ग्रेटर नोएडा में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक शाखा में 10.24 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार को इस मामले में बैंक की एक महिला कर्मचारी और एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि बैंक के ग्राहकों के खातों से बिना अनुमति पैसे निकाले गए और इस रकम की हेराफेरी की गई. सीबीआई के मुताबिक, यह कथित धोखाधड़ी पिछले तीन वर्षों से चल रही थी.
सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार महिला कर्मचारी की पहचान दीपाली नहीं, बल्कि दीपांशी के रूप में हुई है, जो ग्रेटर नोएडा के पाई-1 सेक्टर स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में ऑफिस असिस्टेंट के पद पर तैनात थी. इस मामले में दूसरे आरोपी आशुतोष पाठक को महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार किया गया है.
सीबीआई ने 29 अक्टूबर को इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी. जांच एजेंसी का आरोप है कि दीपांशी ने आशुतोष पाठक और अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर बैंक के विभिन्न ग्राहकों के खातों से बिना अनुमति 10.24 करोड़ रुपये डेबिट किए.
एक महिला ग्राहक की शिकायत से खुला मामला
बैंक की ओर से सीबीआई को दी गई शिकायत के मुताबिक, इस कथित धोखाधड़ी का खुलासा 16 सितंबर को हुआ था. उस दिन एक महिला खाताधारक ने अपनी बैंक शाखा के प्रमुख से संपर्क किया और अपने खाते से हुए तीन संदिग्ध डेबिट ट्रांजैक्शन की जानकारी दी. इसके बाद बैंक ने मामले की आंतरिक जांच शुरू की.
जांच के दौरान सामने आया कि कई ग्राहकों के खातों से बिना अनुमति पैसे निकाले गए थे. बैंक के मुताबिक, अब तक विभिन्न खातों से 10.24 करोड़ रुपये की अनधिकृत निकासी की पहचान की गई है. आरोप है कि यह रकम पिछले तीन वर्षों के दौरान निकाली गई थी. हालांकि, बैंक में खातों और लेनदेन का मिलान करने की प्रक्रिया अभी जारी है, ताकि कथित धोखाधड़ी की वास्तविक रकम का पता लगाया जा सके.
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पूछताछ में महिला कर्मचारी ने कबूली ट्रांजैक्शन की बात
सीबीआई को भेजी गई शिकायत में पीएनबी ने बताया कि जब ब्रांच हेड ने दीपांशी से संदिग्ध लेनदेन के बारे में सवाल किए तो वह रो पड़ी.बैंक की शिकायत के मुताबिक, दीपांशी ने स्वीकार किया कि ये ट्रांजैक्शन एक खाताधारक आशुतोष पाठक के निर्देश पर किए गए थे, जिसे वह पहले से जानती थी. बैंक के इस दावे को सीबीआई ने अपनी एफआईआर का हिस्सा बनाया है.
दूसरे अधिकारियों की यूजर आईडी का इस्तेमाल करने का आरोप
पीएनबी की शिकायत के अनुसार, बैंक के सिस्टम लॉग, यूजर एक्टिविटी रिकॉर्ड और ट्रांजैक्शन की शुरुआती जांच में सामने आया कि ग्राहकों के खातों से कई अनधिकृत लेनदेन किए गए थे. आरोप है कि दीपांशी ने बैंक की कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (CBS) प्रणाली में अलग-अलग शाखा अधिकारियों की यूजर आईडी का दुरुपयोग किया. इन आईडी के जरिए लंबे समय तक विभिन्न ग्राहकों के खातों से अनधिकृत ट्रांजैक्शन किए जाने की बात सामने आई है.
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज
सीबीआई ने अपनी एफआईआर में दीपांशी, आशुतोष पाठक और अन्य अज्ञात सरकारी और निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया है. मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की आपराधिक साजिश, विश्वासघात, धोखाधड़ी, खातों में हेराफेरी और लोक सेवकों के आपराधिक कदाचार से संबंधित धाराओं के तहत आरोप दर्ज किए गए हैं. इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं.
सीबीआई प्रवक्ता के मुताबिक, पुणे से गिरफ्तार निजी व्यक्ति आशुतोष पाठक को मुंबई लाने के लिए पुणे की विशेष सीबीआई अदालत से ट्रांजिट रिमांड हासिल किया गया है. फिलहाल जांच एजेंसी कथित धोखाधड़ी से जुड़े लेनदेन और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है.