गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. इसमें उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत आकृति चौधरी को हिरासत में लेने के उनके आदेश को लेकर उन्हें फटकार लगाई गई थी.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत को रद्द कर दिया था और उत्तर प्रदेश सरकार को उन्हें 5 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि यह रकम गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम और उन अन्य अधिकारियों के वेतन से वसूली जाए, जिन्हें छात्रा की हिरासत से जुड़ी कार्रवाई के लिए जिम्मेदार पाया गया है.
कार्यवाही के दौरान कोर्ट ने आकृति चौधरी से जुड़े इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया फैसले का हवाला दिया और कहा कि हाईकोर्ट ने उनकी हिरासत रद्द कर मुआवजा देने का आदेश दिया था.
इलाहाबाद हाईकोर्ट की कड़ी फटकार
आकृति चौधरी की NSA के तहत हिरासत रद्द करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की थी. NSA का इस्तेमाल तब किया जाता है, जब अधिकारियों को लगता है कि किसी व्यक्ति की गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा हो सकती हैं. आकृति चौधरी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की पीठ ने पाया कि ऐसा कोई विश्वसनीय सामग्री नहीं है, जिससे यह साबित हो कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों को दंगा, आगजनी या सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए उकसाया था.
कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर प्रशासन की ओर से हिरासत आदेश पारित करने के तरीके की आलोचना की और कोर्ट ने कहा कि जिलाधिकारी से अपेक्षा की जाती है कि वह कड़े निवारक हिरासत कानून को लागू करने से पहले पुलिस रिपोर्ट और उससे जुड़ी सामग्री की सावधानीपूर्वक जांच करें. हाईकोर्ट ने NSA डोजियर तैयार करने में शामिल जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारियों के प्रति अपनी नाराजगी को उनके सेवा रिकॉर्ड में दर्ज करने का भी निर्देश दिया था. NSA के तहत हिरासत रद्द करने के अलावा हाईकोर्ट ने चौधरी को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया था.
अभी भी हिरासत में हैं आकृति चौधरी
आकृति चौधरी को अप्रैल में नोएडा के श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने 13 मई को उनके और एक्टिविस्ट-पत्रकार सत्यम वर्मा के खिलाफ NSA लगाया था. हालांकि हाईकोर्ट ने उनकी NSA हिरासत रद्द कर दी, लेकिन आकृति की रिहाई जरूरी तौर पर अपने आप नहीं होगी, क्योंकि नोएडा के श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े अन्य आपराधिक मामलों का भी वह सामना कर रही हैं.हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि अगर किसी अन्य मामले में उनकी जरूरत नहीं है, तो उन्हें रिहा किया जाए.