झांसी में 12 अगस्त की शाम एक गल्ला व्यापारी रोज की तरह मंडी से अपने घर के लिए निकला था. स्कूटी पर सवार व्यापारी को शायद अंदाजा भी नहीं था कि रास्ते में कोई उसका इंतजार कर रहा है. फिर बाइक आई. बदमाशों ने गोली चलाई. व्यापारी घायल हो गया और बदमाश लूट की कोशिश करने लगे. वारदात के बाद आरोपी फरार हो गए. पुलिस ने तलाश शुरू की. और अब इस कहानी में जो ट्विस्ट सामने आया है, वो चौंकाने वाला है.
व्यापारी की रेकी कोई बाहर का आदमी नहीं, बल्कि उसका अपना पल्लेदार कर रहा था. पुलिस के मुताबिक, पल्लेदार ने ही व्यापारी की लोकेशन अपने साथियों तक पहुंचाई थी। वजह? दोस्त के सिर पर लाखों का कर्ज था. कर्ज चुकाने के लिए पैसा चाहिए था और इसके लिए सेठ को लूटने की साजिश रची गई.
वारदात के करीब चार दिन बाद पुलिस ने चारों आरोपियों को घेर लिया. फिर गोलियां चलीं. चारों बदमाश घायल हो गए. इस दौरान एक गोली सीपरी बाजार थाना प्रभारी की बुलेटप्रूफ जैकेट में भी लगी. उनकी जान बाल-बाल बची.

अब पूरी कहानी समझिए. झांसी के नवाबाद थाना क्षेत्र की कैलाश रेजीडेंसी में रहने वाले प्रशांत गुप्ता गल्ला व्यापारी हैं. उनका काम भोजला मंडी से जुड़ा है. 12 अगस्त को भी रोज की तरह उन्होंने अपना काम खत्म किया और स्कूटी से घर के लिए निकल पड़े. लेकिन इस दिन उनकी हर गतिविधि पर किसी की नजर थी. पुलिस के मुताबिक, प्रशांत के यहां शिवम नाम का व्यक्ति पल्लेदारी करता था. शिवम को पता था कि सेठ कब मंडी आते हैं, कब निकलते हैं और किस रास्ते से घर जाते हैं.
यह भी पढ़ें: कानपुर: रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर के घर लूट... बड़े बेटे के साले ने रची थी साजिश... दो बदमाश मुठभेड़ में पकड़े गए
पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि शिवम का दोस्त सुरेंद्र कर्ज में डूबा था. कर्जदार उसे परेशान कर रहे थे और उसे किसी तरह पैसे का इंतजाम करना था. सुरेंद्र ने अपनी परेशानी शिवम को बताई. तभी शिवम ने उसे एक खतरनाक सलाह दे दी. पुलिस के मुताबिक शिवम ने कहा कि उसके सेठ के पास रोज पैसे रहते हैं.
अगर उसे लूट लिया जाए तो कर्ज चुकाने के लिए रकम मिल सकती है. यहीं से दोनों ने मिलकर साजिश की शुरुआत की. सुरेंद्र ने अपने सगे और चचेरे साले आकाश और प्रद्युम्न को भी साजिश में शामिल कर लिया. अब चार लोग थे और निशाने पर था एक गल्ला व्यापारी.
वारदात वाले दिन पल्लेदार ने क्या किया?
पुलिस के मुताबिक, वारदात वाले दिन शिवम व्यापारी के साथ काम पर नहीं गया. लेकिन वह भोजला मंडी में मौजूद रहा. उसका काम था सेठ की निगरानी करना. जैसे ही प्रशांत गुप्ता ने मंडी का काम खत्म किया और घर के लिए निकले, शिवम ने अपने साथियों को उनकी लोकेशन भेज दी.

इसके बाद सुरेंद्र अपने दोनों साथियों के साथ बाइक पर निकला. फिर हाईवे पर प्रशांत गुप्ता को निशाना बनाया गया. बदमाशों ने गोली मार दी. व्यापारी घायल हो गए. इसके बाद बदमाशों ने लूट की कोशिश की और मौके से फरार हो गए. घटना के बाद पुलिस ने केस की जांच शुरू की.
घटना के बाद पुलिस ने सीसीटीवी, सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों की तलाश शुरू की. पुलिस की दो टीमें लगातार काम कर रही थीं. फिर रात में पुलिस को खबर मिली कि व्यापारी पर हमला करने वाले बदमाश लकारा पुलिया के पास मौजूद हैं. अब पुलिस के सामने मौका था कि चारों को दबोचा जाए.
यह भी पढ़ें: पुलिस की गाड़ी, टायर पंचर और फायरिंग... क्यों सुजीत सिन्हा एनकाउंटर ने याद दिलाया विकास दुबे का मामला?
सीपरी बाजार थाना पुलिस और स्वाट टीम मौके पर पहुंची और बदमाशों की घेराबंदी शुरू कर दी. लेकिन पुलिस के मुताबिक, जैसे ही बदमाशों को पुलिस की मौजूदगी का पता चला, उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी. फिर मुठभेड़ शुरू हो गई.
पुलिस का कहना है कि बदमाशों ने कई राउंड फायर किए. अपने बचाव में पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की. मुठभेड़ में चारों बदमाशों को गोली लगी. पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया. घायल बदमाशों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज ले जाया गया. इस मुठभेड़ में पुलिस टीम भी बाल-बाल बच गई.

एक गोली सीपरी बाजार थाना प्रभारी जय प्रकाश चौबे की बुलेटप्रूफ जैकेट में लगी. पुलिस ने आरोपियों के पास से चार तमंचे, कारतूस और एक बाइक बरामद की है. पुलिस के मुताबिक, चारों मध्य प्रदेश के दतिया के रहने वाले हैं. अब जांच इस बात की भी हो रही है कि क्या इस साजिश में इन चारों के अलावा कोई और व्यक्ति शामिल था.
नगर पुलिस अधीक्षक प्रीति सिंह के मुताबिक, 12 अगस्त को गल्ला व्यापारी प्रशांत गुप्ता को गोली मारकर घायल किया गया था. इसके बाद पुलिस की टीमें आरोपियों की तलाश में लगी थीं. लकारा पुलिया के पास बदमाशों की मौजूदगी की सूचना मिली. पुलिस टीम ने घेराबंदी की तो बदमाशों ने फायरिंग कर दी. जवाबी कार्रवाई में चारों घायल हो गए. पूछताछ में यह भी सामने आया कि शिवम व्यापारी के यहां पल्लेदारी करता था और उसी ने अपने दोस्त सुरेंद्र को व्यापारी को लूटने का आइडिया दिया था.
पुलिस अधीक्षक के अनुसार, पूछताछ में पता चला कि शिवम कुशवाहा के दोस्त सुरेंद्र कुशवाहा पर कर्ज था, जिसे चुकाने के लिए पैसों की जरूरत थी. इनकी जब आपस में बात हुई तो शिवम ने बताया कि उसके सेठ के पास रोज पैसा रहता है, अगर उसे लूट लो तो तुम्हारा काम चल सकता है. इसके बाद बाद सुरेंद्र ने अपने साले को शामिल कर घटना को अंजाम दिया था.