सुबह से शाम तक सड़क किनारे पंचर बनाकर परिवार का खर्च चलाने वाला एक युवक अचानक करोड़ों रुपये के कारोबार वाली कंपनी का मालिक निकला. कम से कम सरकारी रिकॉर्ड तो यही कहानी बता रहे थे. जब केंद्रीय जीएसटी विभाग का समन उसके घर पहुंचा तो पहले उसे लगा कि कोई मजाक कर रहा है. लेकिन कुछ ही देर में उसे समझ आ गया कि वह ऐसे मामले में फंस चुका है, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी.
कहानी रामपुर बुजुर्ग गांव के रहने वाले राज प्रजापति की है. राज पेशे से पंचर बनाने का काम करते हैं. गांव और आसपास के लोग उन्हें एक मेहनतकश युवक के रूप में जानते हैं. लेकिन सरकारी दस्तावेजों में उनके नाम पर ऐसी कंपनी चल रही थी, जिसका कारोबार करीब 100 करोड़ रुपये बताया गया और जिस पर लगभग 28 करोड़ रुपये की जीएसटी देनदारी सामने आई. राज प्रजापति के मुताबिक कुछ दिन पहले उन्हें केंद्रीय जीएसटी विभाग की ओर से समन मिला. समन में जिस कंपनी का नाम दर्ज था, उसे देखकर ही वह हैरान रह गए. दस्तावेजों में लिखा था कि मेसर्स गड़जेट्रीक टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी उनके नाम पर रजिस्टर्ड है.
जांच में इस कंपनी का लगभग 100 करोड़ रुपये का टर्नओवर सामने आया है और करोड़ों रुपये के टैक्स की देनदारी भी दर्ज की गई है. राज बताते हैं कि उन्होंने कभी कोई कंपनी नहीं खोली. उन्हें यह तक नहीं पता था कि उनके नाम से कोई फर्म या बैंक खाता संचालित हो रहा है. समन हाथ में आते ही परिवार में हड़कंप मच गया. गांव के लोग भी हैरान थे कि आखिर पंचर बनाने वाला युवक करोड़ों की कंपनी का मालिक कैसे बन गया.
जब गांव पहुंची जांच टीम
मामले की जांच के दौरान वाराणसी से केंद्रीय जीएसटी विभाग की टीम गोरखपुर पहुंची. अधिकारियों ने जब दस्तावेजों में दर्ज पते का सत्यापन किया तो वे सीधे राज प्रजापति के गांव पहुंच गए. लेकिन वहां जो तस्वीर दिखाई दी, वह कागजों पर दर्ज कहानी से बिल्कुल अलग थी. जिस व्यक्ति को रिकॉर्ड में करोड़ों के कारोबार का मालिक बताया गया था, वह सड़क किनारे पंचर की दुकान चलाता मिला. घर की आर्थिक स्थिति भी बेहद साधारण थी. सूत्रों के अनुसार अधिकारियों ने राज से लंबी बातचीत की. उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और समझने की कोशिश की कि आखिर उनके नाम का इस्तेमाल कैसे हुआ.
बहन की शादी और कर्ज की मजबूरी
राज प्रजापति का कहना है कि इस पूरे मामले की शुरुआत बहन की शादी से हुई. उनके अनुसार वर्ष 2024 में परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा था. बहन की शादी तय हो चुकी थी और पैसों की सख्त जरूरत थी. इसी दौरान गांव के एक परिचित व्यक्ति ने मदद का भरोसा दिलाया. राज का आरोप है कि उस व्यक्ति ने बैंक से लोन दिलाने और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा देकर आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज अपने पास ले लिए. उस समय उन्हें यह अंदाजा भी नहीं था कि इन्हीं कागजातों का इस्तेमाल आगे चलकर एक बड़ी कंपनी खड़ी करने में किया जाएगा.
सिग्नेचर भी करवाए, वीडियो भी बनाया
पीड़ित के अनुसार आरोपी ने सिर्फ दस्तावेज ही नहीं लिए बल्कि कई कागजों पर हस्ताक्षर भी करवाए. राज का दावा है कि दो बार उनका वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया. उन्हें बताया गया कि यह प्रक्रिया लोन से संबंधित औपचारिकताओं का हिस्सा है. चूंकि उन्हें पैसों की जरूरत थी, इसलिए उन्होंने ज्यादा सवाल नहीं किए. अब उन्हें शक है कि उन्हीं दस्तावेजों, हस्ताक्षरों और वीडियो का इस्तेमाल कर उनके नाम पर फर्जी कंपनी बनाई गई.
कंपनी बनी, बैंक खाता खुला, कारोबार भी दिखा
शिकायत के अनुसार आरोपी ने राज के दस्तावेजों के आधार पर मेसर्स गड़जेट्रीक टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी पंजीकृत कराई. इतना ही नहीं, कंपनी के नाम पर बैंक खाता भी खोला गया. जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी के जरिए भारी कारोबार दिखाया गया. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रिकॉर्ड में 100 करोड़ रुपये का टर्नओवर दर्ज होने के बाद कंपनी को बंद भी कर दिया गया. यहीं से मामला कर विभाग की नजर में आया और जांच शुरू हुई.
CGST की जांच में खुली परतें
फरवरी 2026 में जांच के दौरान अधिकारियों को कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड में कई सवाल नजर आए. कारोबार और टैक्स देनदारी का आंकड़ा काफी बड़ा था. जब दस्तावेजों का सत्यापन शुरू हुआ तो कंपनी से जुड़े पते और निदेशक की जानकारी जांच के दायरे में आई. इसी कड़ी में मार्च 2026 में टीम गोरखपुर पहुंची और वास्तविक स्थिति सामने आने लगी. बाद में 27 मई को राज प्रजापति के नाम आधिकारिक समन जारी किया गया और उन्हें वाराणसी स्थित कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया.
डर गए राज, पहुंच गए पुलिस के पास
समन मिलने के बाद राज और उनका परिवार घबरा गया. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि करोड़ों रुपये के कथित कारोबार और टैक्स मामले में उनका नाम कैसे जुड़ गया. इसके बाद उन्होंने स्थानीय पुलिस से संपर्क किया और पूरी घटना की शिकायत दर्ज कराई. राज ने पुलिस को दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उन्हें एक बड़े आर्थिक अपराध में फंसा दिया गया.
पुलिस क्या कह रही है?
गोरखपुर पुलिस के अनुसार शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है. गोरखपुर की सीओ कैंट आभा सिंह का कहना है कि प्रथम दृष्टया दस्तावेजों के दुरुपयोग और धोखाधड़ी के आरोप सामने आए हैं. शिकायत में गांव के ही एक व्यक्ति पर आधार कार्ड, पैन कार्ड और हस्ताक्षर लेकर फर्जी कंपनी बनाने का आरोप लगाया गया है. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कंपनी का वास्तविक संचालन कौन कर रहा था, बैंक खातों में लेनदेन किसने किया और कथित कारोबार से जुड़े लाभार्थी कौन थे.