गाजीपुर के कटरा इलाके की ये कहानी किसी वेबसीरीज की स्क्रिप्ट से कम नहीं है- बस फर्क इतना है कि यहां कैमरा नहीं था, CCTV था... और क्लाइमैक्स में एडिट नहीं, असली खून-खराबा था. ये कहानी है दोस्ती की, वर्चस्व की, और उस भरोसे की जो धीरे-धीरे इतना जहरीला हो गया कि अंत में हर रिश्ता बंदूक की नली पर आकर टिक गया.
कटरा इलाका... गाजीपुर का वो हिस्सा जहां कुछ लोगों का रसूख चलता था, कुछ का कारोबार, और कुछ का डर. बाहर से सब कुछ बड़ा सेट-अप लगता था- होटल बिजनेस, लोकल नेटवर्क, ठेके, और इलाके में पकड़. इसी दुनिया के दो बड़े नाम थे- आलोक राय और उनके बेटे विनीत राय... और दूसरी तरफ कमलेश बिंद, शंकर पांडे और उनके साथी.
शुरुआत में कहानी गैंग की नहीं थी, कहानी 'सिस्टम' की थी. सब एक-दूसरे के साथ थे, क्योंकि साथ रहने में फायदा था. काम चलता था, दबदबा बना रहता था, और इलाके में एक अनकहा नियम चलता था- कोई भी अलग नहीं जाएगा.

पहले सब कुछ ठीक था, या यूं कहें कि दिखता था कि ठीक है. लेकिन अंदर ही अंदर हिसाब बदल रहा था. किसका फैसला चलेगा, किसकी बात आखिरी मानी जाएगी, किसका इलाके में ज्यादा असर है- ये सवाल धीरे-धीरे रिश्तों में घुसने लगे. और जब रिश्तों में 'मैं बड़ा हूं' आ जाए, तो वहां से 'हम' खत्म होना शुरू हो जाता है. कटरा गैंग अब एक नहीं रहा था... बस किसी को ये मानने में थोड़ा वक्त लग रहा था.
16 फरवरी 2024: वो तारीख जिसने सब बदल दिया
अब आते हैं उस दिन पर, जिसने पूरी कहानी का टर्निंग पॉइंट लिख दिया. 16 फरवरी 2024... एक मामूली विवाद हुआ. ऐसा विवाद जो आमतौर पर चाय-पानी में सुलझ जाता है... या फिर दो दिन की नाराजगी में खत्म हो जाता है. लेकिन इस बार मामला अलग था. ये सिर्फ बहस नहीं थी... ये सालों से जमा हुआ गुस्सा था जो बाहर निकल रहा था.
पहले कहासुनी हुई, फिर हाथापाई, फिर मुकदमे... और फिर वो चीज जो रिश्तों को सबसे तेज तोड़ती है- अपमान और बदले की भावना. बस यहीं से कटरा गैंग का 'एक था साम्राज्य' वाला चैप्टर खत्म हो गया.

कुछ ही दिनों में हालात साफ हो गए- अब कोई बीच का रास्ता नहीं बचा था. कटरा गैंग दो हिस्सों में बंट चुका था. एक तरफ आलोक राय और विनीत राय... दूसरी तरफ कमलेश बिंद और उसके साथी. जो लोग कल तक एक ही टेबल पर बैठकर प्लानिंग करते थे, अब एक-दूसरे के खिलाफ लाइन खींच चुके थे. अब बातचीत नहीं थी... अब सिर्फ संकेत थे- और वो भी अक्सर धमकी वाले. इलाके में माहौल बदलने लगा था. लोग समझ चुके थे कि ये मामला अब 'इगो क्लैश' नहीं रहा... ये सीधा-सीधा वर्चस्व की जंग है.
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फिर आता है वो दिन, जो इस पूरी कहानी का सबसे खतरनाक सीन है. कमलेश बिंद अपने साथियों के साथ बिंदु होटल पहुंचता है. और इसके बाद जो होता है, वो किसी को भी समझ आ जाए कि अब मामला कंट्रोल से बाहर जा चुका है. पहले पत्थर चले. फिर शीशे टूटे. और फिर... गोलियों की आवाज.
अगर कोई वहां होता, तो उसे लगता कि वो किसी गैंगस्टर फिल्म का क्लाइमैक्स देख रहा है. लेकिन ये फिल्म नहीं थी. और न ही कोई रीटेक था. CCTV में कैद ये मंजर बाद में पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया. अब बात साफ थी- कटरा गैंग अब सिर्फ नाम भर रह गया था. असल में ये दो दुश्मन खेमों में बदल चुका था.

इसके बाद कहानी बदल गई. अब हर दिन एक नया तनाव, एक नई धमकी, एक नया डर. इलाके में लोग नाम सुनकर चुप हो जाते थे. फोन कॉल्स बंद कमरे में होते थे. और हर मुलाकात में शक पहले आ जाता था. दोनों तरफ से शक्ति प्रदर्शन शुरू हो चुका था. और इस सबके बीच एक चीज लगातार बढ़ रही थी- बदले की आग.
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30 मई को होटल कारोबारी आलोक राय के बेटे विनीत राय की हत्या कर दी जाती है. यहीं से कहानी का टोन बदल जाता है. गाजीपुर में सन्नाटा फैल गया. लोग समझ गए कि अब मामला कंट्रोल से बाहर नहीं, बल्कि रिकॉर्ड से बाहर जा चुका है. पुलिस ने जांच तेज की. छापेमारी हुई. गिरफ्तारियां हुईं. दबिशें बढ़ीं. और फिर आया वो एनकाउंटर... जिसमें कमलेश बिंद मारा गया. कहानी का एक बड़ा चेहरा खत्म हो गया.
30 मई को कर दी गई थी विनीत राय की हत्या
गाजीपुर में 30 मई को होटल व्यवसायी विनीत राय की हत्या हुई थी. इसके पांच दिन बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक लाख रुपये के इनामी और हत्या, अपहरण व हत्या के प्रयास समेत सात मामलों में वांछित आरोपी कमलेश चौधरी बिंद को मुठभेड़ में मार गिराया, जिसके बाद मंगलवार देर शाम उसका शव पोस्टमार्टम के बाद सदर कोतवाली क्षेत्र के गैसाबाद गांव पहुंचा तो परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो उठे थे.