान डुबो दिया और परिवारों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा कर दिया. ऐसे मुश्किल वक्त में ग्रामीणों को उम्मीद थी कि सरकारी टीम उनके नुकसान का सर्वे करेगी और नियम के मुताबिक मुआवजा दिलाएगी. लेकिन उत्तर प्रदेश के बांदा में इसी सर्वे के दौरान ऐसा मामला सामने आया, जिसने प्रशासन को भी कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया.
अतर्रा तहसील के बल्लान गांव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. वीडियो में ग्रामीण एक लेखपाल से कथित तौर पर लिए गए पैसे वापस करने की बात कहते नजर आ रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि उनसे कहा गया कि जो पैसा देगा, उसकी सही रिपोर्ट लगाई जाएगी और तभी उसे सरकारी मदद का लाभ मिल सकेगा. मामला अधिकारियों तक पहुंचा तो प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया. जांच कराई गई और अतर्रा तहसील में तैनात लेखपाल संध्या सिंह को निलंबित कर दिया गया. अधिकारियों के मुताबिक, मामले की विभागीय जांच भी जारी है. सबसे खास बात यह रही कि मौके पर ग्रामीणों के विरोध के बाद कथित तौर पर लिया गया पैसा वापस कर दिया गया.
बारिश ने छीना घर, अब मुआवजे की रिपोर्ट पर उठे सवाल
दरअसल, पिछले दिनों हुई भारी बारिश के चलते बांदा के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी. बल्लान गांव में भी कई घरों के गिरने और घरों में पानी भरने से ग्रामीणों को नुकसान हुआ. किसी की गृहस्थी का सामान पानी में डूब गया तो किसी के घर को नुकसान पहुंचा. ऐसे लोगों को सरकारी सहायता उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन की ओर से सर्वे कराया जा रहा है. डीएम के निर्देश पर लेखपालों को गांवों में जाकर नुकसान का आकलन करने और रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी. इसी रिपोर्ट के आधार पर पात्र लोगों को सरकारी सहायता और मुआवजा मिलना था. यही वह प्रक्रिया थी, जिसमें कथित वसूली का मामला सामने आया.
लेखपाल और मुंशी गांव पहुंचे, फिर मचा बवाल
वायरल वीडियो और ग्रामीणों के मुताबिक, लेखपाल संध्या सिंह अपने मुंशी के साथ बल्लान गांव पहुंची थीं. ग्रामीणों का आरोप है कि सर्वे और रिपोर्ट तैयार करने के दौरान उनसे पैसे की मांग की गई. कथित तौर पर कहा गया कि जो पैसा देगा, उसकी सही रिपोर्ट लगाई जाएगी और उसे सरकारी लाभ मिल सकेगा. शुरुआत में कुछ ग्रामीणों ने कथित तौर पर पैसे भी दे दिए. लेकिन इसके बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. ग्रामीणों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि जिन लोगों के घर बारिश में बर्बाद हो गए, उनसे ही सरकारी मदद की रिपोर्ट के लिए पैसे क्यों लिए जा रहे हैं. इसी दौरान किसी ग्रामीण ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया. वीडियो में ग्रामीण पैसे वापस करने और वहां से चले जाने की बात कहते सुनाई दे रहे हैं. विरोध बढ़ने के बाद कथित तौर पर लिए गए पैसे वापस किए गए और लेखपाल वहां से चली गईं.
वीडियो वायरल हुआ तो अधिकारियों तक पहुंचा मामला
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की. वीडियो सामने आने के बाद अधिकारियों ने भी मामले को संज्ञान में लिया. प्रशासन ने तहसीलदार के स्तर से जांच कराई. जांच के दौरान लेखपाल संध्या सिंह का नाम सामने आने के बाद उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया. अब विभागीय स्तर पर भी पूरे मामले की जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कठोर कार्रवाई की जाएगी.
SDM बोले- लेनदेन की बात सामने आई, तुरंत किया सस्पेंड
अतर्रा के एसडीएम शैलेन्द्र कुमार मिश्र ने आजतक को बताया कि भारी बारिश और जलभराव से प्रभावित गांवों में नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इसी दौरान एक वीडियो संज्ञान में आया, जिसमें लेनदेन से जुड़ी बात सामने आई. मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की गई और लेखपाल संध्या सिंह को निलंबित कर दिया गया. एसडीएम के मुताबिक, वीडियो को आधार बनाकर मामले की जांच नायब तहसीलदार से कराई जा रही है. जांच पूरी होने के बाद आगे कठोर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि आपदा की स्थिति में आम लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए और सभी कर्मचारियों को सरकारी नियमों का पालन करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं.
पीड़ितों की मदद के बजाय वसूली मिली तो एक्शन होगा
प्रशासन ने इस घटना के बाद सर्वे में लगे कर्मचारियों को सख्त चेतावनी भी दी है. अधिकारियों का कहना है कि बारिश और जलभराव से प्रभावित लोगों की मदद करना प्राथमिकता है. ऐसे समय में अगर कोई कर्मचारी पीड़ितों से अवैध वसूली करता पाया जाता है या ऐसी शिकायत सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. एसडीएम ने साफ कहा कि किसी भी कर्मचारी को आपदा की स्थिति का फायदा उठाकर आम लोगों को परेशान करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
अब जांच में सामने आएगा पूरा सच
फिलहाल वायरल वीडियो के आधार पर प्रशासन ने कार्रवाई तो कर दी है, लेकिन मामले की विभागीय जांच अभी जारी है. जांच में यह देखा जाएगा कि कथित तौर पर कितने पैसे लिए गए, किन लोगों से लिए गए और क्या यह केवल एक घटना थी या इससे पहले भी ग्रामीणों से इसी तरह पैसे लिए गए थे. ग्रामीणों के आरोपों की भी जांच की जा रही है. जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पूरे मामले में कौन-कौन लोग शामिल थे और कथित लेनदेन किस स्तर तक हुआ.