मुंबई में रेलवे पुलिस के एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) की करतूत ने सभी को चौंका दिया है. आरोपी मोहम्मद गाउस इब्राहिम खतीब को खुद को डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) बताकर कई लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के मुताबिक, वह पिछले करीब एक दशक से फर्जी पहचान के सहारे लोगों को अपना शिकार बना रहा था.
क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि आरोपी 'DCP Dr Raj Khatiba' के नाम से खुद को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताता था. इस फर्जी पहचान के जरिए वह लोगों को पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने, बड़े लोन मंजूर कराने और फंसी हुई रकम वापस दिलाने का भरोसा देता था. बदले में वह मोटी रकम वसूल करता था.
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपनी फर्जी पहचान को विश्वसनीय बनाने के लिए नकली पहचान पत्र तैयार कर रखे थे. इतना ही नहीं, उसने अपने साथ एक ऑर्डरली भी रखा था, ताकि लोगों को लगे कि वह वास्तव में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी है.
सोशल मीडिया से बनाई रसूखदार छवि
जांच में यह भी सामने आया कि मोहम्मद गाउस इब्राहिम खतीब सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय था. वह प्रभावशाली और चर्चित लोगों के साथ अपनी तस्वीरें और वीडियो पोस्ट करता था, जिससे उसकी छवि एक रसूखदार पुलिस अधिकारी जैसी दिखाई देती थी.
इसी प्रभाव का इस्तेमाल कर वह संभावित पीड़ितों का भरोसा जीतता था. इसके बाद वह नौकरी, लोन या बकाया भुगतान दिलाने का भरोसा देकर उनसे लाखों रुपये ऐंठ लेता था.
पुलिस का मानना है कि उसकी यह सुनियोजित रणनीति कई वर्षों तक सफल रही, क्योंकि वह खुद पुलिस विभाग में कार्यरत था और विभाग की कार्यप्रणाली तथा प्रोटोकॉल से अच्छी तरह परिचित था.
1.6 करोड़ के लोन के नाम पर 10 लाख ऐंठे, ऐसे खुला राज
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि आरोपी ने 1.6 करोड़ रुपये का कार लोन दिलाने के नाम पर उससे 10 लाख रुपये प्रोसेसिंग फीस के तौर पर ले लिए. काफी समय बीतने के बावजूद जब लोन नहीं मिला तो पीड़ित मुंबई पुलिस मुख्यालय पहुंचा.
पुलिस जांच में पता चला कि मुंबई पुलिस में 'डॉ. राज खतीबा' नाम का कोई DCP है ही नहीं. इसके बाद क्राइम ब्रांच यूनिट-3 ने जाल बिछाया और आरोपी को 48 लाख रुपये के एक फर्जी सौदे के बहाने अंधेरी के एक होटल में बुलाया.
जैसे ही आरोपी होटल पहुंचा, पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उसके खिलाफ कई अहम जानकारियां सामने आईं.
पहले ACP बनता था, अब DCP बनकर करता था ठगी
पुलिस के मुताबिक, आरोपी वर्ष 2015-16 के दौरान खुद को असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) बताकर लोगों को गुमराह करता था. बाद में उसने खुद को DCP बताना शुरू कर दिया और उसी पहचान के जरिए कथित तौर पर ठगी करता रहा.
पुलिस ने बताया कि आरोपी पहले से ही एक अन्य धोखाधड़ी के मामले में भी गिरफ्तार है. उस मामले में उसने एक युवक से पुलिस में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 12 लाख रुपये ले लिए थे.
अब तक जांच में चार ऐसे मामलों की पहचान हुई है, जिनमें आरोपी ने कुल 48 लाख रुपये की ठगी की है. पुलिस का मानना है कि आने वाले दिनों में और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं. फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और उसके पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है.