ये कहानी कानपुर देहात के जसवापुर गांव की है. कुछ ग्रामीण नदी किनारे मछली पकड़ रहे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि जाल में मछली नहीं, बल्कि ऐसा सामान फंसने वाला है, जिसे देखकर पूरे इलाके में हड़कंप मच जाएगा. गांव के लोगों को नदी के पास पानी में एक भारी-भरकम लोहे की चीज दिखाई दी.
पहले तो किसी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब उसे गौर से देखा गया तो मामला थोड़ा अलग लगा. आकार ऐसा था कि लोगों ने अंदाजा लगाना शुरू कर दिया- कहीं ये मिसाइल तो नहीं? कोई इसे सेना का बम बता रहा था, तो कोई किसी पुराने युद्ध का गोला.
देखते ही देखते खबर पूरे गांव में फैल गई. गांव में वैसे भी कोई असामान्य चीज मिल जाए तो लोग उसे देखने जरूर पहुंचते हैं. यहां भी यही हुआ. कुछ ही देर में मौके पर लोगों की भीड़ लग गई. हर किसी के पास अपनी थ्योरी थी और हर कोई उस रहस्यमयी वस्तु को करीब से देखना चाहता था. लेकिन इसी बीच एक ऐसी घटना हुई, जिसने पुलिस वालों की धड़कनें बढ़ा दीं.
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प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक स्थानीय युवक ने उस वस्तु को खिलौना या कबाड़ का सामान समझ लिया. वह उसे उठाकर वहां से चल पड़ा. कुछ लोगों का कहना है कि वह उसे लेकर दौड़ने भी लगा. अब सोचिए, अगर वह चीज सचमुच विस्फोटक निकली होती तो क्या हो सकता था.
मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों ने तुरंत युवक को रोका. उसे समझाया गया कि जिसके साथ वह खेल रहा है, वह कोई खिलौना नहीं, बल्कि संभावित रूप से बेहद खतरनाक चीज हो सकती है. इसके बाद पुलिस ने सावधानी के साथ उस चीज को अपने कब्जे में ले लिया. सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस हरकत में आ गई. नदी किनारे का इलाका घेर लिया गया. लोगों को दूर रहने की सलाह दी गई और अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया. मामला सामान्य नहीं था, इसलिए वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए.
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डीएसपी संजय सिंह और थाना प्रभारी सूर्य प्रताप सिंह ने मौके का जायजा लिया. शुरुआती जांच में अधिकारियों को भी यह चीज सेना में इस्तेमाल होने वाले मोर्टार शेल जैसी लगी. इसके बाद मामले को और गंभीरता से लिया गया.

झांसी से बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया. साथ ही फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी यानी एफएसएल की टीम को भी जांच के लिए भेजा गया. विशेषज्ञों ने मौके पर पहुंचकर उस चीज का निरीक्षण किया और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए उसे कब्जे में लिया.
आखिर यह मोर्टारनुमा चीज यहां पहुंची कैसे?
गांव वालों का कहना है कि यह चीज बहुत ज्यादा जंग लगी हुई नहीं थी. न ही ऐसा लग रहा था कि यह कई सालों से मिट्टी में दबी हुई हो. यही वजह है कि लोग तरह-तरह के सवाल उठा रहे हैं. क्या किसी ने इसे हाल ही में वहां फेंका? क्या यह कहीं और से बहकर आई? या फिर इसके पीछे कोई और कहानी है?
फिलहाल इन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है. पुलिस भी अभी किसी नतीजे पर पहुंचने से बच रही है. अधिकारियों का कहना है कि जब तक फॉरेंसिक और बम विशेषज्ञों की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक यह कहना मुश्किल होगा कि बरामद वस्तु सक्रिय थी या निष्क्रिय.
जसवापुर गांव के लोगों को शायद उम्मीद रही होगी कि घर लौटते समय उनके हाथ कुछ मछलियां लगेंगी. लेकिन यहां तो कहानी ही कुछ और निकली. नदी से ऐसा सामान निकला जिसने पूरे गांव, पुलिस प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को एक साथ सक्रिय कर दिया. फिलहाल मोर्टारनुमा वस्तु जांच एजेंसियों के पास है, रिपोर्ट का इंतजार है और गांव में चर्चा अब भी उसी 'बम' की हो रही है, जो कुछ देर के लिए एक युवक के हाथों में खिलौना बन गया था.