समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी के मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को आयकर विभाग का नोटिस जारी हुआ है. इसमें चैरिटेबल ट्रस्ट होने के नाते जौहर ट्रस्ट को दी गई आयकर छूट को निरस्त किए जाने को लेकर जवाब मांगा गया है. आरोप है कि आजम खान ने जौहर ट्रस्ट के नाम पर सरकारी जमीन और सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया. चैरिटी के नाम पर बनाए गए ट्रस्ट को निजी व पारिवारिक ट्रस्ट बना डाला. मंत्री रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया, सरकारी धन को जौहर यूनिवर्सिटी में लगाया.

आजम खान के जौहर ट्रस्ट में गड़बड़ी की शिकायत करने वाले आकाश सक्सेना ने आयकर विभाग के नोटिस को लेकर कहा कि शिकायतें तो बहुत हैं, जो पहले से की जा चुकी थीं. उन्हीं शिकायतों को लेकर कई बार इनकम टैक्स की तरफ से नोटिस भी जारी हुए, लेकिन इन लोगों ने कभी किसी नोटिस का संज्ञान नहीं लिया. कभी किसी नोटिस का जवाब नहीं दिया गया.
यह भी पढ़ें: सपा नेता आजम खान को दो साल की सजा, रामपुर कोर्ट ने सुनाया फैसला, अफसर से जूते साफ कराने के बयान का मामला
आज के समय में जो सबसे बड़ा घोटाला है, वो जौहर यूनिवर्सिटी का ट्रस्ट है. आजम खान के ट्रस्ट में एक व्यक्ति को छोड़ दें तो सारे सदस्य उनके परिवार के हैं. जैसे उनके दोनों बेटे हैं, उनकी पत्नी हैं, उनकी बहन हैं और इस तरीके के लोग हैं, जो पूरे तरीके से आजम खान के साथ हैं. यह ट्रस्ट नहीं है. यह एक तरीके से परिवार है, आपने हर चीज पूरी प्लानिंग के साथ बनाई है.
सरकारी पैसे का उपयोग आपने यह दिखाकर किया कि आप इस ट्रस्ट में सोशल वर्क की तरह काम करना चाहते हो, लेकिन जांच में सामने आया कि इस यूनिवर्सिटी का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ राजनीति के लिए किया गया. इस यूनिवर्सिटी में किसी तरीके का आज तक कोई सोशल वर्क या जो सरकार के नियम होते हैं, उनके आधार पर नहीं किया गया.

जौहर यूनिवर्सिटी में 350 एकड़ से ज्यादा जमीन है. यूनिवर्सिटी 560 एकड़ में है. 350 एकड़ से ज्यादा भूमि सरकारी है, जिसे हम कोर्ट में साबित कर चुके हैं. इसके अलावा मैक्सिमम यूनिवर्सिटी की जो बिल्डिंग है, लास्ट ईयर इनकम टैक्स ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा था कि यह सारी बिल्डिंग सरकारी पैसे से बनी है. आकाश सक्सेना ने कहा कि अगर नोटिस जारी होता है तो उसका जवाब देना चाहिए.

यह पूछे जाने पर कि इनकम टैक्स के नोटिस में मस्जिद को लेकर भी कोई जिक्र है? इस पर आकाश सक्सेना ने कहा कि कोई भी अगर शिक्षा संस्थान होता है तो वह शिक्षा का मंदिर होता है, उस मंदिर में वहां आप मस्जिद का निर्माण करते हैं, और वह मस्जिद कोई मामूली मस्जिद नहीं है. आप रामपुर में यह संदेश देते हैं कि यह मेरी मस्जिद और यह मस्जिद रामपुर की जामा मस्जिद से ऊंची है. जब वहां लोग नमाज पढ़ने जाते हैं तो आप उनको डंडों से पीठकर निकाल देते हैं.
आप कहते हैं कि मेरी मस्जिद है. सबसे बड़ी बात कि किसी भी शिक्षा संस्थान में अगर आपके अंदर बहुत ज्यादा धाम प्रतिष्ठा है तो गुरुद्वारा है, मंदिर है, मस्जिद है, आप सब बनाइये. आप सरकारी पैसे से वहां पर यह सब चीजें बनाकर किस तरीके का संदेश देना चाहते हैं. मुझे लगता है कि यह गलत है.